ईश्वर के प्रति समर्पण से जीवन की शक्ति मिलती है


 

       शरणागत का
शाब्दिक अर्थ है शरण
में आया हुआ, किंतु इसका
निहितार्थ आध्यात्मिक संदर्भ
में ईश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण
से है। अपनी रक्षा के लिए शरण में
वही आता है जिसे कहीं से किसी आपदा
का आभास होता है। सभी आपदाओं, विपत्तियों,
प्रवृत्तियों व समस्याओं के निराकरण के एकमात्र
आधार ईश्वर ही हैं।

       किसी एक कष्ट
के कारण शरणागत होने
पर शांति प्राप्त होती है और
सभी कष्टों के निराकरण की
अनुभूति होती है। ईश्वर की शरण
में जाना साधक को निर्भय बनाता है।

       प्रभु की शरण
प्राप्त करने के लिए
साधक में श्रद्धा और वि-
श्वास का होना आवश्यक है।
इसके अलावा साधक में सहृदयता,
सरलता, शांति व समदृष्टि का प्रवेश
स्वत: हो जाता है। वह ईष्र्या-द्वेष से
अलग सर्वदा आनंदातिरेक में नि-
मग्न रहता है। ईश्वर ही सृष्टा हैं।
समर्पित भाव से उनकी शरण में
पहुंच जाने से अपार शांति व
संतोष की अनुभूति होती है। जो
प्रभु को सर्वस्व अर्पण करने के लिए
तैयार है वही सच्चा शरणागत है। वस्तुत:
ईश्वर समस्त गुणों के सागर हैं। उनकी
शरण में आया हुआ व्यक्ति गुणों से
अछूता नहीं रह सकता। शरणागत
प्रभु के सान्निध्य में आने पर स्वत: ही
गुणों व अच्छाइयों को आत्मसात कर लेता
है। उसका सांसारिक दोषों-काम-क्रोध, लोभ-
मोह व अहंकार से दूर-दूर तक का संबंध
नहीं रहता। ऐसी स्थिति में प्रभु को
समर्पित पुरुष सद्गुणों से संपन्न
हो जाता है। उसे सांसारिक
उपलब्धियों-धर्म, अर्थ, काम
व मोक्ष में से किसी की भी कामना
नहीं सताती। धर्म का पालन तो वह
स्वयं स्वेच्छापूर्वक कर ही रहा है।
अर्थ व काम का लालच उसके पास तक
नहीं फटकता। वह पुरुष समय के अनुसार
मोक्ष का अधिकारी बन जाता है। उसकी
आत्मा परमात्मा के सानिध्य में पहुंच
कर सर्वोच्च आनंद की अनुभूति
करती है। शरणागत होने के
लिए कोई विशेष प्रयास
करना आवश्यक नहीं है।
अपने आपको भगवान पर पूर्णत:
आश्रित करते हुए करने योग्य कर्मो
को फल की इच्छा के बगैर करना चाहिए।
शरणागत होने के लिए कुछ नियम
बताए गए हैं, जिनका आशय यह
है-यह संकल्प कि मैं सदा प्रभु
के अनुकूल रहूंगा, प्रतिकूलता
का त्याग करूंगा, प्रभु मेरी रक्षा
करेंगे, प्रभु मेरे संरक्षक हैं, भगवान
के प्रति पूरा विश्वास करते हुए और
उनके सामने दीनता के भाव से प्रार्थना
करूंगा। इन नियमों पर अमल कर आप
चेतना में व्याप्त ईश्वर की शरण में जा सकते हैं।

 

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