व्यक्तित्व-10


1-लडते समय बच्चों को कैसे समझायें-

जब बच्चे लडते हैं और उन्हैं समझाना है तो
उस समय बच्चे आपकी बात नहीं सुनेंगे, और
कभी-कभी आपको भी बच्चों के झगडे से गुस्सा
आता है, तो उस समय संयम रखें आप स्वयं पर
नियंत्रण रखें और जब बच्चे शॉत हो जाते हैं उस
समय समझायें बच्चों को।

2-मेरा मन-

मेरा मन आज बादलों के संग उड गया,
कौन जाने वह उडता -उडता कहॉ जायेगा,
दल के दल बादल उमड-घुमड रहे हैं,
उनके घने नीले अंधकार ने मुझे लपेट लिया है,
मदमाती हवा नाचने में मस्त है,
वह भी मेरे मन के साथ,
बादलों के संग उमड रही है।

3 – मन की प्यास-

जब तक सॉस चला करती है,
तब तक आस नहीं मिटती, जीवन
भर खुशियों की, भीनी-भीनी वास नहीं
मिटती, कोई कितनी कोशिश कर ले, कोई
कितना प्यार करले .तन की भूख तो मिट जाती है,
मन की प्यास नहीं मिटती ।

4 – प्यार में पूजा

प्यार में पूजा उतनी ही अनिवार्य है,
जितनी मौत के उपरान्त कफन ।

5-दोस्त-

दोस्त ही दोस्त को प्यार किया करते हैं,
दोस्त ही दोस्त पर जान दिया करते हैं,
मगर एक वक्त ऐसा भी आता है,
दोस्त ही दोस्त की जान लिया
करते हैं ।

6-फूल बरस रहे थे-

घर से तुम भी चले,घर से हम भी चले,
फूल तुम पर भी बरस रहे थे,फूल हम पर भी बरस रहे थे,
फर्क बस इतना था कि,तुम डोली से ससुराल जा रही थी,
हम अर्थी से श्मशान जा रहे थे ।

7 – ङंसान की पहिचान-

हर किश्ती के साथ सौ-सौ अरमान होते हैं,
हर अरमान के साथ सौ-सौ तूफान होते हैं,
जो कुचलकर बढ जाये तूफान की छाती को,
धरती पर केवल वे ही ङंसान होते हैं।।

8 – व्यक्तित्व-

प्रत्येक व्यक्ति का अपना-अपना
दृष्टिकोंण होता है एक विश्वास की
नीव पर वह अपना जीवन बनाता है,
बिना एक सिद्धान्त के वह आगे नहीं बढ
सकता है। उसका यही दृष्टिकोण यही विश्वास
और यही सिद्धान्त उसके व्यक्तित्व को बनाता है।

9 -महान दार्शनिक सुकरात-

सुकरात के विचारों का विरोध सबसे पहले
उसकी पत्नी ने किया था क्योंकि उनका उपदेश
देने का तरीका संवेदात्मक था, प्रश्न कर्ताओं से नाना
प्रकार के प्रश्न पूछकर उनकी शंकाओं का समाधान करते थे,
सुकरात का मुख्य उद्देश्य लोंगों को सत्य की ओर प्रेरित करना
था,वे देवी-देवताओं को नहीं मानते थे, ङसलिए उनके ऊपर
आरोप निर्धारित किये गये ।

10 – सहानुभूति-

किसी के प्रति सहानुभूति रखना अच्छी बात है,
यह मानवीय गुंण है, अत्यधिक सहानुभूति मानव
में आत्म हीनता भर देता है, जिससे वह कायर बन
जाता है ।

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