क्षमा से प्रेम बढ़ता है और द्वेष से घृणा


 

                           क्षमा साधकों का एक
बड़ा गुण है। क्षमा के सामने आतंकी भी
शर्मिदा हो जाता है। यही पशुबल पर आत्मबल
की विजय है। परमाणु बम केवल ध्वंस कर सकता
है, किंतु क्षमा की कोख से अभिनव निर्माण का जन्म
होता है।

                            एक अंग्रेज विचारक ने
स्वीकार किया है कि गांधी की क्षमाशीलता
के समक्ष विजय की चाह हमें असहाय बना देती
थी। हृदय संपूर्ण व्यक्तित्व का राजा है। हृदय से निकली
क्षमावृत्ति दूसरों का दिल जीत लेती है, जबकि युद्ध शरीर
को जीतने की भाषा बोलता है। अक्रोध से क्रोध, प्रेम से घृणा
और क्षमा से आतंक का अंत हो जाता है। आतंक एक मनोरोग
है, जिसकी अचूक औषधि क्षमा ही है। क्षमा वह ताकत है जो
आततायी को झुकने के लिए मजबूर कर देती है।

                                  सद्भा ही हृदय परिवर्तन
का एकमात्र उपाय है। प्रतिहिंसा इंसानी दुर्बलता
है और क्षमा वीरों का आभूषण है।     इसीलिए ईसा
ने शत्रुओं से भी प्यार करने की बात की है।      अहंकार
के दंश और अंतहीन प्रतिहिंसा से निजात तभी मिल सकती
है जब हृदय में क्षमा का वर्चस्व कायम हो जाता है। वर्तमान
पीढ़ी इतनी प्रतिक्रियावादी है कि वह एक शब्द सहन करने के लिए
तैयार नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार क्षमावृत्ति अपनाने से मानसिक
तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन भी क्षीण हो जाते हैं। क्षमा का भाव
जगने से अनिद्रा, अवसाद और हृदयाघात की संभावना कम हो जाती
है। शत्रुता एक प्रकार से सतत चलने वाला ‘क्रोध है। भारतीय ऋषियों
ने स्पष्ट कहा है कि जो व्यक्ति क्षमा करने के बाद भी शत्रुता नहीं
भूलता है तो यह मान लेना चाहिए कि उसने क्षमा की ही नहीं।
तनाव को जीतना क्षमा की जीत है।

                  भारतीय धर्म-दर्शन की मान्यता
है कि क्षमा वही कर सकता है, जो शक्तिमान
हो। निर्बल व्यक्ति क्षमा नहीं कर सकता। क्षमा करने
से मन शांत हो जाता है और मन में प्रतिशोध का भाव
खत्म हो जाता है। ध्यान रहे, जब तक मन में किसी व्यक्ति
के प्रति प्रतिशोध का भाव रहता है तब तक उसे शांति हासिल नहीं
हो सकती। नि:संदेह शांति से बढ़कर इस विश्व में कुछ भी नहीं है।
शांति आपकी सकारात्मक सोच में निहित है और क्षमा एक बड़ा
सकारात्मक गुण है।

 

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