कार्य उत्कृष्ट चाहते हो तो सधा हुआ ध्यान करेना सीखें


 

                        ज्यादातर लोग समझते हैं
कि ध्यान करने से व्यक्ति अंतर्मुखी हो जाता
है और सांसारिकता से कट जाता है, लेकिन यह
गलत धारणा है। ध्यान को साधकर व्यक्ति सांसारिक
जीवन को सही ढंग से जी पाता है। यह व्यक्ति को
अधिक चेतनावान बनाता है। ध्यान में हम भीतर
जाकर अपने बाहर को और भी स्पष्ट रूप से
देखने लगते हैं।

                      एक जैन गुरु अपने शिष्यों
को ध्यान का प्रशिक्षण दे रहे थे। एक शिष्य
उनसे कहने लगा कि अब मैं ध्यान में निष्णात
हो गया हूं, अब मुझे लोगों को प्रशिक्षित करने की
अनुमति दीजिए। गुरु ने कहा- कल मैं तुम्हारी परीक्षा
लूंगा। अगले दिन बारिश हो रही थी। शिष्य छाता लेकर
पहुंचा। गुरु के कक्ष में प्रवेश करने से पहले उसने अपनी
चप्पल, छाता और झोला बाहर छोड़ गुरु जी के सम्मुख
आकर बैठ गया। गुरु जी ने पूछा- तुम क्या-क्या लेकर
आए थे? शिष्य बोला- मैं छाता और झोला लेकर आया
था, जिसे मैं कक्ष के बाहर छोड़कर आया हूं। गुरु जी बोले-
तुमने जब अपनी चप्पल उतारी, तो छाते को बाएं रखा या
झोले को? शिष्य अचकचा गया। बोला- मैं ठीक-ठीक नहीं
कह सकता, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने झोले को बाएं
रखा। गुरु जी बोले- तुम अभी ध्यान का प्रशिक्षक नहीं बन
सकते, क्योंकि तुम्हारा ध्यान अभी सधा नहीं है।

                          हम कोई काम ध्यान से
क्यों नहीं कर पाते? क्योंकि हमारी चेतना
तनाव, दबाव और कुंठा में दबी रहती है। हम
फूलों की सुंदरता को देखकर भी नहीं देख पाते।
किसी की बात को सुनकर भी नहीं सुन पाते। हमारे
ध्यान पर दबाव और कुंठाएं छाई रहती हैं। एेसा हमारे
अहंकार यानी ‘अपने होने का बोध (अहंकार) के कारण
होता है। हम किसी सभा में बोल नहींपाते, किसी के सामने
गाना गाते हैं, तो सुर बिगड़ जाते हैं या कोई नया काम करने
का साहस नहींकर पाते। आखिर हमें कौन रोकता है? दरअसल,
यह अपने होने का बोध ही है, जो हीनता बनकर हमारे भीतर
एक डर पैदा कर देता है। अहंकार के जाते ही हम सभी विकारों
से बाहर आ जाते हैं और खुल कर पूरी सृष्टि को समग्रता से देखने
लगते हैं। यह काम ध्यान से संभव होता है। ऐसे में हम जो भी काम
करते हैं, वह उत्कृष्ट होता है। यही कारण है कि बौद्ध धर्म से निकले
ध्यान पर आधारित जेन के साधक जापान में सेमुराई थे, जिनका वार
अचूक माना जाता था। जूड़ो, कराटे आदि युद्ध कलाओं के पीछे भी ध्यान
बड़ी भूमिका निभाता है।

 

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s