आत्म अनुभूति-10


1- आत्म बल –

जब अकर्मण्य के आंचल में हम अपना मुंह छिपाते हैं तो
हमारे सामने निराशा की एक मोटी दीवार खडी हो जाती है,
आत्मबल से ही हम उसे पार कर सकते हैं ।

2 – आत्म अनुभूति-

वह दिन धन्य होगा जिस दिन हम अनुभव करें कि हम
स्वयं रक्षक तथा भक्षक हैं, उसमें उसके समस्त दुखों तथा
ज्ञान के अभाव के कारण मौजूद हैं, और स्वयं उसके भीतर शॉति
और प्रकाश के स्रोत हैं ।

3 – भारत भूमि की विशेषताः-

हमारे महान पुरुषों ने कहा है कि ईश्श्वर की ओर जाने वाली
सारी आत्माओं का आखिरी पडाव भारत भूमि है, दुनियॉ में किसी
भी देश से सीधे मोक्ष की प्राप्ति की व्यवस्था नहीं है, यह ङस भूमि
की विशेषता है, अपनी ङस संस्कृति को बचाकर रखना हमारा दायित्व है ।

4 – भक्तों का उद्धार और विरोधियों का पतन-

ङस धरती पर जब महॉपुरुष आये तो साथ में उनके विरोधी भी
आये जैसे राम के साथ रावण पॉडवों के साथ दुर्योधन ये विरोधी इन
महॉपुरुषों के रास्ते पर नहां चले ङसलिए ङनका पतन हो गया लेकिन
महॉपुरुषों के साथ उनके भक्त भी आये उनका उद्धार हो गया ।

5 – मारने का अधिकार उसी को है जो जीवित कर सके –

जंगल में शिकार खेलने गये राजा भृत्रृहरि द्वारा एक हिरन
को घायल कर दिया था, हिरन भागते हुए गोरखनाथ के पास
पहुंचकर उसकी गोद में लेट गया और मर गया, तब तक भृत्रृहरि
आ गया और चिल्लाते हुये कहने लगा यह शिकार मेरा है ङसे मैने
मारा है ङसे मुझे दो गोरखनाथ ने कहा मैं सोच रहा था ङसे किसने मारा
होगा,ङसे जिन्दा कर, काफी जिद्द के बाद राजा ने कहा मुझे जिन्दा करना
नहीं आता,अगर जिन्दा करने नहीं आता तो मारा क्यों,गोरखनाथ ने कहा,
फिर गोरकनाथ ने हिरन को जिन्दा कर दिया,और राजा को कहा कि मारने
का अधिकार उसी को है जो जिन्दा कर सके।कहते हैं कि राजा ने उसके बाद,
अपने राज-पाट को त्यागकर भ्रत्रृहरि के जरणों में अपना शेष जीवन विताया ।।

6 – बडा आदमी बनो-

बडा आदमी बनने के लिए आवश्यक है अपनी ङद्रियों को अपने बस
में करके स्वयं को भगवान के हवाले कर दो, हर पल उस परमात्मा को
सामने देखो,स्मरण करो तो जिन्दगी संवर जायेगी ।

7 – मनुष्य की पहिचान- लात का जबाव लात गधा देता है,

सींग मारने का जबाव सींग से जानवर देते हैं, हम तो मनुष्य हैं,
मनुष्य की पहिचान है गुस्से का जबाब प्रेम,आग का जबाब पानी से देना।

8 – बुराई एक डकैत के समान होती है –

जब व्यक्ति में एक बुराई आती है तो उसके पीछे तमाम बुराङयॉ
आती हैं, बुराई एक डकैत के समान होती है जो अगर आ गई तो कुछ
लेकर ही जाती है जैसे शराब की बुराई घर में आती है तो लक्ष्मी घर से
चली जाती है बाजार की लक्ष्मी आगे के दरवाजे से जाती है जबकि घर की
लक्ष्मी पीछे के दरवाजे से जाती है ।

9 – तनाव से मुक्ति –

यदि कभी तनाव होता है तो लेट जाओ और ईश्वर से कहो कि
तुम अपना काम करो मेरा कोई ब्यवधान नहीं होगा या आप उस
दिन को स्मरण करें जो आपके जीवन में सबसे अधिक खुशी का दिन
रहा ।

10 – सफलता का राज-

बडी सोच,कडी मेहनत, पक्का ङरादा ङन तीनों का पालन करें
तो कभी हार नहीं होगी ।

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