सहज योग तथा परमात्मा की खोज-1


          हर व्यक्ति के मन में परमात्मा के दर्शन की लालसा होती है,उसकी
जिन्दगी में ऐसा क्षण आता है कि वह  अपने  अहं  और  संस्कारों  को भुलाकर
अपनी खोज का विश्लेषण करता है,और फिर दोबारा सत्य की खोज में निकलता है,
इसी सत्य का साक्षात्कार तथा अपनी आत्मा की उपस्थिति की अनुभूति ही सहजयोग का
संदेश है ।आत्मा प्रेरित करती है और सरस्वती की कृपा से शव्द जुडते जाते हैं ।श्री माता निर्मला
देवी ही वे मॉ हैं जिन्होंने इस युग में सत्य को पाने की एक सरल युक्ति सहजयोग का वरदान मानव
जाति को दिया है। परमात्मा द्वारा हमारे शरीर में जिस आत्मा को जन्म दिया है उसका अनुभव करने की
शक्ति हमें जन्म से ही प्राप्त है,लेकिन इसके प्रकटीकरण करने के लिए हमारे भीतर तीव्र इच्छा तथा सही
मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, जब हमारे अन्दर इस शक्ति को जानने तथा पाने की तीव्र इच्छा होती
है,तब श्री माता जी स्वयं मार्ग दर्शन करती हैं और हमें स्वयं ही  अपनी  आत्मा का अनुभव होने  लगता  है्,
और सहज स्थिति में उस आत्मा का परमात्मा से योग हो जाता है। वैसे इच्छाओ की तृप्ति में मनुष्य कभी
सन्तुष्ट नहीं होता मगर जब उसे उस परमात्मा का प्रेम और परम चैतन्य की अनुभूति होती है तो,वह तृप्त
हो जाता है।जिसमें सत्य के साथ रहने तथा सत्य के लिए अपने आप से प्रश्न करने की हिम्मत हो, परमात्मा
की कृपा से उसकी इच्छाऐं पूर्ण होती हैं ।

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