अपना गुरुत्वाकर्षण बनाये रख-6


1-अपना गुरुत्वाकर्षण बनाये रखें-

आपमें अपने वजन का गुरुत्वाकर्षण होना चाहिए-
अर्थात चारित्रिक वजन,गरिमा का वजन,आचरण का वजन,
श्रद्धा का वजन और आपके प्रकाश का वजन । तुच्छता और मिथ्याभिमान
से आप गुरु नहीं बनते । घटियापन,अभद्र भाषा,घटिया मजाक, क्रोध एवं
गुस्सा ये सब दुर्गुंण पूरी तरह से त्याग देने चाहिए । अपनी गरिमा अपनी
वॉणी के माधुर्य से लोगों को प्रभावित करें ।

2-विपत्ति के समय निर्विचारिता में मौन रह-

यहि आपके सामने कोई विपत्ति आती है तो
आप अत्यन्त शॉत हो जॉय ।यह एक अवस्था है।
आप मौन के उस धुरी पर पहुंचने का प्रयत्न कीजिए ।
यह शॉति आपको वास्तव में शक्तिशाली बना देगी । यह
मौन आपका नहीं है क्योंकि इस अवस्था में आप ब्रह्माण्डीय
मौन होते हैं,आपका सम्बन्ध ब्रहमॉण्ड चलाने वाली दैवी शक्ति
से होता है ।

3-जगदम्बा चक्र का जागृत होना—

यदि आपके अन्दर जगदम्बा चक्र जागृत हो
जाता है तो आपके अन्दर का भय,आशंका सब
भाग जाती है,कोई भी किसी प्रकार की भय ,आशंका
नहीं रहती। मनुष्य शेरदिल हो जाताहै ,एकदम शेरदिल,
क्योंकि देवी शेर पर विराजती है ।जो लोग दुर्गा जी को मानते है,
वे इतनी प्रभावशाली हो जाते हैं कि एक बार प्रशन्न कर लीजिए तो
दुनियॉ में किसी से डरने बात नहीं u

4-पति-पत्नी का प्रेम-

कोई भी पति पत्नी को केवल पत्नी के नाते
ही प्रेम नहीं करता,और न कोई भी पत्नी अपने
पति को केवल पति के नाते प्रेम करती है । पत्नी में
जो परमात्मतत्व है, उसी से पति प्रेम करता है,और पति
में जो परमेश्वर है,उसी से पत्नी प्रेम करती है । प्रत्येक में जो
ईस्वर तत्व है,वही उन्हैं अपने प्रिय के निकट खीचता है । प्रत्येक
वस्तु में और प्रत्येक व्यक्ति में जो परमेश्वर है,वही हमसे प्रेम कराता
है ।परमेश्वर ही सच्चा प्रेम है ।।

5-जगदम्बा की शक्ति क्या है –

देवी जगदम्बा सारी सृष्टि की मॉ है।
यह भक्तों की रक्षा करती है । यह देवी शक्ति आपके ह्दय
में होती है,ह्दय चक्र से मतलव है जगदम्बा का चक्र । इस देवी
तत्व से हमारे अन्दर सुरक्षा स्थापित होती है जिससे हम सुरक्षित होते हैं ।
श्री जगदम्बा आदिशक्ति का अंश है । दो ह्दयों के मध्य के महत्वपूर्ण विन्दु
पर उनका स्थान है । इस चक्र में सारी शक्तियॉ रखी गई हैं । यही आपको
सुरक्षा,निद्रा,ऊर्जा एवं आशीर्वाद प्रदान करती हैं । वे पूरे ब्रह्मॉण्ड की मॉ हैं,
इसलिए पूरे ब्रह्माण्ड की देख-भाल करती हैं।जगदम्बा की सभी शक्तियॉ सभी
प्रकार की नकारात्मता को नष्ट करने के लिए कार्य करती है । आप अपनी मॉ
की ज्योति बनें । आपमें वे सारी शक्तियॉ बह रही हैं । आपमें प्रज्वलित ज्योति
है जिसे आप अधिक से अधिक फैलाएं । यदि आपके मध्य ह्दय पर वाधा जान पडती
है तो आप जगदम्बा का मंत्र लेते हैं । इसके लिए कहना पडता है कि “मैं साक्षात जगदम्बा
हूं” ,तब आपमें जगदम्बा जागृत होती है ।जगदम्बा का चक्र जागृत होने से भय,आशंका,सब
भाग जाता है ।।

6–हम स्वयं अपने से अपरचित हैं–

मनुष्य अपने से दूर भागा चला जा रहा है,
इसलिए कि हम अपने से अपरचित हैं,अपने सौन्दर्य
से,अपने वौभव से,अपने ज्ञान से और अपने प्रेम से अपरचित,
वह आनन्द की खोज बाहर की ओर करते हुये दौड रहा है ।पर
आंनंद तो बाहर है ही नहीं,यह तो अंदर है,आपमें है,आप स्वयं आनंद
स्वरूप हैं । आप परमात्म स्वरूप हैं,ऐसा सब लोग कहते हैं ।

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