उदासीनता हमारा दुश्मन है-1


           उदासीनता हमारा वह दुश्मन है
जिससे हम किसी भी कार्य से जी चुराते हैं
अथवा अनमने भाव से उस कार्य को करते हैं।
उदासीन लोगों की तरक्की केो सभी रास्ते बन्द हो
जाते हैं । आलस्य के कारण बनते- बनते कार्य बिगड
जाते हैं, और कभी-कभी उदासीनता के कारण लोग मौत
के मुंह में चले जाते हैं।उदासीन लोग भ्रम के बन्धन में जकडे
होते हैं, उनका जीवन नीरस रहता है लेकिन उन्हैं कोई परवाह नहीं
रहती है।ऎसे लोगअपना नुकसान तो करते ही हैं,मगर उस समाज के लिए
भी कष्टकारी होते हैं एक कम्पनी का मालिक अपनी कम्पनी के कर्मचारियों की
सुस्ती से परेशान था, कारोबार मन्दा चल तहा था जब  विशेषज्ञों  की    राय ली गई तो
ज्ञात हुआ कि एकमछली पूरे तालाब को गन्दा कर  देती है। यदि  उस  आलसी  को बाहर  कर
दिया जाय तो स्थिति सुधर सकती है। यदि  मूर्तिकार  विशाल  पत्थर  को  देखकर  उदास  हो जाय
कि इससे मूर्ति कैसे बन  पायेगी  तो वह मूर्तिकार  नहीं  कहलायेगा। अगर  हम  यह  सोचते  हैं  कि  छोडो
कौन इतनी मेहनत करेगा या देखा जायेगा, तो ऎसे प्रश्नसोचकर हम उदासीनता से जकड जाते हैं,उदासीनता
से मुक्ति के लिए हमें अपने जीवन के क्रम को उचित दिशा में नियोजित करना होगा इसके लिए उपयोगी और
औचित्यपूर्ण का चुनाव करना होगा,उत्थान और पतन के रास्ते का चयन अपनी इच्छा पर निर्भर है,और ईश्वर
ने तो मनुष्य को पूर्ण स्वतंत्रता दी है  कि  वह  अपनी इच्छा  शक्ति, ज्ञानशक्ति तथा क्रिया शक्ति  का  उपयोग
किसी भी प्रयोजन में कर सकता है तो फिर यह  उदासीनता क्यों।इसलिए हमें  इस तथ्य  को  अपनाना है कि ,मैं
क्या नहीं कर सकता हूं यह शक्ति या धन कार्य पूर्ण करता है। फिर देखना समय आने पर सब  अपने  आप ठीक
होजायेगा ,हमारी उदासीनता तो हमारी जड में निहित होता है ।देखा जायेगा वाली सोच भी हमें आलसी बना देता
है,।सक्रिय बनिए, जिस दिन सक्रियता का अभाव  उत्पन्न हो जाता है, बस उसी दिन जिन्दगी में निष्क्रियता का
आना प्रारम्भ होता है, सफलता के लिए जिन्दगी में  आलस्य  को  किसी भी स्थिति में न आने दें । अपने  मित्रों से
मिले-जुलते रहने की आदत डालें, अकेलापन से भी उदासीनता आती है,पौष्टक भोजन करें,कठोर परिश्रम से आत्म
विश्वास बढता है, अधिक दौड लगाने और व्यायाम करने से अधिक मात्रा में आक्सीजन  प्राप्त  होता है,अवसाद की
स्थिति में चिकित्सा का सहारा लें ।

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