जीवन को समुन्नत दिशा की ओर ले जाने के उपाय-10


वेद सत्य-

1-देवो देवेषु वनते ही वार्यमं-श्रृग्वेद-

अर्थात धन उन्हीं के पास ठहरता है जो सदगुणी है।
दुर्गुणी की विपुल सम्पदा भी स्वल्पकाल में नष्ट
हो जाती है ।। 2-रमन्तॉ पुणयाः लक्ष्मी – अथर्ववेद-
अर्थात ईमानदारी की कमाई का धन ही ठहरता है, बेइमानी
से कोई फूलता -फलता नहीं है ।।

2 – जीवन को समुन्नत दिशा की ओर ले जाने के उपाय अपनायें-

जीवन को उन्नत दिशा की ओर ले जाने के लिए
आवश्यक है कि बुद्धि विवेक ठीक प्रकार से काम करे।
बुद्धि विवेक की स्थिरता के लिए शान्त चित्त आवश्यक है,
पानी में प्रतिबिम्ब तभी दिखाई देगा जब पानी स्थिर हो यदि पानी
हिल रहा हो तो प्रतिबिम्ब भी स्थिर नहीं रह सकता है, मस्तिष्क
में जब उफान आ रहे हों तो विवेक स्थिर नहीं रह सकता है
उचित पथ प्रदर्शक बुद्धि ही है ।।

3 -ईर्ष्या,द्वेश तथा जलन से बचें-

ङन मानसिक आवेशों के कारण अन्तर्दाह
की अग्नि पैदा होती है, जिससे जीवन के
उपयोगी तत्व ईंधन की भॉति जलते रहते हैं,
देह अन्दर ही अन्दर खोखली होती जाती है,
जहॉ अग्नि जलती है वहॉ आक्सीजन खर्च होता है
और कार्वनगैस उत्पन्न होती है जिससे शरीर अनेक
रोंगों का घर बन जाता है जैसे तपैदिक,दमा,
बहरापन,कुष्ठ, जैसी व्याधियॉ शुरू होती हैं,
और कम समय में ही उसकी मृत्यु हो
जाती है ।।

4 – अधिक लोभी और कन्जूस होना भी हानिकारक है –

एक शोध के अनुसार लोभी और कन्जूसों
को कब्ज की शिकायत रहती है,और अधिकॉश
दिनों जुकाम लगा रहता है,उनके शरीर में लौह और
क्षार की मात्रा कम हो जाती है,बाल झडने लगते हैं,
तथा सफेद होने लगते हैं ।ङसलिए अधिक लोभ
तथा अधिक कन्जूश होने से बचें ।

5 – आवेश से बचें-

        अपने मानसिक तन्तुओं को सदा उत्तेजित
रखना अपने आप को जलती मशाल से झुलसाते
रहने के समान है, ङससे शक्ति का नाश होता है डाक्टरों
ने पता लगाया है कि यदि हम 4 घण्टे लगातार क्रोध में रहें
तो लग-भग 8 ओंस खून जल जाता है और ङतना ही
शरीर में विष उत्पन्न हो जाता है, हड्डियों के
भीतर की मज्जा सूख जाती है, जिससे
निमोनियॉ, ङन्फ्लुऐन्जा सरीखे
रोगों के आक्रमण प्रारम्भ हो
जाते हैं ।

6 – मस्तिष्क से निकले विचार कभी नष्ट न नहीं होते –

     जिस प्रकार पानी से बना भाप अन्यभाप

के साथ मिलकर बादल का रूप धारण करती है, ङसी

प्रकार मस्तिष्क से निकले हुये विचार वायुमण्डल में उडते हैं,

और अन्य लोगों के छोडे विचारों के साथ मिलकर बादल का सा

रूप धारण कर लेते हैं, जोकि पूरे वायुमण्डल में फैल जाते हैं, और कोई

व्यक्ति कहीं पर यदि किसी तथ्य पर विचार करता हैं और उस तथ्य के

बारे में सोचता है तो वायुमण्डल में फैले वे विचार मस्तिष्क की ओर आकर्षित

होते हैं फलस्वरूप उस सम्बन्ध में नया विचार उत्पन्न हो जाता है ।

7 – बुराई दोस्तों से आती है-

           जिन्दगी में जितनी भी बुराङयॉ आती हैं
वे केवल दोस्तों के कारण आती हैं ङसलिए प्रार्थना
करो कि हे ईश्वर मुझे ऐसे दोस्तों से बचाओ ,दुशमन
के कारण बुराई नहीं आती है ।

8 – झुकना शालीनता का प्रतीक है-

जीवन में झुकना शालीनता का प्रतीक है,
जो लोग कहते हैं हम झुकना नहीं जानते हैं,
ङसका अर्थ है वे मुर्दा है, निर्जीव हैं ।

9 – हम कुयें के मेंढकों के समान हैं-

किसी अंधेरे कुंयें में कुछ मेंढक थे,

उनमें एक ने कहा ऊपर क्या हेगा भय , औरों ने
कहा क्या होगा ऐसा ही होगा जैसा यहॉ है, लेकिन
उस मेंढक को विश्वास नहीं हुआ और ऊपर चढने का
प्रयास करने लगा कई बार छलॉग लगाने पर नीचे ही
गिरता,लेकिन एक बार ऊपर छलॉग लग ही गई देखा
तो बाहर की दुनियॉ उजाले की है आनन्द की है
जब वह फिर कुंयें में गया तो उसन सबको
ङस दुनियॉ के बारे में बताया कि ऊपर की
दुनियॉ में उजाला है ।

10 – गाली का प्रभाव-

      अगर आप कहते हैं कि उसने
मुझे गाली दी तो आपने यह गाली
ली क्यों, अर्थात जब कोई गाली देता है
और दूसरा लेता नहीं है तो वह उसी के पास
रह जाती है,गाली के शब्द निर्पेक्ष होते हैं, ङन
शब्दों से गाली एक मान्यता बन गई है, ङन्हीं
शब्दों से गीत और भजन भी बनते हैं ।

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