यदि आपको घबराहट होती है तो घबडाएं नहीं, उपचार बताते हैं


 

          सामान्यत: पैनिक अटैक
(तेज घबराहट) तब ही होता है, जब
कोई व्यक्ति किसी दहशत भरी विपरीत
स्थिति का सामना करता है, लेकिन पैनिक
डिसऑर्डर से ग्रस्त रोगी को अकारण ही अचानक
दौरे के रूप में तेज घबराहट होती है और देखते- दे
खते कुछ ही मिनटों में रोगी दहशत से ग्रस्त हो जाता
है। इस प्रकार के पैनिक अटैक रोगी को हफ्ते-महीनों
के अंतर में बार-बार पड़ते हैं व रोगी हमेशा इस भय में
जीता है कि कहीं उसे पैनिक अटैक न पड़ जाएं। सा
-मान्यत: इस रोग से 100 में 2 से 3 लोग प्रभावित
होते हैं और इसकी शुरुआत 20 से 25 वर्ष की आयु
में ही हो जाती है।

A–लक्षण (पैनिक अटैक)

1-अचानक व अकारण तेज घबराहट होना।

2-तेजी से दिल धड़कना व सांस फूलना।

3-हाथ-पांव ठंडे हो जाना और मुंह सूखना।

4-देखते ही देखते रोगी
पसीने से तर-बतर हो जाता
है और उसे ऐसा लगता है कि उसे
हार्ट अटैक हो जाएगा या मृत्यु हो जाएगी।
पैनिक अटैक  केवेग 10 मिनट से 30 मिनट
में ही अपने चरम पर पहुंच जाते
हैं। दहशत से पस्त रोगी अगले 2 से
3 घंटे में ठीक हो जाता है और सामान्य
महसूस करने लगता है।

B–एंटीसिपेटरी एंग्जाइटी
वैसे तो पैनिक अटैक

की दहशत दो से तीन घंटों में
ही सामान्य हो जाती है लेकिन
रोगी मानसिक रूप से हमेशा इस
भय में जीता है कि कहीं उसे दोबारा
पैनिक अटैक न पड़ जाए।

C–अगोराफोबिया
ऐसे में रोगी भविष्य में
पैनिक अटैक की संभावना के
भयवश किसी ऐसी जगह पर जाने
से कतराते हैं, जहां पैनिक अटैक होने
की सूरत में तुरन्त चिकित्सकीय सुविधा
न मिलने की संभावना हो। इसलिए रोगी
शहर छोड़ने से, ट्रेन, बस व हवाई जहाज
आदि से यात्रा करने से कतराते हैं।
अक्सर ऐसे रोगी किसी बंद कमरे
में, भीड़भाड़ वाले स्थानों जैसे सिने-
माघर, रेलवे स्टेशन आदि पर जाने
पर अचानक दहशत में आ जाते हैं
और उन्हें पैनिक अटैक पड़ जाता है।

D–इलाज
चूंकि पैनिक अटैक
व तेज धड़कन किसी अन्य
कारण से भी हो सकती है।
इसलिए शुरुआत में ही कुछ
जांचें करना अनिवार्य हो जाता
है। जैसे ई.सी.जी., इको कार्डियो-
ग्राफी, थाइरायड की जांच व कैट
स्कैन। पैनिक डिसऑर्डर से ग्रस्त
रोगी में ये सभी जांचें पूर्णतया सामान्य
(नार्मल) होती हैं।

E–मनोचिकित्सा
पैनिक डिसऑर्डर व
अगोराफोबिया से ग्रस्त रोगियों
में कॉग्निटिव विहेवियर थेरेपी का
महत्वपूर्ण स्थान है। मनोचिकित्सक
की सहायता से रोगी रोगमुक्त हो सकते हैं।

F–दवाएं
इस रोग के इलाज
में उपयुक्त आधुनिक दवाएं
सुरक्षित व कारगर हैं। इन दवाओं
से रोगी कम समय में ही रोगमुक्त हो
जाता है।

 

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