लक्ष्य-9


47 – नवरात्रि की शुभ कामना- फेसबुक के सभी मित्रो को
नवरात्रि की शुभ कामनाऐं,मॉ दुर्गा सबको अपनी नौ भुजाओं की
शक्तियॉ -बल, बुद्धि, ऐश्वर्य,सुख, स्वास्थ्य, दौलत, अभिजीत,
निर्भीकता, सम्पन्नता प्रदान करे।

46 = दुख से शिक्षा ग्रहण करो-
जब दुख आता है तो यह कुछ शिक्षा देकर जाता है,
यह हमारी सहनशक्ति को बढाता है,ङस प्रकार की परिस्थितियों
का मुकाबला करने की क्षमता का विकास होता है, सुखों की अनुभूति
तभी होगी जब दुखों की अनुभूति होती है। ङसलिए दुखोंका आना आवश्यक है,
महशूस करो कि ङससे आपको क्या लाभ हुआ ।

45 – अपने से बडों की परीक्षा न लें-
ध्यान रहे कभी भी अपने से बडों की परीक्षा लेने का प्रयास
न करें, विद्वता में यह उसकी अज्ञानता और अल्पबुद्धि का
परिचायक है, यह भावना उसे पतन की ओर धकेलती है, ज्ञान
प्राप्त करने का उद्देश्य तो महॉनता है । 44 -आत्म संयम- जब
आंधी तूफान के बबंडर आते हैं तो बडे-बडे पेड समूल खडकर नष्ट
हो जाते हैं, लेकिन कोमल लता पर कोई प्रभाव नहीं पडता है,
ङसलिए अहम को भूलकर उस कोमल लता की भॉति आंधी
तूफान का सामना करो, सफलता स्वयं तुम्हैं गले से लगा
लेगी ।

43 – सत्य प्रिय होना चाहिए –
एक बार शहर में सत्य नंगा घूम रहा था, कुछ लोग मुंह
छिपा रहे थे,कुछ लोग उसे भद्दे शब्द कह रहे थे, कुछ सिर
झुका रहे थे, उसी समय सत्य को बोधि मिल गया, बोधि ने
कहा सत्य भय ऐसा क्यों घूंम रहे हो,कपडे पहनो, सत्य ने उसी
समय कपडे पहने, फिर आगे चलने लगा तो सबने सत्य को गले से
लगाना शुरू किया, अर्थात सत्य ङस प्रकार का हो जो अच्छा लगे ।

42 – जीवन के सफर का चयन-
जीवन के सफर के दो भाग होते हैं, एक भाग में समतल मैदान
और दूसरे भाग में ऊबड- खाबड विकट कंटीली झाडियों वाला, अब
आपको चयन करना है कि मैदान वाले भाग से चला जाय या ऊबड खाबड
वाले भाग से, यदि आप विकट वाले भाग से चलते हैं तो बहुत परेशानी होगी,
कॉटे चुभेंगे ठोकर लगेगी, चोट लगेगी,और यदि आप मैदान वाले रास्ते से चलते
हैं तो आपको कोई परेशानी नहीं होगी,टहलते…

41-आदि शक्ति माता निर्मला देवी-
1- ईश्वर की प्राप्ति के लिेए गुरु की आवश्यकता नहीं होती बल्कि हम स्वयं
अपने गुरु अपने आप हैं । 2-ईश्वर की प्राप्ति के लिए निर्विचारिता आवश्यक है
ङसके लिए सबसे पहले स्वयं को माफ करो ङसलिए कि हो सकता है आपने किसी का
बुरा किया हो या आपके मन में बुरे विचार आये हों । 3-हमारे अन्दर दैवीय शक्ति मौजूद
है उसे जागृत करना है ।सहज योग द्वारा ङस शक्ति को जागृत..

40-अच्छा आदमी बनो-
ऐसा आदमी बनो कि, महशूस करो कि, दुनियॉ मॆ यदि सभी
मॆरी तरह बन जॉय, तो पृथ्वी स्व्रर्ग बन जाय ।

39- स्वयं को बदलो –
जो दूसरों पर अंगुली उठाते हैं, वे एक अंगुली उस ओर करते है,
उन्है ङस बात का ध्यान नहीं रहता कि, तीन अंगुलियॉ अपनी ओर
कर देते है, अर्थात हम पहले स्वयं को बदलें सुधारें तभी दूसरों को कह
सकते हैं ।

38- बुरी बात मन में न रखें-
अगर बुरी बात मन में आती है और उसको लम्बे समय हमने अपने
स्टोर में रखा हुआ है तो उसमें विशैले सूक्ष्म वायरस पैदा हो जाते हैं उसमें
सडन पैदा होती है जिसका हमारे शरीर तथा मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पडता
है ङसलिए बुरी बातों को अपने मन में न रखें उसी समय मन से हटा दें ।

37-परमात्मा से मॉगने वाला भिखारी होता है –
परमात्मा से मॉगने वाला सबसे बडा दीन-हीन भिखारी
होता है,ङसलिए कभी भी भगवान से कुछ नहीं मॉगनॉ चाहिए
क्योंकि भगवान को सब मालूम होता है कि मेरे भक्त को क्या चाहिए ।

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