आदि शक्ति (सहजयोग)-8


1-महॉमाया की शक्तियॉ

           सारे संसार में जो चैतन्य बह रहा है
वे उसी महॉमाया(आदिशक्ति)की शक्ति है इस
महॉमाया की शक्ति से ही सारे कार्य होते हैं, यह
शक्ति सब चीजों सोचती हैं,देखती हैं व जानती है।
तथा सबको पूरी तरह से ब्यवस्थित रूप से लाती है,
और सबसे बडी चीज है कि यह आपसे प्रेम करती है,
इस प्रेम में कोई मॉग नहीं है,सिर्फ देने की इच्छा है,
आपको पनपाने की इच्छा,आपको बढाने कीइच्छा,
आपकी भलाई की इच्छा ।।

2-आदिशक्ति क्या है

                यह शक्ति सर्वशक्तिमान परमात्मा
श्री सदाशिव की शुद्ध इच्छा है,आदिशक्ति परमात्मा
के प्रेम की प्रतिभूति है,    परमात्मा का विशुद्ध प्रेम है।
अपने प्रेम में उनहोंने इच्छा की कि ऐसे मानव का सृजन
हो जो आज्ञाकारी हो,उत्कृष्ट हो,देवदूतों की तरह हो और इसी
विचार से उन्होंने सृजन किया,ये आदिशक्ति प्रेम की शक्ति है,
आदिशक्ति का प्रेम इतना सूक्ष्म है कि कभी आप इसे समझ
ही नहीं सकते हैं।सारे ब्रह्माण्ड का सृजन करने वाली .ही शक्ति
है।यह ब्रह्म चैतन्य है।परम सत्य तो यह है कि सृष्टि ब्रह्म
चैतन्य के सहारे चल रही है।यह सारा चैतन्य परमात्माकी
की ही इच्छा है और इस परम चैतन्य की इच्छा से ही
आज हम मनुष्य स्थिति में पहुंचे हैं ।।

3-शब्द की शक्ति

      आदिशक्ति माता का नाम लिर्मला है,
जिसमें नि- पहला अक्षर है, जिसका अर्थ है
नहीं।अर्थात कोई वस्तु जिसका कोई अस्तित्व नहीं
है,लेकिन जिसका अस्तित्व प्रतीत होता है उसे तो
महॉमाया (भ्रम) कहते हैं।सम्पूर्ण विश्व इसी प्रकार
का है ।यह दिखता तो है मगर वास्तव में है नहीं।यदि
हम इसमें तल्लीन हो जाते हैंतो प्रतीत होता है कि यह
सबकुछ है ।तब हमें लगता है कि हमारी आर्थिक अवस्था
अच्छी नहीं है,सामाजिक व पारिवारिक परिस्थितियॉ असंतोषजन
है,हमारे चारों ओर जो कुछ भी है सब खराब है।हम किसी चीज
से संतुष्ट नहीं हैं ।

4-सहजयोगी अपने पैर न छुआने दें

      समान्य व्यक्ति के लिए हर सहजयोगी
गुरु हो सकता है,इस स्थिति में आप किसी से
अपने पैर न छुआने दें,जैसै कि भारत में अपने
से बडों के पैर छूने की परम्परा है,उस स्थिति मे
तो कोई बात नहीं है, मगर गुरु के नाते यदि आप
अपने छूने देते हैं तो यह आपके लिए हानिकारक हो
सकता है,आप यहजयोग से बाहर चले जाते हैं। आपको
भी किसी अवतरण के अतिरिक्त किसी अन्य के सम्मुख
समर्पित नहीं होना चाहिए ।अपने गुरु के पैर अवश्य छू लें
मगर इससे पहले आपको चाहिए कि अपने कान पकड लें।

5-चैतन्य लहरियों से स्वयं को सत्यापित करें

            यदि आप चैतन्यलहरियों के द्वारा स्वयं
को सत्यापित करते हैं तो वह आपका ज्ञान बन जाता
है,और धीरे-धीरे यही ज्ञान आपको बताया जाता है।पृथ्वी
की उत्पत्ति के विषय में बताने वाली पुस्तकों में न उलझें,
इससे आपका मस्तिष्क दूसरी दिशा में चला जायेगा।आप ऐसे
ज्ञान की ओर चले जायेंगे जो सम्भवतः ज्ञान है ही नहीं।फिर आप
सोचने लगोगे कि यह तो मुझे पता ही नहीं था मैं जानता ही नहीं
था,आपको तो जानना यह है कि आप क्या हैं।आप तो आत्मा हैं
और सामर्थ्य के अनुसार आत्मा का जो प्रकास आप लेकर चल
रहे हैं वह साधारण प्रकास से अलग है,जो प्रकास दिखता है
वह न सोचता है न समझता है,और जो प्रकास आप
लेकर चल रहे हैं वह सोचता भी है और समझता भी
है,प्रभु आपको उतना ही प्रकास देता है जितनी
आपकी सामर्थ्य है,यह प्रकास न तो चकाचौध
करता है और न ही मध्यम पडता है,एकदम
उतना ही जितना आप समझ सकते हैं।लेकिन
यदि आप इन्हैं आप आत्मसात नहीं करते
हैं तो आदिशक्ति को बहुत कष्ट होता है
इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि इधर-
उधर का ज्ञान महत्वपूर्ण नहीं है।
महत्वपूर्ण तो यह है कि आप
कहॉ पहुंचे और सहजयोग में
आपने कितनी परिपक्वता
प्राप्त की ।

6-जीवन साथी चयन के लिए ध्यान केन्द्रों को अपवित्र न करें

                   हमें उन मर्यादाओं के बारे में बात करनी है
जिनका पालन सहजयोगी को करन हा ।इसके लिए सहजयोगी
को आपने मूलाधार के महत्व को समझना होगा,इसके विना उत्क्रॉति
प्राप्ति नहीं हो सकती है ।सहजयोगी जीवनसाथी चयन के लिए आश्रमों,
ध्यानकेन्द्रों का उपयोग करते हैं उन्हैं अपवित्र न करें ।इस बात का सम्मान करें
आपको विवाह करना है तो सहजयोगी से बाहर जीवनसाथी ढूंड सकते हैं,क्योंकि
कई लोग सहजयोग से बाहर सम्बन्ध बनाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।
कई उदाहरण मिलेंगेकि लोगों ने सहजयोग से बाहर शादी करके अच्छे लोंगों को
सहजयोग में लाये हैं।सहजयोग में तो यह प्रयत्न सम्भव नहीं है,इससे आपका
हित नहीं होगा ,ध्यान रखे यदि आप ऐसा करते हैं तो आपका मूलाधार कभी
भी स्थापित नहीं हॉ पायेगा।आपकी उन्नति के लिए यब भयानक झटका होगा
एक ही नगर में इसप्रकार का सम्बन्ध बनाना अत्यन्त गलत होगा, इससे
गलत परम्परा बनती हो छेडना,अच्छी जोडी है या तुम अच्छे लगते हो या
इस प्रकार की बातें कहने से मूलाधार विकृत होता है,ब्रह्मचर्य का जीवन ही
आपके हित में है।किसी भी स्थिति में सहजयोग के नियमों का पालन
किया जाना चाहिए ।

7-बॉईं ओर के लोगों नमक अधिक खाना चाहिए

         दॉईं ओर के लोगों को चीनी का परामर्श दिया
गया है और बॉईं ओर के लोगों को नमक का।नमकसे
वे बहुत सी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं,क्योंकि
नमक उन्हैं व्यक्तित्व प्रदान करता है।,आत्मविश्वास दे सकता
है,जिससे वे गरिमामय ढंग से ,अपनी अभिव्यक्ति कर सकेते हैं।

8-सहस्रार पकडना गम्भीर बात है

           सहजयोगी का अगर सहस्रार पकडता है
तो यह गम्भीर बात है क्योंकि सहस्रार तो आदिशक्ति
का स्थान है,उसे आदिशक्ति को पहचानना होगा,ऐसे लोग
सहजयोग के प्रति द्वंद में रहते हैं।उन्हैं यह बात समझानी चाहिए
कि आपको आत्मसाक्षात्कार माता जी ने दिया है किसी और ने नहीं।
जबतकआप इस बात को नहीं समझते कि राम कृष्ण,शिव,विष्णु आपसे
नाराज हो जायेंगे।

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