अगर चलने का सही तरीका नहीं आता है तो सीखलो


 

              तौबा ये मतवाली चाल,
झुक जाए फूलों की डाल.। बॉलीवुड
की फिल्म पत्थर के सनम का यह
सुपर हिट गीत आज भी जुबां पर आ
जाता है। मनोज कुमार और मुमताज
पर फिल्माए गीत में मुमताज को लचक
और मटक कर चलते दिखाया है। यदि
आपके चलते समय भी कमर मटकती है
तो संभल जाइए। कहीं ऐसा न हो, किसी दिन
आपका कूल्हा जवाब दे जाए।

            यूपी और आगरा
ऑथरेपेडिक एसोसिएशन
की ओर से आयोजित 58वीं
वार्षिक कान्फ्रेंस आइकॉन-2013
में भाग लेने आए जेए ग्रुप ऑफ हॉस्पि-
टल्स, ग्वालियर के डॉ. समीर गुप्ता के
अनुसार 70 फीसद लोगों को चलने का
सही तरीका नहीं पता है। बच्चों को चलने
की सही स्टाइल के बारे में शायद ही किसी
परिवार में बताया जाता है। ऐसे में बच्चे अपने
तरीके से चलना शुरू कर देते हैं। बचपन से ही
गलत तरीके से चलने के कारण उनके कूल्हे पर
खराब प्रभाव पड़ने लगता है। जोड़ घिसने लगते हैं
और बारीक क्षरण शुरू हो जाता है। आगे चलकर यह
प्रक्रिया तेज हो जाती है।

                    पुरुषों के मुकाबले
में कूल्हे की परेशानी महिलाओं
में अधिक होती है। प्रत्येक 5वीं
महिला कूल्हे के   दर्द का शिकार
है। दवा लेने पर कुछ समय के लिए
राहत मिल जाती है। इसके बाद भी
चलने का        तरीका न बदलने के
कारण फिर से बीमारी वापसी आ
जाती है।         आखिर कई केसों में
कूल्हे का प्रत्यारोपण करना पड़ता
है। डॉ. गुप्ता अपने इस शोध की जानकारी
आगामी सात दिसंबर को कांफ्रेंस में प्रस्तुत करेंगे।

A–सेंटर ऑफ ग्रेविटी में बदलाव
               डॉ. समीर गुप्ता ने
बताया कि शरीर का पूरा वजन
नाभि से कंट्रोल [मेडिकल जगत में
सेंटर ऑफ ग्रेविटी के नाम से जाना
जाता है] होता है और दिमाग के एक
हिस्से में लगातार पैदल चलने से सर्किट
बन जाता है। गलत तरीके से चलने से सेंटर
ऑफ ग्रेविटी में मिलीमीटर के आकार में बदलाव
होता है। जब इसका साइज बड़ा होने लगता है तो
इसका असर कूल्हे पर सबसे अधिक पड़ता है।

B–खुल रहे हैं गेट एनालिसिस सेंटर

      डॉ. समीर गुप्ता का
कहना है कि दिल्ली, मुंबई,
चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद
जैसे शहरों में दर्जनों गेट एनालिसिस
सेंटर चल रहे हैं। जहां सीसीटीवी, फ्रेशर
पैड सहित अन्य तरीके से मरीजों की चाल
पर विशेष ध्यान देते हैं फिर इसी आधार पर
उसका इलाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि
लखनऊ में भी जल्द ही एक निजी कंपनी गेट
एनालिसिस सेंटर खोलने जा रही है।

C–कैल्शियम व विटामिन डी की कमी एक वजह

           कूल्हे में खराबी की
वजह कैल्शियम व विटामिन
डी की कमी भी है। खासकर चालीस
साल से अधिक की महिलाओं में मासिक
धर्म बंद होने के बाद कैल्शियम की तेजी
से कमी होने लगती है। इसलिए डॉक्टर
महिलाओं को हर दिन दूध पीने और पौष्टिक
आहार की सलाह देते हैं।

                       चाल खोल सकती है
बीमारी का राज एसएमएस हॉस्पिटल
जयपुर के डॉ. आरसी मीना का कहना है
कि चाल से हर राज खुल सकता है। जैसे
किसी मरीज की नब्ज देखने के बाद डॉक्टर
उसकी बीमारी का पता लगाता है। ठीक उसी तरह
से हड्डी रोग विशेषज्ञ मरीज की चाल को देख उसे
होने वाली बीमारी का आसानी से पता लगा सकते हैं।
हालांकि इसके लिए अनुभव की जरूरत होती है। मटक
या फिर लचीले होकर चलने से बचें।

 

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