आपका भविष्य आपके चक्रों पर निर्भर(सहजयोग)-5


1- नकारात्मकता शक्ति से स्वयं को खतरा है

       आप एक बहुत बडे तपस्वी बन सकते हैं
जो दूसरों को श्राप दे सकें, उन्हैं कष्टों में डाल
सकें, और आप यहीं सोचते हैं कि यह बहुत बडी
शक्ति है।बल्कि यह बहुत बडी शक्ति नहीं है,आपकी
अपनी शक्ति ही आपका जीवन ले लेगी।इसलिए आप
जब अपनी कुण्डलिनी उठाते हैं तो आपको भक्ति मार्ग
पर चलना होगा अपने अन्दर अवलोकन करें कि मुझमें
क्या कमी है,यह खोजने का प्रयत्न करें कि आपका क्या
आदर्श है। आपको अपने बॉये पक्ष पर स्वामित्व पाना होगा।
आपमें कुंण्डलिनी जागृत हो गई, परमात्मा से एकाकारिता हो
गई,तब आप दांईं ओर गतिशील हों ।अन्य लोगों पर स्वामित्व

2- मूलाधार जागृत करें तो पवित्र बन जाओगे

           आपका मूलाधार जागृत होता है
तो आप अत्यन्त पवित्र हो जाते हैं ।आपमें
वासना समाप्त हो जाती है,आपका छिछलापन
समाप्त हो जाता है जब तक यह नहीं होगा आप
सहजयोग में नहीं रह सकते हो । आप अपने अन्दर
पवित्र विवेक विकसित करें उसका सम्मान करें और उसका
आनंद लें और यह तभी घटित होगा जब आपका मूलाधार जागृत
होगा। क्योंकि बॉयें मूलाधार में गणेश जी विद्यमान हैं जिससे हम
अपने दॉये ओर के दोषों को दूर करते हैं ।

3- स्वादिष्ठान जागृत करें तो यश मिलेगा

              स्वादिष्ठान ऊंचा उठाने के कारण
सृजन करने की क्षमता जाग उठती है ।इतिहास
गवाह है कि पूरे विश्व में प्राचीन काल से यश और
धन कमाने की होड रही है यह शक्ति स्वादिष्ठन से ही
प्राप्त होती है ।यहॉ से हमें सभी प्रकार की अटपटी और
गन्दी चीजों का सृजन करने की आक्रामकता पैदा होती है।
वे लोग जो यश कमाना चाहते हैं या पद हासिल करना चाहते
हैं दॉयें स्वादिष्ठान से प्राप्त होते हैं । मध्य स्वाधिष्ठन पर जब
हम होते हैं तो हमारे अन्दर सृजनात्मकता पैदा होती है सुन्दर
गहनता पूर्ण आध्यात्मिक कला का सृजन होता है। लेकिन इस
उन्नत्ति के साथ सभी प्रकार की गन्दगी भी आ जाती है।लेकिन
हमें जीवन के उत्थान की बात सोचकर चलना है ।

4- इतिहास के पन्नों की दृष्टि

           विश्व इतिहास में वक्त ऐसा आया
कि लोग धन कमाने के पीछे पड गये यह नाभि
चक्र का कमाल है। विश्व में बॉये ओर (भारत क्षेत्र)के
लोग धन कमा रहे थे, जबकि दायें ओर(पश्चिमी देश) के
लोग धन के कारण आक्रामक हो गये थे उन्होंने सोचा कि वे
विश्व के शिखर पर हैं हम से श्रोष्ठ कोई नहीं हैं। उनकी इस सोच
ने उन्हैं समाप्त कर दिया और उन्हैं उस विन्दु तक ले गई कि उन्हैं
सोचने का मौका मिला कि धन विनाश के लिए नहीं है।धन तो निर्माण
के लिए होता है,देश का निर्माण के लिए,मानव शॉति,प्रेम,सहयोग तथा
सभी प्रकार के अच्छे गुणों के निर्माण के लिए। ह्दय चक्र में यही लोग
मातायें भी भयानक थीं अपने बच्चों तथा अन्य लोगों पर रौब जमाने
का प्रयत्न किया । अपने बच्चों के लिए वे कोई बलिदान न कर सकीं,
वे अपने बच्चों व पति के प्रति आक्रामक थीं पितृत्व भाव समाप्त हो
गया था। विशुद्धि चक्र में इन लोगों ने पूरे विश्व पर अपना कब्जा
करना चाहा, ताकि वे सम्राट बन सकें । उन्होंने साम्राज्य बनाये
और इस प्रकार से अमानवीय व्यवहार किये जिसे करना मानव
के लिए शर्मनाक है। वास्तव में वे लोग राक्षश थे,ये राक्षशी
गुंण आज भी बने हुये हैं। इन लोगों के कारण ही विश्व दो
भागों में बंटा है। कुछ लोग तो आक्रामक हैं और दूसरों
को कष्ट देते हैं।परन्तु दूसरे वे लोग भी हैं जो सूझ
-बूझ वाले हैं उनके द्वारा अच्छी संस्थायें स्थापित
की गईं हैं लेकिन लक्ष्य प्राप्ति में वे अधिक
सफल नहीं हो पाये हैं,क्योंकि उनके उच्च
पदों के लोग ही पूरा नियंत्रित कर रहे
हैं।जबकि वे स्वयं को नियंत्रित नहीं
कर पाते हैं उनके आचरण
ने इस चक्र के सारे
कार्य विगाड दिया है।

5- विश्व शॉति के लिए आध्यात्म को गतिशील होना होगा

           आज पूरे विश्व में अशॉति का
माहौल बना हुआ है सर्वत्र युद्ध चल रहे हैं।
मार-काट और विनाश की स्थिति बनी हुई है।
यह क्यों ?लगता है आध्यात्मिक लोग अत्यन्त
मौन हो गये हैं, और वे स्वयं अपने आध्यात्मिक
जीवन का भरपूर आंनंद ले रहे हैं।विश्व में आध्यात्मिक
लोगों की कमी नहीं है। बस उन्हैं गतिशील होना होगा,विश्व
शॉति के लिए कुछ न कुछ करना होगा।हम अपनी आध्यात्मिक
उन्नति से सन्तुष्ट हैं,हमें यह देखना होगा कि हमने अन्य लोगों
की आध्यात्मिक उन्नत्ति में कितना योगदान दिया।और वे कहॉ तक
पहुंचे हैं। क्या हम उन्हैं परिवर्तित कर सकते हैं? आपने क्या किया ?
आज विश्व में सबसे बडी विपत्ति यही है कि जो लोग आध्यात्मिक हैं,
जिन्होंने कि महान बुलंदियॉ प्राप्त कर ली हैं, उन्हैं तनिक भी चिन्ता
नहीं है कि क्या किया जाना चाहिए ।अपनी आध्यात्मिकता का आनंद
लेने के लिए वे पूजाओं में जाते हैं, अधिक से अधिक आध्यात्मिकता
प्राप्त करते हैं, परन्तु अन्य लोगों को परिवर्तित करने के लिए उन्होंने
कोई सामूहिक कार्य नहीं किया। अपना अन्तर्वलोकन करके देखें और
अधिक से अधिक लोगों को सहज योग में लाने का प्रयास करें।

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