सुखी जीवन यापन करें-1


              आज मनुष्य निराश और दुखी क्यों है!
जबकि उसके पास सुख-सुविधाओं की कमी नहीं
है, वह वैभवशाली जीवन   यापन   करता है, बटन
दबाते ही हर कार्य पूर्ण हो जाता है।  इसके विपरीत
सतयुग में लोग जंगलों में रहकर कंद-मूल फल खाते
थे, कठोर तथा अभावग्रस्त जीवन   होने  पर  भी  लोग
खुश और मस्त रहते थे आखिर कैसे ,इसका रहस्य जानने
के लिए हमें गहराई में उतरकर इसके मूल श्रोत पर ध्यान केन्द्रित
करना होगा। हमारे सुख-दुख का कारण है हमारे विचार करने की शैली
है। वैज्ञानिक प्रगति के कारण सभी सुख सुविधाओं के रहते हुये जिन्दगी
में नीरसता,अशॉति,दुख आदि का कारण विचार करने की शैली में परिवर्तन
का न होना है । हमने परिस्थितियों को तो बदला है मगर अपने चिन्तन पर
पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। हम कैसे हैं और हमारा भविष्य कैसा होगा, यह
सब विचार शैली पर निर्भर करता है, विचारों में अपार शक्ति होती है, वे हमेशा
कर्म करने की प्रेरणा देते हैं, विचार शक्ति यदि अच्छे कार्यों में लगा दी जाय तो
अच्छे और यदि बुरे कार्यों में लगा दी जाय तो बुरे परिणाम प्राप्त होते हैं ।विचार
अच्छे हों या बुरे लेकिन यह निश्चित है कि विचार मनुष्य की अनिवार्य पहिचान है
मनुष्य विचारहींन नहीं हो सकता है । हॉ विशेष योगिक क्रियाओं में विचार शून्यता
की स्थिति प्राप्त की जा सकती है इसका उद्देश्य व्यर्थ के विचारों को त्यागकर लोक-
मंगल के विचारों को प्रधानता देना है । संसार में आजतक जितने भी श्रेष्ठ कार्य हुये
इसका कारण व्यक्ति या समाज में उत्कृष्ठ       विचारों का होना रहा है । हमें प्रकृति
द्वारा निशुल्क वेशकीमती धरोहर प्राप्त है हम जब चाहें इसका उपयोग कर सकते हैं
तो फिर आज हम इतने निराश,चिंतित,दुखी या हतोत्साहित क्यों हैं । आओ हम अपने
भाग्य और सुखद भविष्य का निर्माण करें, इसके लिए हमें अपनी विचार शैली में परिवर्तन
करना होगा निराशा से छुटकारा पाने के सूत्र -.        जिन्दगी में आशावादी बनें। निराशा से
छुटकारा पाने के लिए कुछ सूत्र सुझाव के रूप में दिए जा रहे हैं इन्हैं अपनाकर जीवन को
उपयोगी बना सकते हैं ः-
1- किसी भी कार्य पर नकारात्मक सोच व्यक्त करने वाले व्यक्तियों
से कोई सलाह मसवरा न करें ।

2- हर समय उदास रहने वाले लोगों से संम्बन्ध न बनायें,
उनसे दूर रहने का प्रयास करें ।

3- श्रेष्ठ अध्ययन व चिन्तन करते रहें ।

4- स्वयं को कुंठित न रखें ,स्वयं को हर कार्य को करने योग्य समझें ।

5- असफलताओं से न घबरायें ,उनसे शिक्षा लें और दुबारा गलती न करें ।

6- समय का पालन करें,और हमेशा के लिए इसे अपने संस्कार का अंग बनायें ।

7- दूसरे लोगों के द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं पर ध्यान न देकर निराशा को
दूर रखने का प्रयास करें ।

8- कर्म में निष्ठा रखने वाले आशावादी लोगों से मित्रता बढायें ।

9- हमेशा प्रशन्न व खुशदिल लोगों से दोस्ती रखने से निराशा दूर भागेगी ।

10-मस्तिष्क को हमेशा सार्थक एवं सकारात्मक विचारों पर ही केन्द्रित रखें ।

11- बुरे समय में हिम्मत न हारें, खुश रहकर संघर्शशील बनें ।
मुसीबतों का मुकाबला करें ।

12- महॉपुरुषों के संघर्षमय जीवन के बारे मे पढें ।

13- आशा ही जीवन है ,जीवन ही आशा है को स्मरण करते रहें ।

14- साहस और परिश्रम कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी
आसान तथा असम्भव को सम्भव बना देता है ।

15- जिसमें सत्य के साथ रहने तथा सत्य के लिए अपने आप
से प्रश्न करने की हिम्मत हो, परमात्मा की कृपा से उनकी इच्छायें
पूर्ण होती हैं ।

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