नयें स्वस्थ विचारों का विकास-4


1 – आहार में ईश्वरीय शक्ति का प्रवेश –
शुद्ध आहार ग्रहण करने से अन्त-करण
की शुद्धि होती है। जिस भोजन को हम खाते
हैं उससे केवल हमारे शरीर का पोषण ही नहीं होता
है, बल्कि उस समय जिन संस्कारों या वातावरण में
हम भोजन ग्रहण करते हैं, वे हमारे शरीर में बसते है
और मॉस, रक्त, मज्जा,आदि का निर्माण करते हैं ।
क्योंकि भोजन के साथ हम विचार, भावनायें,
मनोभावनाओ को भोजन व जल के साथ
ग्रहण करते हैं इसलिए हमारा मन भी
वैसा ही बन जाता है ।

2 – भय और वैराग्य-
भय का मनुष्य से गहरी मित्रता होती है,
वह मनुष्य का पीछा नहीं छोडता है, ङसीलिए
भोग विलास में मनुष्य को रोग का भय रहता है,
बल में बैरी का भय,धन होने पर राजा का भय, मौन
में दीनता का भय,रूप में बुढापे का भय,गुणों में दुष्टों
का भय,शरीर को मृत्यु का भय,शास्त्र में विवाद का
भय, कुल में च्युत होने का भय अर्थात संसार की
सभी वस्तुओं..

3 -नयें स्वस्थ विचारों का विकास कैसे किया जाय –
मारे अन्दर यदि बुरे विचार हैं और
उनके स्थान पर हम अच्छे विचारों को
विकसित करना चाहते हैं ,तो ङसके लिए
हमें उन बुरे विचारों को दबाने के लिए विरोधी
शुभ विचार विकसित करने होंगे, जैसे क्रोध को
दूर करने के लिए हमें प्रेम और शॉत विचारों का
विकास करना होगा, यदि गंदे विचार या वासनाओं
को दूर करना है तो उन्हैं दबाने के लिए विरोधी शुभ
विचारों को विकसित करना होगा।

4 -स्थान परिवर्तन से विचारों में भी परिवर्तन हो जाता है –
प्रत्येक विचार या वासना का
सम्बन्ध स्थान विशेष से होता है,
किसी विशेष स्थान में रहने से मन
में विशेष प्रकार के विचार उत्पन्न होते हैं।
क्योंकि उस स्थान के ङर्द-गिर्द उस स्थान से
सम्बन्धित गुप्त विचारों का वातावरण छाया
रहता है। जैसे मन्दिर में जाने पर पवित्र
विचारों का प्रवाह स्वतः आने लगता
है,और ङसके विपरीत दूषित
स्थान में रहने से विचार
दूषित हो जाते हैं।

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s