लहसुन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है


लहसुन और प्याज स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है
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1-क्या आप लहसुन और प्याज का प्रयोग दैनिक जीवन में करते है ?
2-क्या आपको लहसुन और प्याज में उपलव्ध तत्वों के बारे में जानकारी है ?
3-क्या आपको औषधि के रूप में इनका प्रयोग करना आता है ?
4-अगर आता है तो क्या आप हमारे साथ शेयर कर सकते हैं ?
5-कोई बात नहीं यदि आपको सामान्य जानकारी के अतिरिक्त अधिक
जानकारी नहीं है। हमने इस सम्बन्ध में कुछ कार्य किया है,हम आपको
बताने का प्रयास करेंगे ।विभिन्न अनुभव आपके सामने रखने का प्रयास करेंगे ।
आप अपनी उपस्थिति दर्ज करें।

(शास्त्रों के अनुसार लहसुन की उत्पत्ति के बारे में लिखा गया है कि
जब इन्द्रदेव के पास से गरुड ने अमृत का हरण किया तो इसी बीच अमृत
का एक बूंद धरती गिर पडा । बस इसी अमृतबिन्दु के स्थान पर एक पौधा उग
आया जिसे रसोन(लहसुन) की संज्ञा दी गई ।इस जनश्रुति का चाहे कुछ भी आधार रहा हो ,
किन्तु इतना अवश्य कि लहसुन दोशहरण गुंण के कारण काफी अंशों में अमृत की समकक्षता कर गया है ।)

लहसुन और प्याज-स्वास्थ्यकर जडी-बूटियों के सम्बन्ध में
प्राचीन काल से आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा शोध होते रहे हैं। आयुर्वेद
के क्षेत्र में कार्य करने वाले किसी भी शोधकर्ता द्वारा लहसुन और प्याज
की उपयोगिता के प्रति दिलचस्पी अधिक देखी गई है । विभिन्न प्रकार की औषधि
निर्मॉण में सहसुन और प्याज के तत्वों का प्रयोग होता है ।उपयोगी गुणों के कारण ही
हम इनका प्रयोग मशालों के रूप में करते हैं । प्याज की अपेक्षा लहसुन पर अधिक शोध हुये हैं,
फलस्वरूप कुछ परिणॉम निम्न लिखित हैं –

1- लहसुन पाचन रोगों जैसे- वातहर और अतिसार
के लिए अधिक उपयोगी है ।

2-पहली शताव्दी में प्रकृति विज्ञानी प्लिनि द ईवर्ल्ड ने
लहसुन के गुंण के बारे में लिखा है और बताया कि छछूंदर और
सॉपों के काटने से फैलने वाले विष के प्रभाव को लहसुन से कम किया जा सकता है ।

3- दमा रोग के उपचार में खासी को कम करने और
आंत के परजीवियों को बाहर करने के लिए लहसुन उपयोगी है ।
4-प्रथम विश्व युद्ध में लहसुन का उपयोग
घायल सैनिकों के उपचारर में रोगाणुरोधक के
रूप में व्यापक रूप से किया गया ।
5-लहसुन और प्याज ह्दयवाहिका रोगों,
केंसर,पाचन प्रणॉली के रोगों एवं मधुमेह
के खतरों से मुक्ति में उपयोगी है ।
6-प्याज जिसे वनस्पतिशास्त्र में एलियम सेपा
कहा जाता है,जिसमें औषधीय गुणों के साथ-साथ
स्वाद और सुगंध संबंधी उपयोगी गुंण भी है ।

हानिकारक प्रभाव – लहसुन और प्याज में
गुणकारी तत्वों के साथ उनके उपयोग से हानियॉ भी हो
सकती हैं,इस बात से भी हमें सतर्क रहना होगा – ठीक उसी
प्रकार जैसे अधिक भोजन करने पर जो हानि होती है –

1-अधिक मात्रा में लहसुन का प्रयोग करने से एनीमियॉ,
वजन घटना,ह्दय,यकृत एवं गुर्दों की विषाक्तता जैसे दुष्प्रभाव पड सकते हैं ।

2- लहसुन का अधिक प्रयोग करने से त्वचीय अतिसंवेदना
जैसे रोग उत्पन्न हो सकते है जिसमें त्वचा पर छाले पड सकते हैं ।

3-अधिक प्याज का सेवन करना भी हानिकारक है,एक
शोध में यह दर्शाया गया है कि चूहों को अधिक प्याज खिलाने
(500 मि.ग्रा.)उनके फेफडे और ऊतक क्षतिग्रस्त हो गये थे ।

1-पाचन संस्थान के लिए लहसुन एक उपयोगी औषधि है-
आंत में स्थित कृमि के लिए लहसुन अमोघ शस्त्र है ।इसके लिए
लहसुन का रस दूध के साथ 10 बूंद मिलाने से पिलानी चाहिए ।अजीर्ण
के सभी रोगों में भी लहसुन अपयोगी है ।वात रोग,उदरशूल आंत के अन्य रोग
ठीक हो जाते हैं ।आंतों के यक्ष्मा ,केंसर,आदि में भी इसका प्रयोग सफल रहा है ।

2-लहसुन में वैक्टीरिया नाशक तरल पदार्थ –
allicin तथा प्रतिजैविकी तत्व allicetion lst
and llnd पायेजाते हैं । दोनों ही अच्छे एन्टी बायोटिक्स हैं ।
दोनों जल में अविलेय हैं ।

3-अगर लहसुन के उपयोग के बारे में हम
जानना चाहेंगे तो –यह धातुओं को बढाने वाला,
उष्ण पाचक,कष्ट निरोधक,पित्त और रक्त वर्धक,बल,
वर्ण,नेत्र हितकारी रसायन,जीर्ण ज्वर नाशक,अरुच् नाशक,कुष्ठ ,
कृमि वायु,श्वास,और खांसी निरोधक और बहुत सारे रोगों में उपयोग होता है ।
लेकिन इस बात को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि –अतिसार,वात प्रमेह,मधुमेह
रक्तपित्त,वातरक्त,वमन,में लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

4-लहसुन में तीक्ष्णता होती है जो लोग इसे सहन नहीं कर पाते हैं
उन्हैं शोधन करके प्रयोग करना चाहिए ।इसके लिए लहसुन की फली के
वाहर का छिलका निकालकर रात्रि के समय मठ्ठेमें भिगोकर रखें सुब देखेंगे कि
दुर्गन्ध और तीक्ष्णता कम हो जाती है ।अन्यथा तीन दिन नयॉ मठ्ठा मिलाकर रखें ।
लेकिन उतनी ही शक्ति उसकी कम हो जाती है ।वैसे विना शोधन के अधिक उपयोगी है ।

5-स्वॉस संस्थान से सम्बन्धित उपयोग—लहसुन के ताजे रस
को आधी चम्मच की मात्रा में श्र्वास कुठार रस एक रत्ती मिलाकर या
अकेले लहसुन रस को देते रहने से स्वॉस की दिक्कत दूर होती है खासकर
बच्चों के लिए लाभकारी है ।संक्रमण के समय स्वस्थ बच्चों को भी प्रतिषेधात्मक
रूप में दिया जा सकता है ।यह कुकासीय वैक्सीन से किसी भी तरह कम नहीं है ।
यक्ष्मा(टीबी) के लिए लहसुन का ताजा रस उत्तम व्याधिनाशक सिद्ध हुआ है।स्वॉस से
सम्बन्धित अन्य प्रकार की विकृतियों में अच्छा लाभकारी है । इस बात का ध्यान देना होता है
कि महिलाओं को गर्भ धारण के समय किसी भी स्थिति में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए ।

6-मूत्र जनन संस्थान के लिए भी लहसुन उपयोगी है-
महिलाओं के लिए लहसुन का उपयोग गर्भधारण के समय
निसिद्ध है, और बाकी समय में जैसे लहसुन के प्रयोग से मासिक
श्राव खुलकर होता है कटि वेदना मे आंतरिक और वाह्य प्रयोग में लाभकारी है ।

7-रक्तवह संस्थान के लिए भी लहसुन उपयोगी है-
रक्त के दूषित होने से शरीर में जो वर्ण हो जाता है ठीक हो
जाता है ।नाडी व्रण में ताजे रस की दो-तीन बूंद वर्ण के चारों ओर
लगाने से अत्यधिक लाभकारी है और खुजली के समय कडुवातेल में मिलाकर मालिस करें ।

8-वात संस्थान के लिए भी लहसुन उपयोगी है-शरीर
के किसी अंग में वात से सम्बन्धित कोई रोग ,जोडों का दर्द,
शूल, में इसके तेल की मालिश की जाती है।और क्वाथ बनाकर मुख
से भी इसे दिया जाता है ।कर्ण रोग,कर्ण शूल में इसके रस को टपकाने से अच्छे होते हैं ।

9-लहसुन का प्रयोग विषम ज्वर के समय प्रातः
खाली पेट घी के साथ खिलाना चाहिए । शर्दी लगने पर
शरीर में जब दर्द होता है तथा सिर के शूल में आंतरिक प्रयोग के
साथ लेप भी हितकारी पाया गया है ।डिफ्तेरिका मैम्बरेन में लहसुन के
रस को शर्वत में मिलाकर देने से लाभकारी है ।सर्प विष चिकित्सकों द्वारा
इसका प्रयोग किया जाता हैःजिसमें लहसुन का रस30 बूद तक,टिंचर-5 से 30
बूद तक,अवलेह-एक से ढाई मासे तक, और साबुत कंद को मिलाकर बनी औषधि
का प्रयोग करते हैं ।

10-एक और महत्वपूर्ण नुस्खा हम आपको बतायेंगे यदि किसी
के ऊपर भूत लगा है तो हींग का रस और लहसुन का रस मिलाकर
उसे सुंघाले भूत भाग जायेगा और यदि कोई अजीर्ण भूत जैसे शैद या कोई
और हो तो इस रस को उसकी आंखों पर मसल दो भाग जायेगा अचूक नुस्खा है।।

11-बच्चों के इलाज में सावधानी वरतनी होती है-उल्टी,तथा
अतिसार में कभी-कभी हानिकारक प्रभाव देखे गये हैं उस समय मीठे
बादाम का तेल हितकारी होता है ।

12-सन्यासी योग के अनुसार प्रथम दिन लहसुन
की कली,दूसरे दिन दो और तीसरे दिन तीन प्रतिदिन एक कली
बढाते जायें और 40 दिन तक 40 खिलाकर फिर एक-एक कम करना
प्ररम्भ करें और एक पर लाकर छोड दें औषधि सेवन काल में ही समूल नष्ट हो जायेगा ।

13-कर्ण पीडा के लिए 1 तोला सरसों के तेल में 3
माशे लहसुन की कलियॉ और 1 रत्ती अफीम मिलाकर जलाले-
पहले तेल को लोहे की करछी या पीतल कीकटोरी में डालकर धधकते हुये
कोयलों पर रखें ,जब पकने लगेतब लहसुन छीलकर डाल दें,जब जल जाय तब
उतारकर गुनगुना रहने पर अफीम मिलादें और आवश्यकता के समय गर्म करके कान
में 2-3 बूदें डालदें,दर्द शीघ्र बन्द हो जायेगा ।

14-सरल योग के अन्तर्गत लहसन का पानी
गुनगुना कर2-3 बूंदें कानों में डालें।शर्दी से होने वाला
दर्द शीघ्र बन्द हो जायेगा ।

15-दमा के लिए-2 तोला घी में 3 कलियॉ लहसुन पिसा
भून लें और इसमें 2 तोला शहद मिलाकर रोगी को खिलायें ।कफ
जनित श्र्वास के लिए अत्यन्त लाभदायक है ।।

16-खुजली में लहसुन का पानी 1 तोला,सरसों का
तेल पावभर मिलाकर शरीर पर मालिश करायें और रोगी को 1
घण्टा धूप में बैठाकर गरम पानी से नहलायें उपयोगी है ।।

17-दाद के लिए लहसुन को खूब पीसकर
उसमें मधु को मिलाकर लेप करने से कु दिनों बाद दाद ठीक हो जाता है ।

18-विच्छू को डंक मारने पर लहसुन का रस 3 तोला,शुद्ध
मधु 3 तोला दोनों कॉमिलाकर चटाने से विच्छू का विश उतर जाता है ।
अथवा नमक और लहसुन दोनों कॉमिलाकर पीसें और डंक के स्थान पर लेप
करें विष उतर जायेगा ।

19-विषम ज्वर में लहसुन के रस में तिल का तोल
और सैंधा नमक मिलाकर सुबह सेवन कराने पर विषम ज्वर,
वात कफ,और वात प्रकोप दूर होते हैं ।

20-गठिया में लहसुन का रस 6 माशा,गाय का दूध,5
तोला मिलाकर पिलाते रहें,गठिया का रोग धीरे-धीर समाप्त हो जायेगा ।
कर्ण शूल में फुन्सी से होने वाले दर्द में लहसुन,मूली,अद्रक,तीनों को मिलाकर
निकले रस कान में डालने से कान में बनी फुन्सी बैठ जाती है या फूट जाती है और
दर्द कम हो जाता है ।

21-कभी-कभी फोडा होने से विशैला हो जाता है
और उसमें कीडे पड जाते हैं ,लहसुन लगाने से ठीक हो जाता है ।।

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