बुद्धिमान का पद-1


      वह व्यक्ति परम सुखी है जिसके पास
सद्बुद्धि और विवेक है।जिसके पास बुद्धि है
उसकेपास सबकुछ है,किन्तु मूर्ख के पास सबकुछ
होने पर भी कुछ नहीं है।बुद्धि तो उसी की स्थिर रहती
है,जिसकी इन्द्रियॉ उसके बस में होती हैं।जिसका दुद्धि रूपी
साथी चतुर होता है और मनरूपी लगान उसके बस में हो वह तो
विश्व को पार कर ईश्वरीय पद तक पहुंच सकता है।बुद्धिमान को तो
इशारा और मूर्ख को तमाचा ही काफी है,बुद्धिमान तो वह है जिसके मुख से
क्रोधावस्था में भी गलत बात नहीं निकलती है।वह पहलेसोचता है बाद में बोलता
है जबकि मूर्ख पहले बोलता है बाद में सोचता है। दुद्धिमान मूर्खों से जितनी शिक्षा लेते हैं
मूर्ख बुद्धिमानों से उतनी शिक्षा नहीं लेते हैं,वह अपने अनुभवों से सीखते हैं लेकिन अधिक बुद्धिमान
तो दूसरों के अनुभवों से भी सीखते हैं,वह पूरे संकल्प से कार्य को निपटाना जानता है,वैसे परामर्श तो अनेक
प्राप्त करते हैं मगर उससे लाभ उठना बुद्धिमान ही जानते हैं,विपरीत उलझी हुई परिस्थितियों को वह सुलझाना
जानता है। बुद्धिमान तो एक पग आगे बढाता है मगर एक पग पीछे भी जमाये रखता है।अक्ल तो सुनने या पढने
सेनहीं आती,बल्कि ठोकरें खाने के बाद आती हैं।जैसा खाना खाओगे वैसी ही व्यक्ति की अक्ल होगी ।

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