यथार्थ ज्ञान हमारी आत्मा में है-1


ज्ञान किताबों में नहीं होता, बल्कि यथार्थ
ज्ञान तो हमारी आत्मा में विद्यमान है,पर
कर्म –मैल ने उसे ढक रखा है । धर्मशास्त्र
तो इस कर्म मैल को साफ करने में मार्ग
दर्शन का काम करते हैं। सच्चा ज्ञान तो वही
है जो आत्मा के सच्चे स्वरूप को जानें । जो
ज्ञान चिन्ता को मिटाता है बस वही सुख का
साधन हैं ।

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