जीवन चैतन्यमय अवस्था का नाम है-1


             सामान्यतः मनुष्य जीवन सुख या दुख भोग
की अवस्था का नाम है।  यह  सुख-दुख के आवरण से ढका
हुआ है,लेकिन यह जीवन उसके परे चैतन्य अवस्था भी है।अतः
चित्त और आनन्द या ज्ञान और भक्ति जीवन की साधारण सम्पत्ति
है,   इसके लिए खोज करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि  सुख-दुख के
आवरण को भेदकर उससे ऊपर पहुंचकर प्राप्त किया जा सकता है।  और
फिर स्वयं यह चैतन्यमय स्वरूप स्वतः ही परिलक्षित होता है ।जिससे प्राप्त
ज्ञान की अनुभूति से मनुष्य कृतार्थ होता है।

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