श्रेष्ठ मनुष्यों की संगति-5


1-मनुष्य अच्छे गुणों से ही श्रेष्ठता को प्राप्त होता है –

          यदि कोई कौआ किसी ऊंचे भवन पर जाकर बैठ
जाय तो वह गरुड के समान तेज  नहीं  बन जाता  ? इसी प्रकार
कोई मनुष्य कितने भी  ऊंचे आसन पर क्यों न बैठ  जाय  उस आसन
के कारण उसे श्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता ।अर्थात किसी भी व्यक्ति को समाज
में सम्मान उसके गुणों के आधार मिलता है ।इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने
गुणों का विकास करना चाहिए । गुणों से तात्पर्य- विद्या,सदाचार,मीठा व्यवहार,
उत्तम चरित्र,परिश्रमशीलता,ईमानदारी,अक्रोध आदि ।जो व्यक्ति जितना अधिक
गुंणवान होगा-उसे समाज में उतना ही अधिक सम्मान प्राप्त होता है ।

2-श्रेष्ठ मनुष्यों की संगति से पोषण होता है-

              जिसप्रकार मछली के न हाथ होते हैं न पॉव वह
अपने बच्चों का पालन –पोषण उसे देखकर, उनपर नजररखकर
करती है ।        मादा पक्षी अपने बच्चों को अपनीं चोंच और पंखों से
पालन-पोषण करती है ।ठीक इसी प्रकार विद्वान और योग्य मनुष्यों
की संगति से साधारण मनुष्यों का पालन-पोषण होता है ।अर्थात योग्य
लोगों के साथ में रहने से अपनी योग्यता में वृद्धि होती है ,जिससे आपका
जीवन कहीं अधिक सुखी हो जाता है।।

3-बलशाली शरीर के साथ अच्छी वुद्धि जरूरी है-

              केवल बलशाली शरीर होना पर्याप्त नहीं है बल्कि
उसके साथ –साथ तेज दिमाग होना भी आवश्यक है- उस कहानी
की भॉति जिसमें एक जंगल में एक शेर हर दिन एक पशु का शिकार
करता था ,जिसपर जंगल के सभी जानवर एकत्रित हुये और मिलकर उस
शेर से बोले कि इस तरह से एक दिन सारे जानवर खत्म हो जायेंगे और आपके
लिए भी खाने के लिए कोई जानवर शेष नही रहेगा ।हम आपके भोजन के लिए
प्रतिदिन एक पशु भेज दिया करेंगे।यह बात सुनकर शेर मान गया ।इस प्रकार
प्रतिदिन शेर के   पास एक पशु जाता और शेर उसे खा जाता ।    एक दिन एक
खरगोश की जब बारी आई     तो वह धीरे-धीरे चलकर शेर को सबक सिखाने
की युक्ति सोचने लगा ।मार्ग में एक जल से भरे कुआं दिखाई दिया खरगोश
ने योजना बनाई और शेर के     पास पहुंचा,शेर ने देर से आने का कारण पूछा
तो खरगोश बोला महंराज –इस जंगलमें एक और भी शेर रहता है और वह स्वयं
वह जंगल का राजा कहता है,उसी ने मुझे रास्ते में रोका,मैं तो किसी तरह बचकर
निकल आया हूं ।यह सुनकर शेर गुस्से में बोला कहॉ है वह मुझे वहॉ तक पहुंचा दो।
यह सुनकर खरगोश उस शेर को अपने साथ उस कुंएं पर ले गया और बोला महॉराज वह
इसी कुएं में छिपा है।शेर ने कुएं में झॉका तो उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई दी,उसने
दूसरा शेर समझकर उससे लडने के लिए कुएं में कूद मारी और डूबकर मर गया । इस प्रकार
खरगोश ने अपनी बुद्धि से अपना तथा जंगल के अन्य पशुओं की रक्षा की ।इसलिए बलशाली शरीर
के लिए तेज बुद्धि का होना भी आवश्यक है ।शारीरिक बल की अपेक्षा बुद्धिबल को श्रेष्ठ माना जाता है।
इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बुद्धि का विकास करना चाहिए और विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित
हुये विना सोच विचारकर ही कार्य करना चाहिए ।।

4-अन्याय से कमाया हुआ धन अधिक नहीं ठहरता-

                           आज हर आदमी धन कमाने की होड में चला है।
ध्यान रखें बेइमानी के माध्यम से कमाया हुआ धन और जो सम्पत्ति
एकत्रित की जाती है-उसका आनंद केवल कुछ समय तक ही ले पाना सम्भव
होता है ।फिर धीरे-धीरे वह समस्त धन सम्पत्ति व्याज सहित पूर्णतः नष्ट होने लगते
हैं ।अर्थात अन्याय से एकत्रित धन-सम्पत्तिस्थिर नहीं रहती है वह अवश्य ही नष्ट हो जाती है,
और इन लोगों का बहुत बुरा होता है।इसलिए प्रत्येक मनुष्य को ईमानदारी और परिश्रम से ही धन-
सम्पत्ति का उपार्जन करना चाहिए क्योंकि –तभी वह स्थिर रह पायेगी और उसका लम्बे समय तक
उपभोग कर पाना सम्भव होगा ।

5-मीठा बोलें तो संसार तुम्हारे वश में हो जायेगी-

            यदि पूरे संसार को अपने वश में करना हो या
सभी लोगों का प्यारा-दुलारा बनना हो या जीवन में यश
और सफलता प्राप्त करनी हो तो एक ही कार्य द्वारा आप
सफलता प्राप्त करते है –मीठा बोलना । जो मनुष्य सबसे मीठा
बोलता है और सम्मानजनक भाषा में बात करता है,उस मनुष्य को
सभी लोग सन्द करते हैं।दूसरों की निन्दा मत करो और सबसे मीठी वॉणी
में बात करो ।।

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