चोप्ता और तुंगनाथ की यात्रा-2


1-चोप्ता की यात्रा-

                अगर आप चोप्ता पहुंचते हैं तो थोडा रुकें चाय पीते हैं,
तो पिएं फिर अपनी योजना बनाएं क्योंकि वहॉ पर पर्यटक और धार्मिक
दोनों स्थान हैं ।   अच्छा होता आप उस दिन वहीं ठहरें शाम के समय घूमने
निकलें खुला क्षेत्र है,जगह-जगह टूरिस्ट मिलेंगे हो सकता है विदेशी अधिक मिलेंगे,
पर्यटन निगम,जडीबूटी संस्थान,पन्तनगर शोधसंस्थान के केन्द्र होंगे,साथ ही प्राकृतिक
सौन्दर्य जो विखरा मिलेगा, जिसमें ऊंचे देवदार,सुराही के वृक्ष और उनके बीच खुला बुग्याल,
सामने मनमोहक बर्फीली पहाडियॉ । शाम को वहीं हाल्ट करें, ठहरने के लिए होटल हैं,छोटे बडे ।

2-तुंगनाथ की यात्रा-

         सुबह उठकर चलें तुंगनाथ की ओर जी हॉ चढाई है जंगल से होकर
चलना है,घबडायें नहीं कठिनाई तो होगी ही मनर  आप स्वर्ग की और बढ रहे
हैं रहे हैं, निश्चित तौर पर स्वर्ग है ।एशिया में सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित मन्दिर,
काफी भीड होगी चलते समय,रास्ते से ही आपको बुग्याल मिल जायेगा अर्थात अधिक
ऊंचाई पर मिलने वाली महीन घास । रास्ते में अमूल्य जडी बूटी मिलेगी कडो,अतीस आदि
फिर दिखाई देगा तुंगनाथ वहॉ भी होटल हैं, खाने पीने की पूरी व्यवस्था है, शुद्ध दूध  मिलेगा,
होटल छोटे पुराने मकान,देखकर अपने पुराने समय के घर की याद आ सकता है आपको के। बात
करके एक कमरे में अपना सामान रख दें और ताला लगा दें अब मन्दिर में जॉय आगर सावन-भादो
के महीने की बात है तो मन्दिर में जाने से पहले सामने झरने होंगे स्नान कर लें,ध्यान रखें यहॉ जून
के महीने में भी ठंड रहती है । मन्दिर में जाकर पूजा कर लें बाहर कई मन्दिर हैं छोचे-छोटे देखें । वापस
कमरेमें आकर भोजन करें।फिर आप अपनी योजना बना सकते हैं ।यदि आप थके नहीं हैं,क्योंकि आपको
शाम का ठहराव चोप्ता में करना है,वापस भी जाना है,समय को देख लें।अगर 1 भी बज रहा हो तो काफी
समय है ।आप चन्द्रशिला जाने की योजना बना सकते हैं,वहॉ से 3 की.मी. दूर ऊंचाई पर वहॉ कोई मन्दिर
नहीं है,बस सिर्फ दुनियॉ दिखती है प्रकृति का अजूबा आनन्द मिलता है मानो आप एव्रेस्ट पर पहुंच गये  हों,
सचमुच स्वर्ग का आनन्द मिलता है, बहुत ऊंचाई  पर है, वहॉ फौज की टुकडी  भी  रहती है, आप जाते हैं तो वे
स्वागत करेंगे आपका।चन्दर्रशिला गगन चुम्बी चोटी चारों ओर मानो सारी दुनियॉ दिख रही हो ।अपने यादगार
में लोग पत्थरों पर  कुछ लिख देते  हैं, मैं  हर  एक दो साल में यहॉ जाना नहीं भूलता ।कुछ देर देखें, परखें,  टहलॆं,
आराम करें और फिर वापस लौटें । तुंगनाथ  में  चाय  पियें  फिर  अपना  सामान है तो लेकर  चलें चोप्ता, शाम को
अच्छी नींद आयेगी । क्रमशः आगे बताया जायेगा।चोप्ता से सुबह चलें, यदि अपना वाहन है तो ठीक है वरना लोकल
वाहन मिलेंगे अथवा गुप्तकाशी या गौरीकुण्ड से आने वाले वाहन में बैठें ,घने जंगल से मार्ग, आगे बढने पर खुले तप्पडों
में बाहरी लोगों के टेण्ट लगे  दिखेंगे  खाना  बना  रहे होंगे,उनके बच्चे खेल रहे होंगे कोई टहल रहे होंगे जोर-जोर से हंस रहे
होंगे या कुछ बोल रहे होंगे 5 कि.मी की दूरी पर मिलेगा  धोती  धार  वहॉ  पर  एक होटल मिलेगा आगे फिर आरक्षित जंगल
बहुत घना जंगल,बहुत ऊंचे पेड दिखाई देंगे सुनसान,जंगल में जंगली जानवर भी दिखाई देगा ।इसी जोगल में मिलेगा राष्टीय
कस्तूरा मृग विहार पार्क वहॉ पर रुकें और पार्क में इन मृगों को देखें, निहारें , यही  पर   एक मचान  बना  है  जिसमें जाकर यह
नजारा देखा जा सकता है ।20 कि.मी की दूरी पर मिलेगा आपको उत्तराखण्ड जडी-बूटी निदेशालय चाहें तो आप रुकें देखें ।यहॉ
पर जडी- बूटियों से दवाई बनाने के लिए मशीनें लगी हैं तथा शोध कार्य और जडी-बूटियों का उत्पादन होता है ।यहॉ पर उत्तराखण्ड
जडी-बूटी निदेशक का कार्यालय है । फिर आगे बढे अब आपको खुली चौरस घाटी दिखेगी,मण्डल घाटी ।

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