हमारे शरीर की ऊर्जा अच्छी और बुरी हो सकती है


 

              आधुनिक भौतिक
शास्त्र के अनुसार अस्तित्व
में जो कुछ भी मौजूद है वह ऊर्जा
ही है। तो फिर क्या कारण है कि सब
कुछ एक होने के बाद भी दुनिया में मतभेद
दिखाई देते हैं? क्या एक ऊर्जा दूसरी के खिलाफ
है? क्या अच्छी और बुरी ऊर्जा जैसी कोई चीज़ है?
विद्वानों के विचारों के आधार पर आइये जानने का
प्रयास करते हैं-

          आधुनिक विज्ञान
ने साबित कर दिया है कि
हर चीज एक ही ऊर्जा है। दुनिया
भर के धर्म कहते रहे हैं कि ईश्वर
हर जगह है। चाहे आप यह कहें कि
ईश्वर हर जगह है, या आप यह कहें
कि हर चीज एक ही ऊर्जा है ये दोनों ही
बातें एक ही सच्चाई को बताती हैं।

     सब कुछ एक ही ऊर्जा है
           यह सृष्टि एक ऊर्जा है,
जो खुद को लाखों तरीके से अ-
भिव्यक्त कर रही है। जो पानी गिर
रहा है, वह ऊर्जा है, वही ऊर्जा यहां
एक पेड़ के रूप में खड़ी है। वही ऊर्जा
आपके रूप में बैठी है। वही ऊर्जा मेरे रूप
में यहां मौजूद है। वही ऊर्जा एक चट्टान के
रूप में खड़ी है।

                   आधुनिक विज्ञान ने
साबित कर दिया है कि हर चीज
एक ही ऊर्जा है। दुनिया भर के धर्म
कहते रहे हैं कि ईश्वर हर जगह है। चाहे
आप यह कहें कि ईश्वर हर जगह है, या आप
यह कहें कि हर चीज एक ही ऊर्जा है – ये दोनों
ही बातें एक ही सच्चाई को बताती हैं। एक ही बात
को दो अलग-अलग तरीकों से कह दिया गया है।

             वैज्ञानिकों ने गणितीय
आधार पर यह नतीजा निकाला
है। धार्मिक लोग बस इस पर विश्वास
करते रहे हैं, लेकिन दोनों के जीवन में
यह अभी तक जीती जागती हकीकत नहीं
है। इसी वजह से हमारे जीवन में रूपांतरण
नहीं आता। ऊर्जा के गणित की खोज के बाद
आइंस्टीन के जीवन में कोई मूलभूत बदलाव
नहीं आया। उन लाखों धार्मिक लोगों के जीवन
में भी इससे कोई बदलाव नहीं आया, जो इस पर
विश्वास करते रहे हैं। क्योंकि यह बात उनके लिए
एक जीवंत सच्चाई नहीं बन पाई है।

             अब जब आप यह सवाल
पूछते हैं कि क्या एक ऊर्जा दूसरी
ऊर्जा पर हावी होती है, तो उसका जवाब
है कि ऊर्जा तो एक ही है। यह दूसरी पर
हावी कैसे हो सकती है? तो क्या इसका
मतलब यह है कि लोग अलग-अलग तरह
के नहीं हैं? अलग अलग तरह के लोग मौजूद
हैं। अब अगर आप एक आदमी को एक उर्जा के
रूप में और दूसरे आदमी को दूसरी उर्जा के रूप में
लेते हैं, तो आप पूछ सकते है कि क्या यह ऊर्जा उस
ऊर्जा पर हावी हो सकती है? यह इंसान उस इंसान पर
हावी हो सकता है, शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से,
भावनात्मक रूप से और उर्जा के स्तर पर भी। लेकिन यह
ऊर्जा के खिलाफ ऊर्जा नहीं है। यह एक इंसान है जो कि दूसरे
इंसान के खिलाफ है। वह अपनी ऊर्जा का प्रयोग किसी पर हावी
होने के लिए कर रहा है।

            जैसे पहाड़ों से जब पानी
गिरता है तो वह चट्टानों को तोड़ता
है। एक तरह से पानी की ऊर्जा, पत्थर
की ऊर्जा पर हावी हो रही है। इसी तरह से
लोग भी अपनी ऊर्जा का एक खास तरह से
उपयोग करके किसी दूसरे पर हावी हो सकते हैं।

ऊर्जा का इस्तेमाल करने का पूरा विज्ञान है
            आपको लगता है की
शायद यह बहती हुई ठंडी हवा
सकारात्मक ऊर्जा है, और भयंकर
तूफान नकारात्मक ऊर्जा। ऐसा नहीं है।
बस बात इतनी है कि इनमें से एक चीज
आपको पसंद है और दूसरी नहीं।क्या आप
टोने-टोटके और खास तरह की क्रियाओं की
मदद से दूसरे लोगों की जिंदगी पर हावी होने के
बारे में बात कर रहे हैं? अगर आप उस संदर्भ में
जानना चाह रहे हैं कि ऐसा संभव है या नहीं, तो
हां ऐसा बिल्कुल संभव है, लेकिन काफी हद तक
यह मनोवैज्ञानिक स्तर पर होता है। ऊर्जा के हावी
होने के बारे में अगर आप जानना चाहते हैं कि क्या
ऐसी कोई चीज है, तो मैं कहूंगा कि बिल्कुल है। इस
दिशा में पूरा एक विज्ञान और कला है। चारों वेदों में से
अंतिम वेद, जिसे अथर्ववेद कहा जाता है, उसमें यही
बताया गया है कि ऊर्जाओं का अपने फायदे और दूसरों
का नुकसान करने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाए।
लेकिन आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले लोगों को कभी
इन चीज़ों के बारे में नहीं सोचना चाहिए, क्योंकि यह सब
आपको उलझाता है, फंसाता है। इससे आपका जीवन विक-
सित नहीं होता, बल्कि कई तरह से उलझ जाता है।

क्या है सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा
                 आपको किसने बताया
कि ऊर्जाएं सकारात्मक और नका-
रात्मक होती हैं। मैं बिजली के सर्किट
की बात नहीं कर रहा हूं। मैं जीवन-ऊर्जा
की बात कर रहा हूं। विज्ञान कहता है कि
केवल एक ऊर्जा है, धर्म कहता है कि ईश्वर
हर जगह है। मैं तो केवल एक ही ऊर्जा के बारे
में जानता हूं, लेकिन आपने दो बना लीं। क्यों?
क्योंकि अगर आप दो नहीं बनाते तो आप इसके
बारे में सोच नहीं पाते। अगर आप इसे बस एक के
रूप में ही देखें, तो आपका पूरा का पूरा ज्ञान ही खत्म
हो जाएगा।

                ऊर्जा एक ही तरह
की होती है। एक ही ऊर्जा है
जो एक खास तरीके से काम कर
रही है। आपके कहने का मतलब शा-
यद यह है कि ठंडी बहती हवा सकारात्मक
ऊर्जा है, और भयंकर तूफान नकारात्मक ऊर्जा।
ऐसा नहीं है। ये एक ही बात है। बस बात इतनी है
कि इनमें से एक चीज आपको पसंद है और दूसरी
नहीं।

 

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s