ध्यान सोच को निर्मल तथा हृदय को शुद्ध करता है


 

                  वैसे अगर देखें तो
ध्यान का संबंध आत्मा, ईश्वर
आदि अतींद्रिय तत्वों के साथ जोड़ा
जाता है, किंतु लौकिक जीवन में भी
सकी उतनी ही उपयोगिता है जितनी
आध्यात्मिक जीवन में। हम स्वास्थ्यकर
खान-पान और व्यायाम द्वारा शारीरिक
शक्ति प्राप्त करते हैं, उसे अच्छे या बुरे
किसी भी कार्य में लगाया जा सकता है।
वैज्ञानिक अपने चिंतन का उपयोग नवीन
अन्वेषण में करता है। उसने ऐसी दवाओं का
पता लगाया जिनसे करोड़ों व्यक्तियों के प्राण
बच गए। दूसरी तरफ उसने ही परमाणु अस्त्रों
की भी खोज की, जिनसे समस्त मानवता खतरे
में पड़ गई। व्यापारी अपना दिमाग व्यवसाय की
वृद्धि में लगाता है और औद्योगिक विकास के साथ-
साथ शोषण के तरीके भी सोचता है। राजनीतिज्ञ एक
ओर प्रजा-पालन की बात सोचते हैं तो दूसरी ओर
अपने विरोधियों के नाश के बारे में भी। इस प्रकार,
दिमाग का उपयोग दोनों दिशाओं में होता आया है।
इसीलिए हमारे ऋषियों ने ध्यान को अध्यात्म के साथ
जोड़ा। मानव शरीर में कुछ ऐसे केन्द्र हैं जो चेतना के
विभिन्न स्तरों को प्रगट करते हैं।

             जब मन नीचे के
केंद्रों पर अधिष्ठित होता
है तो क्रोध, भय, ईष्र्या आदि
विचार घेर लेते हैं। शरीर अस्वस्थ
रहने लगता है और मन अशांत, पर
जब उन केंद्रों को छोड़कर ऊपर के कें-
द्रों पर पहुंचता है तब जीवन के शक्तिशाली
तत्वों के साथ संबंध जुड़ जाता है। सौंदर्य, प्रेम
आदि सात्विक गुणों की अभिव्यक्ति होने लगती
है। विचार व व्यवहार में एकसूत्रता आ जाती है।
पवित्रता, नम्रता, सहानुभूति आदि दैवीय गुणों का
विकास होने पर सच्ची शक्ति प्राप्त होने लगती है।
साधक को दृढ़ निष्ठा और एकाग्रता से ध्यान द्वारा
जो प्रकाश मिलता है उससे वह अपनी प्रत्येक इच्छा
पूर्ण कर लेता है। व्रत, नियम, उपवास आदि सकारात्मक
सोच को उत्पन्न करने के माध्यम हैं, पर हम उस मूल
तत्व को भुला बैठे हैं। हम देखें कि हमने अपने में से कितने
विकारों को दूर किया। आत्मा में कितने गुणों का प्रादुर्भाव हुआ।
क्या हम ध्यान करने की सही विधि को प्राप्त कर सके। वस्तुत:
ऐसा कोई लक्ष्य नहीं, जिसे ध्यान के द्वारा प्राप्त न किया जा सके।
ऐसा कोई रोग नहीं, जिसे ध्यान के द्वारा दूर न किया जा सके।
विधिपूर्वक किया गया ध्यान हृदय को शुद्ध करता है और सोच को
निर्मल बनाता है। ध्यान ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पंख प्र-
दान करता है और भौतिक जगत की संकुचित परिधियों से ऊपर
उठने की साम‌र्थ्य देता है।

 

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