ध्यान से प्रेम होता है क्रोध नहीं-1


जब ध्यान की बात आती है तो उस समय निर्विचारिता
की स्थिति उत्पन्न होती है,और जहॉ निर्विचारिता होगी वहॉ
ईश्वरीय शक्ति उत्पन्न होगी ,प्रेम जिसका प्रतीक है, इसलिए
ध्यान करने पर प्रेम स्वतःही उत्पन्न हो जाता है अकबर ने अपनी 
आत्म कथा में ध्यान के सम्बन्ध मे एक रोचक घटना का उल्लेख किया
हैः-कि जब मैं शिकार खेलने जंगल में गया था और साथियों से बिछुड गया,
रास्ता भी भूल गया अंधेरा होनो लगा,मैं डरा हुआा था रात को कहॉ रुकूंगा,जंगल
में खतरा था, भाग रहा था, तभी उसे सॉझ के वक्त प्रार्थना की याद आई यह तो
जरूरी है, अपनी चादर विछाकर नमाज पढने लगा उसी समय अकबर ने देखा कि कोई
स्त्री भागती हुई जा रही थी उसकी चादर में पॉव रखकर और उसपर घक्का देकर चली गई।
अकबर को बडा क्रोध आया जल्दी-दल्दी नमाज पूरी कर घोडे पर सवार होकर भागा और रास्ते
में उस स्त्री को पकड लिया और कहा बदतमीज तुम्हारी यही तमीज हैकि नमाज पढते वक्त तुमने
ऎसा व्यवहार किया और फिर में तो एक सम्राट हूं। उस स्त्री ने जवाव में कहा महॉराज मुझे क्षमा करें
मुझे पता नहीं था कि आप नमाज पढ रहे हैं,लेकिन महॉराज मुझे आपसे एक बात पूछनी है कि मैंअपने
प्रेमी से मिलने जा रही थी तो मुझे कुछ भी नहीं दिखाई दिया कि मेरा प्रेमी राह देख रहा होगा,लेकिन आप
तो परमात्मा से प्रार्थना कर रहे थे,मेरा धक्के का आभास आपको कैसे हो गया आपकी यह कैसी प्रार्थना है और
ध्यान में तो प्रेम होता है आप तो गुस्से में हैं,इसका मतलव आप ढोंग कर रहे थे ।जो परमात्मा के सामने डा
हो ,उसे तो सब भूल जाना चाहिए था,कोई आपकी गर्दन भी तलवार से काट लेता तो भी पता न चलता अकबर
के दिल को कठोर चोठ पहुंची और इस घटना को अपनी आत्म कथा में लिखवाई । अकबर को महशूस हुआ कि 
प्रेम का ही विकास प्रार्थना है ।ध्यान में प्रेम का जागरण होता न कि क्रोध का ।

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s