खूबसूरत मातृत्व का अहसास होना कैसे क्या करें


 

             ख्रूबसूरत अहसास
है मातृत्व। जैसे ही आपको पता
चलता है कि आप मां बनने वाली हैं,
उसी समय से गर्भस्थ शिशु के साथ एक
रिश्ता बन जाता है। उसका विकास सही
ढंग से हो, इसके लिए आप हर एहतियात
बरतने की कोशिश करती हैं। इस लिहाज
से खानपान पर ध्यान देना सबसे जरूरी हैं,
क्योंकि आपके जरिए ही पोषण गर्भस्थ शिशु
तक पहुंचता है। अगर आपका खानपान ठीक
नहीं है तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि आप
संतुलित आहार के सेवन की आदत डालें।
           गर्भावस्था के दौरान
आपका शरीर भोजन के जरिए
प्राप्त होने वाली ऊर्जा का बेहतर
इस्तेमाल सुनिश्चत करता है। इस
दौरान आपको अपना खानपान ऐसा
रखना चाहिए कि शरीर को कुछ विशेष
विटामिन्स और मिनरल्स जैसे फोलिक एसिड
और आयरन इत्यादि और कुछ अधिक कैलोरी
प्राप्त हो सके। इसके साथ ही कोशिश करनी चाहिए
कि जंक फूड से दूर रहें। यदि किसी महिला का खान-
पान पहले से ही संतुलित पोषण वाला रहा है तो उसके
शरीर में इन तत्वों का कुछ भंडार रहता है, जिससे गर्भस्थ
शिशु की जरूरत पूरी हो सके। ऐसे में मां की सेहत को भी कोई
नुकसान नहीं पहुंचता।
A–भोजन की मात्रा :

            अक्सर लोग सलाह
देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान
मां को दो लोगों की जरूरत के अनुसार
भोजन ग्रहण करना चाहिए, जबकि हकीकत
में एक सामान्य महिला को गर्भावस्था के पहले
छह माह तक अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता
नहीं होती। इस दौरान भूख के अनुसार भोजन करना
ही काफी रहता है।

C–जरूरत के मुताबिक आहार :

               शरीर की बढ़ी हुई
जरूरतों के अनुसार आपको
संतुलित भोजन करना चाहिए।
संतुलित आहार वह है जिसमें विभिन्न
प्रकार का पोषण प्रदान करने वाले खाद्य
पदार्थ शामिल हों। उदाहरण के तौर पर ऊर्जा
देने वाले पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट्स),शरीर
का निर्माण करने वाले तत्व (प्रोटीन) और सु-
रक्षा प्रदान करने वाले तत्व (मिनरल्स-विटामिन्स)
इत्यादि की उचित मात्रा वाला आहार संतुलित आहार
कहलाता है। शरीर की अवस्था के अनुसार भोजन में
इन पोषक तत्वों को पर्याप्त मात्रा में शामिल करना
चाहिए, क्योंकि गर्भावस्था, शरीर की बनावट या शारी-
रिक मेहनत के अनुसार इस जरूरत का निर्धारण होता है।

D–ऊर्जा :

        आमतौर पर गर्भावस्था
के अंतिम महीनों में शरीर को
कुछ अधिक मात्रा में कैलोरी की
जरूरत होती है (हालांकि यह बढ़ोत्तरी
15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
आहार विशेषज्ञ भोजन में रोजाना 300 कै-
लोरी अधिक शामिल करने की सलाह देते हैं।
इस जरूरत को आप हाई कैलोरी वाले खाद्य
पदार्र्थो जैसे दूध, नट्स, सूखे मेवों, सोया उत्पादों
के सेवन के जरिए पूरा कर सकती हैं।

E–प्रोटीन :

          प्रोटीन की अतिरिक्त
मात्रा गर्भस्थ शिशु के तेजी से
विकास, गर्भनाल, स्तन ग्रंथियों
व गर्भाशय के विस्तार, एमनियोटिक
फ्लूइड के निर्माण व भंडारण, सहज प्रसव,
मां के दूध के निमार्ण के लिए जरूरी है।
मां के जरिए गर्भस्थ शिशु तक अमीनो
एसिड पहुंचाने के लिए भी यह जरूरी है।
गर्भावस्था के दौरान रोजाना आहार में
15 ग्राम प्रोटीन की अतिरिक्त मात्रा शामिल
करने की सलाह दी जाती है। दूध, मांस, अंडा
और चीज इत्यादि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।

F–आयरन :

           गर्भावस्था के दौरान
आहार में रोजाना आठ ग्राम
आयरन की अतिरिक्त मात्रा
यानी 38 ग्राम आयरन प्रतिदिन
भोजन में शामिल करने की सलाह
दी जाती है। आमतौर पर जन्म के समय
शिशु के रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर 18-
22 मिली. /डीएल (डेसीलीटर) रहता है। गर्भस्थ
शिशु और गर्भनाल के विकास के लिए आयरन
बहुत जरूरी है। रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर
बढ़ाने के लिए भी इसकी समुचित मात्रा प्राप्त होना
आवश्यक है। हरी सब्जियां, अंडा, दालों और आयरन
युक्त नमक इसका अच्छा स्रोत हैं।

G–फोलिक एसिड :

         एक सामान्य महिला
को रोजाना 100 मिलीग्राम
फोलिक एसिड की जरूरत होती
है, पर विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान
रोजाना 400 मिलीग्राम फोलिक एसिड
प्राप्त करने की सलाह देते हैं। इसकी कमी
से गर्भावस्था में मैक्रोसाइटिक एनीमिया व
गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क व रीढ़ के विकास
में दोष उत्पन्न हो सकता है। गहरे हरे रंग
की पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक व सिट्रस
फलों में यह अ’छी मात्रा में पाया जाता है।

H–कैल्शियम :

             गर्भस्थ शिशु की
हड्डियों व दांतों के विकास
के लिए कैल्शियम की आवश्य-
कता होती है। गर्भावस्था की अंतिम
तिमाही में इसकी करीब 25-30 ग्राम
मात्रा गर्भस्थ शिशु तक पहुंचती है। दूध,
दही, मट्ठा इत्यादि इसके अच्छे स्रोत हैं।
इनमें उच्च मात्रा में कैल्शियम के साथ
ही विटामिन बी 12 भी पाया जाता है।
अगर आपको दूध और उससे निर्मित
उत्पादों से एलर्जी है तो इन तत्वों के
सेवन के विषय में अपने चिकित्सक
से परामर्श ले सकती हैं।

I–विटामिन ए :
 

         आमतौर पर एक महिला
को 2400 माइक्रोग्राम बी कैरोटिन
की आवश्यकता होती है। गर्भावस्था
के दौरान भी इसकी इतनी ही मात्रा
ग्रहण करने की जरूरत होती है। अंडे
की जर्दी, मक्खन, गहरे हरे और पीले
रंग की सब्जियां और फल विटामिन ए के
अच्छे स्रोत हैं।

J–विटामिन डी :

           मां का शरीर कैल्शियम
को भली प्रकार एब्जा‌र्ब्व कर सके,
इसके लिए विटामिन डी लेना बेहद
जरूरी है। सूरज की किरणों से विटामिन
डी मिलता है, जिसकी मदद से शरीर दूध,
दालों इत्यादि से मिलने वाले कैल्शियम को
भली प्रकार ग्रहण कर पाता है।

K–सोडियम :
 

          किसी प्रकार के विकारों,
डिसऑर्डर और कमी से बचने के
लिए एक सामान्य महिला के शरर
में सोडियम की समुचित मात्रा पहुंचनी
चाहिए। आहार में इसकी कमी से हार्मोन
संबंधी बदलाव उत्पन्न हो सकते हैं। ग-
र्भावस्था के दौरान ऐसी दवाओं से बचना
चाहिए, जिनसे बार बार-बार टॉयलेट जाने
की आवश्यकता महसूस हो, क्योंकि इससे
शरीर से जरूरी सोडियम भी निकल जाता है।
अगर हाइपरटेंशन जैसी कोई समस्या है, तब सो-
डियम की मात्रा सीमित करने की सलाह दी जाती है।

L–तरल पदार्थ :
 

              शरीर में पानी की
कमी न होने दें। भरपूर मात्रा
में पानी पीने के साथ ही ताजे
फलों का रस ग्रहण करें। जब भी
घर से बाहर जाएं तो पीने का पानी
साथ ले जाएं, क्योंकि बहुत सी बीमारियां
अशुद्ध पानी के कारण होती हैं।

M–वसा :
 

           इस दौरान अपने
कुकिंग ऑयल व वसा पर
ध्यान देना भी जरूरी है। घी,
मक्खन और नारियल तेल में
सैचुरेटेड फैट्स काफी ज्यादा होते
हैं, इसलिए इनके सेवन से बचना
चाहिए। इनके अलावा वनस्पति घी में
ट्रांस फैट्स की मात्रा अधिक होती है और
यह भी सैचुरेटेड फैट के जितना ही नुकसान-
देह होता है।

 

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