बद्रीनाथ,नीती तथा मॉणॉ घाटी की यात्रा-3


1-बद्रीनाथ की यात्रा-
जोशीमठ में भी कई मन्दिर हैं, लोगों से पूछकर देखनें जायें ।
अगले दिन सुबह बद्रीनाथ के लिए चलें अगर सुबह 5 बजे चलते हैं तो 10-11
बजे तक आप बद्रीनाथ पहुंच जायेंगे,जाते ही पहले ठहरने के लिए व्यवस्था करें ।बद्रीनाथ
में होटल,धर्मशाला,भरे पडे हैं,जितने भी पहुंचे सबकी व्यवस्था हो जाती है धर्मशालों की तो
भरमार है,होटल बहुत अच्छे और सामान्य भी है आप अपने हिसाब से देख लें ।ठहरने की व्यवस्था
हो जाने पर आप सीधे नहाने के लिए तप्त कुण्ड में लचे जॉय ।नहाने के बाद मन्दिर के प्रॉगण में जाकर
हाथ जोडें और अपने कमरे में लौटें ।भोजन कर लें,फिर आराम करलें,अपना प्लान बना लें कि आपको बद्रीनाथ
में कितने दिन रहना है ।कमसे कम दो दिन तो आपको रुकना ही होगा ।दिन में आराम करने के बाद शाम को बद्रीनाथ
घूमें टहलते टहलते मॉणॉ 3 की.मी. दूर है,पैदल ही जॉय,यह गॉव भारत का आखिरी गॉव है, इसी गॉव में व्यास मुनि की
गुफा है,गणेश गुफा है ,जरूर जॉय और पंडित जी से इनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में अवश्य पूछें ।उसके वाद नीचे अलकनन्दा
पर पुल है, उसे पार करके नदी के दूसरे छोर से टहलते हुये जॉय तो आपको आगे बद्रीनाथ का मन्दिर मिलेगा । शाम का समय हो
चुका होगा आरती का समय हो गया आप उसमें अवश्य सम्मिलित हों, आरती के वाद आप लौटें अपने कमरे में भोजन कर ले और सो
जॉय ।अगले दिन आपको सुबह 4 बजे उठना है,ध्यान रखें कोई भी महीना हो बहुत ठंडा रहता है इसलिए पूरे कपडे ले जॉय ।सुबह उठकर
नहाने के लिए जॉय 4 बजे । क्योंकि नहाने के बाद आपको सुबह की आरती में सम्मिलित होना है,आगर सितम्बर-अक्टूवर में आप यात्रा कर
रहे हैं तो भीड कम हो जाती है,और आपको आराम से मन्दिर के अन्दर ही आरती करने का मौका मिलेगा,अन्यथा दूर से ही खडे होकर देखना
होगा । आप नहायें और पूजा की थाली खरीद लें और इन्तजार करें कपाट खुलने का,सभी लोग आपकी तरह थाली लिए इन्तजार में होंगे । अब
कपाट खुल चुका होगा अगर अधिक भीड है तो आप जहॉ पर भी हैं आरती की थाली वहॉ तक पहुंच जायेगी,आपकी थाली वहॉ पहुंचाने की व्यवस्था
हो जायेगी,इसके बाद एक बार आपको मन्दिर में दर्शन के लिए फिर जाना होगा,जब भी मौका मिले इसके लिए आपको फिर एक थाली लेनी होगी
और लाइन में खडा होना होगा, जून-जौलाय के माह में लाइन बहुत लम्बी होगी अगर अक्टूवर माह की बात है तो फिर कोई लाइन नहीं । सुबह की
आरती के बाद आप वापस लौटें अपने कमरें में और फिर आगे का प्लान बनायें ।आपको अभी दो जगह जाना है एक तो मॉणॉ घाटी वार्डर क्षेत्र की
ओर और दूसरा वसुधारा की ओर यह प्लान आपको जोशीमठ में ही बनाना होगा,क्योंकि मॉणॉ घाटी चीन का वार्डर है,वहॉ जाने के लिए पास चाहिए
जोशीमठ से यह बनता है, तभी जा पायेंगे आप वहॉ ।चीन वार्डर से कुछ पहले तक रोड बन चुकी है । आपको बता दें कि इस बार्डर क्षेत्र की यात्रा
सरकार की योजना के तहत हर वर्ष कर्मचारियों के ग्रुप द्वारा की जाती है,जिससे वार्डर पर कुछ दिनों तक चहल-पहल बढ जाती है, चीन के लोगों
को अपने नेचर से अवगत कराना होता है, इसलिए निडर स्वभाव में परस्पर हंसते मुस्कराते स्वभाव में रहना होता है । वरना इस क्षेत्र में या तो
फौजी होते हैं बकरी वाले होते हैं अर्थात यह क्षेत्र बकरियों की उत्तम घास के लिए प्रसिद्ध है, और पहले ही से अपनी बकरियों को गर्मियों में बडे
झुण्ड में इन क्षेत्रों में लाते हैं लेकिन इन्हैं भी वहॉ रहने जाने के लिए पास बनाना होता है, फिर उन्हैं फौज का संरक्षण भी मिल जाता है ।ये बकरियॉ
पूरे उत्तराखण्ड के क्षेत्रों से आते हैं । आपको यह भी बता दें कि मॉणॉ घाटी के दर्रे से पहले तिब्बत के लिए व्यापार होता था, मॉणॉ में जो भोटिया
जाति के लोग हैं,उनका सम्बन्ध चाहे व्यापारिक हो यावावाहिक,तिव्वत से होता था,लेकिन चीन द्वारा तिव्वत पर कव्जा करने के बाद वार्डर शील हो
गया,और इन्हैं निचली घाटियों में बसाया गया,अब ये लोग गर्मियों में इन गॉवों में और गर्मियों में चमोली के निचली घाटियों में चले जाते हैं,उनका
मुख्य व्यवसाय आज भी व्यापार है।

2-मॉणॉ घाटी की यात्रा—
अगर आप मॉणॉ घाटी की यात्रा करते हैं तो सुबह उठकर
बस में या छोटे वाहन में बैठें, जहॉ तक वाहन जाता है जॉय उसके बाद स्थिति
देखें,अगर पैदल जाने की योजना बनती है तो और भी अच्छा आनन्द आयेगा,इस घाटी
की विशेषता गगनचुम्बी चोटियॉ जिनमें वर्फ और रूखे चट्टान घाटियों में पेडों के झुरमुट पैदल
चलने में 3 दिन का रास्ता चलने पर तब वार्डर मुलेगा वार्डर के उस पार पठारी समतल क्षेत्र
और इधर पहाडी भाग,एकदम वार्डर के नजदीक चीन द्वारा बनी पक्की सडक है लेकिन आप जायें
तो 3-4 कि.मी पहले आपको रोक देंग,आपका पास वहीं तक का बना होगा । इस हिसाब से अपनी
यात्रा निर्धारित करें ।फिर वापस लौटें बद्रीनाथ ।

3-वसुधारा की यात्रा-
यदि आप बद्रीनाथ आये हैं तो वसुधारा की यात्रा अवश्य करें ।
स्वर्गारोणी की यात्रा इस समय नहीं हो पायेगी क्योंकि आप थक गये हैं ।यदि
आपको वहॉ की यात्रा करनी हो तो इसके लिए भी प्रमिशन की आवश्यकता होगी
उपजिलाधिकारी जोशीमठ से, और एक वार में केवल स्वर्गारोहिणी की ही यात्रा आप
कर सकेंगे,क्योंकि वहॉ जाने के लिए 5या 6 दिन चाहिए केवल जून में ही जा पायेंगे
आप । इसलिए इस समय आप सुबह उठें तप्त कुण्ड में नहाएं सुबह की आरत में भाग
लें और नाशता कर मॉणॉ जॉय पैदल या छोटे वाहन में । मॉणॉ से बॉयें और पौदल आपको
चलना है, एक बात तो ध्यान में रखना होगा कि आप इस मार्ग पर धीरे चल पायेंगे,आक्सीजन
की कमी होने पर सॉस फूल सकता है,या थकान अधिक लग सकती है,या नशॉ जैसा महसूस होता है,
इसलिए भी कि जडी बूटियों का क्षेत्र है,कुछ आगे बढने पर सरस्वती नदी पर भीम पुल मिलेगा वहीं पर
सरस्वती का मन्दिर हैं, हाथ जोड लें,देखें, परखें, भीम पुल के सम्बन्ध में एक बोर्ड पर लिखा गया है ।आगे
बढें समाने खेतों में माता मूर्ति का मन्दिर है,यहॉ के लोगों का अपना इस्ट देव, आगे बढे कुछ चढाई आयेगी
थकान लगेगे आप निश्चिंत इधर-उधर के दृष्यों का आनन्द लें,गगनचुम्बी चोटियॉ,ग्लेशियर खिसकने से एकत्रित
हुये बडे-बडे पत्थरों के ढेर,आगे बढत जॉय,भले ही वसुधारा सामने दिखता है मगर समय अधिक लग सकता है,5
कि.मी.दूर मॉणॉ से बस आप अब पहुंच गये है सामने दिखने लगा है झरना अगर आप जुलाई अगस्त में जाते हैं तो
झरमें अधिक पानी मिलेगा बाकी मौसम में कम पानी हो सकता है। बहुत ऊंचा झरना,नीचे पानी की बूंदें जमीन में नहीं
गिर पाती, बल्कि हवा में ही इधर-उधर विखर जाती है, झरने का टॉप देखें तो देखतेही बनता है। कहा जाता है कि इस
झरने का पानी सभी के नसीव में नहीं होता है । आप इससे आगे सामने उस घाची तक भी जा सकते हैं जहॉ से स्वर्गारोहिणी
की घाटी शुरू होती है लेकिन आप थक चुके हैं ।कुछ देर आराम करें,डरें नहीं क्योंकि पहाडियॉ डरावनी जैसी दिखेंग कि अभी कोई
पत्थर गिरेगा, खडी नंगी चट्टानें होगी, आप स्वयं को तृप्त जैसा महसूस करेंगे, और आपकी इच्छा वापस लौटने की होगी,फिर आप
वापस बद्रीनाथ को लौटेंगे ।1 बजे तक आप वापस लौट जायेंगे सीधे मन्दिर में जॉय और दर्शन के लिए कतार में खडे हो जॉय पूजाकी
एक थाली भी रख लें 21 या 51 रु.. वाली फिर आप अन्दर प्रलेश करेंगे और बद्रीनाथ जी के दर्शन करेंगे, थाली खाली करके और उसमें
प्रासाद रखकर पंडित जी थाली आपको वापस लौटा देंगे आप उस थाली को दुकानदार को वापस लौटायेंगे और भोजन करके अपने कमरे में
आराम करने के लिए लौटेंगे । अगले दिन अपने गन्तव्य की और प्रस्थान करेंगे ।

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