आत्मा को बार-बार जगायें-11


1- क्रोध का प्रभाव-

क्रोध व गाली का जबाब 5 मिनट
बाद देना चाहिए,ये 5 मिनट जिन्दगी
को बदल देगा ,क्रोध तो एक ब्रह्मास्त्र है,
जब सारे शासत्र फेल हो जाते हैं तो तब ङसका
प्रयोग करना चाहिए,तभी क्रोध का प्रभाव होगा।

2 – कोई व्यक्ति प्रसिद्ध कब होता है-

कोई व्यक्ति प्रसिद्ध होता है दो बातों से
1-बातों से 2-कृतियों से । बाकी ङस दुनियॉ
में कौन आया कौन गया मालूम नहीं ,ङन्हीं दो
बातों से व्यक्ति अमर होता है ।व्यक्ति को कार्य करने
से पहले ध्यान रखना चाहिए कि उस कार्य की गुंणवत्ता
तथा क्वालिटी अच्छी हो, 3 तथा 3जोडने पर 6 होता ही
है मगर आप ऐसा कार्य करो कि जिससे 3तथा …

3 – आत्मा को बार-बार जगायें-

आत्मा को बार-बार जगाने से आत्मा की
जंक निकलेगी ,कभी बीती को याद मत करो,
अगर तुम परमात्मा को भूलो नही,बार-बार याद करो
तो परमात्मा का कार्य है कि आत्मा द्वारा किये गये
कार्यों को सफलतापूर्वक सम्पन्न करना ।

4 – सतयुग की तैयारी-

आत्मा ,परमात्मा,व प्रकृति तीनों
स्वयं बने हैं, अनादि अविनाशी हैं, जिसमें
दो का रौल मुख्य है, मनुष्य और प्रकृति, जब
मनुष्य प्रकृति पर हावी होता है तो वह सतयुग है
और जब प्रकृति मनुष्य पर हावी होती है तो कलयुग
होता है, परमात्मा का कार्य चल रहा है ।एक परिवर्तन
होना है,कलयुग के बाद सतयुग के लिए, कलयुग के लिए
छटनी होनी है यह कार्य शीघ्र होने वाला है ।

5 – मनुष्य में आध्यात्म के द्वार-

हमारे महॉपुरुष मनुष्य में आध्यात्म के
दस द्वार मानते हैं ,जिसमें दसवॉ द्वार न
अधिक पढ लिखकर या न अधिक पैसों से या न
अधिक ताकत से खुलता है ,बल्कि सतगुरु के शरण
में जाकर ईश्वर की भक्ति से ही खुलता है।

6 -ङच्छा मनुष्य को प्रभु से दूर ले जाती हौ-

जब प्रभु रूप में ङच्छा आती है तो
मानव बन गया,और यदि ङच्छा हट
जाती है तो प्रभु बन जाता है,क्योंकि
ङच्छामनुष्य को प्रभु से दूर ले जाती है ।

7 – शून्य चित्त ही ईश्वर प्राप्ति का द्वार हैः-

एक दिन शिष्य अपने गुरु की पीठ की
मालिश कर रहा था, तो शिष्य के मुख से स्वतः
निकल गया कि मन्दिर तो बहुत सुन्दर है पर भीतर
भगवान की मूर्ति नहीं है, क्रोधित होकर गुरु ने शुष्य को
अपने आश्रम से निकाल दिया, एक दिन गुरु जब धर्म ग्रम्थ
का अध्ययन कर रहा था तो वही शिष्य अचानक कहीं से आकर
पास में बैठ गया,और बैठा रहा, अचानक कहीं से एक जंगली
मधुमक्खी कमरे में आई और भिनभिनाने लगी वह बार-बार
खिडकी के शीशे पर टकरा रही थी,शिश्य के मुख से निकला
कि बाहर जाने का दरवाजा यदि नहीं दिखता है तो ऐसे ही
सर को टकराकर मरोगे,मधुमक्खी थक कर किसी कोने में
बैठ गई,फिर सीधे उडकर दरवाजे से बाहर चली गई।
शिश्य का कहा हुआ मधुमक्खी ने तो क्या सुना होगा
लेकिन गुरु जी ने जरूर सुना ।

8 – किसी से ईर्ष्या करोगे तो स्वयं का नुकसान होगा-

एक बार एक आदमी छाता ओढकर चल रह था,
छाता ने उस आदमी से कहा कि हे आदमी मैं धूप
से परेशान हूं और तुम अकडकर चल रहे हो मैं तुम्हारी
धूप पानी से रक्षा करता हूं और तुम मेरी परवाह नहीं करते,
आदमी ने कहा नहीं भय ऐसा नहीं है मैं तुम्हैं सम्भालकर रखता हूं,
हर समय तुम्हारी ङज्जत करता हूं, जब धूप-वर्षा नहीं होती है तो तु
म्हैं लपेटकर लम्भालकर रखता हूं ,लेकिन छाता अपने ही अकड में था
नहीं माना,असी समय आंधी आई और छाता अल्टा होकर टूट गया ।

9 – देश भक्ति से ही देश शक्तिशाली बनता है-

एक बार जहॉगीर की लडकी जहॉ आरा
बीमार हुई, भारत के कोने-कोने से बैद्ध मंगाये
गये पर वह ठीक नहीं हुई फिर अंग्रेज डाक्टर बुलाया
गया तो वह ठीक हो गई, जहॉगीर ने डाक्टर से कहा
जो मॉगो हम तुम्हैं देंगे डाक्टर ने कहा महॉराज हमें कुछ
नहीं चाहिए, मैं सिर्फ यही चाहता हूं कि ङग्लैंणड से आने
वाले माल पर टैक्स न लगाया जाय । उसी समय टैक्स
हटा दिया गया ।

10 – ताकतवर का सब साथ देते हैं-

ताकतवर का साथ तो सब देते हैं,
निर्वल का साथ कोई नहीं देता, प्रकार
जिस प्रकार हवा आग को तो बढा देती है
जबकि दिया को बुझा देती है ।

11 – समय का पूर्ण उपयोग करें-

एक बार चित्रों की एक प्रदर्शनी में
चित्रकार ने एक चित्र में चेहरा ढका रखा
था,तथा पॉव में पंख लगे थे ,एक दर्शक ने
पूछा कि यह क्या है, चित्रकार ने कहा यह समय
है ,ङसका चेहरा ढका क्यों है, ङसलिए कि जब यह
सामने आता है तो दिखाई नहीं देता है, और पॉव में
पंख क्यों हैं ङसलिए कि यह पुरन्त उड जाता है।
ङसलिए हरेक को जो समय सामने आता है
उसका भरपूर उपयोग करना चाहिए ।

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