स्वयं को पहचानिए-12


1-              आपका जीवन
DSC00240तो प्रकृति की अनुपम भेंट है।
यह सृष्टि की एक ऐसी कृति है,
जो दुर्लभ है।प्रत्येक मानव को यह
जीवन गुजारना ही पडता है,अब चाहे
वह इसे रोकर गुजारें या हंसकर।रहना तो
यहीं पडता है।और जब रहना इसी संसार में
हैऔर वह भी गिने-चुने दिनों तक,तो फिर इन
थोडे से दिनों को रो-रोकर ही     क्यों गुजारा जाय।
हंसकर क्यों नहीं।जीवन के उतार-चढावों में प्रशन्नता
का अपना एक अलग ही विशिष्ट महत्वहै।संसार में शायद
ही कोई ऐसा मनुष्य होगा, जिसके जीवन में विभिन्न कठि-
नाइयॉ, समस्यायें,पीडाएं    अथवा तरह- तरह के मोड न आए
हों।इन सबका सामना करने,स्वयं को प्रशन्नचित्त बनाये रखने
और मानसिक द्वंद्व से बचने का यह हंसना-मुस्कराना ही एक
मात्र उपाय है। हंसने के कारण मनुष्य कठिन से कठिन समस्याओं
का हल सुगमता से निकाल लेता है।यदि आप जीवन के इन क्षणों
को उलझनों में उलझाये रखेंगे तो निसंदेह विक्षिप्त हो सकते हैं।
हंसने वाला मनुष्य तो जीवन की बडी-बडी कठिनाइयों और
समस्याओं का सामना भली प्रकार कर सकता है और
जीवन संघर्ष में, हंसी के साथ विजय प्राप्त कर
सकता है ।
               महॉपुरुषों के निरंतर
कार्य करने,संघर्षपूर्ण जीवन जीने
और सफलता पाते रहने का रहस्य तो
उनके मुस्कराहट भरे जीवन दर्शन में छिपा है।
जिन लोगों ने महॉपुरुषों के सानिध्य का लाभ प्राप्त
किया है वे जानते हैं कि महॉपुरुष कितने विनोदी और
प्रिय स्वभाव के होते हैं।इसी में इनके संघर्षमय,कर्तव्य
प्रधानता तथा कठोर जीवन की सफलता का रहस्य
छिपा रहता है। हंसने से तो मन की गॉठें सरलता से
खुल जाती हैं।रवीन्द्रनाथ टैगौर ने कहा है कि जब
में अपने आप में हंसता हूं तो मेरा बोझ हल्का
हो जाता है।हंसना मानव जीवन का एक
उज्वल पक्ष है ,हंसी यौवन का आनंद
है।हंसी यौवन का सौदर्य और श्रृंगार
है, जो व्यक्ति इस सौदर्य और
श्रृंगार को धारण नहीं कर सकता,
उसका यौवन भी नहीं ठहरता।
इसमें कोई संदेह नहीं कि
मुस्कराहट के संपर्क से
कठिनाइयॉ, परेशानियॉ
तो हल होती हैं
साथ ही शारीरिक
और मानसिक
स्वास्थ्य पर भी
इसका प्रभाव पडता है।
कोशिश करें आपको कब और
कहॉ किन लोगों के साथ और कैसे
कार्यों से सच्ची खुशी,सच्चा आनंद प्राप्त
होता है,अपनी खुशी को आपस में बॉटकर उसका
लुफ्त उठाइए ।हास्य जीवन का सौरभ है।सदा जवान
और ताजा रहने के लिए खूब हंसिए,बिना किसी व्यवधान
के हंसिए,क्योंकि हंसी तो ईश्वर की विशेश देन है।जितना
चाहो उतना हंसिए,अपने बचपन की गहराइयों में उतरकर,
अपनी शैतानियों पर ठहाका लगाइए। फिर देखना जिंन्दगी
किस तरह खिल उठती है।।
2- कभी-कभी हम
              अपने ऊपर अति विश्वास
के कारण किसी  कार्य  को सम्पादित
करते समय , उसके सभी कारणों की कोई
सूची भू नहीं बनाते हैं ।अधिकॉश लोग यह मानकर
चलते हैं कि हम अपने सभी उद्देश्यों को जानते हैं,परंतु
इसी के साथ हम यह भी भूल जाते हैं कि अकसर हमारे
कुछ उद्देश्य यह भी होते हैं,जिनके बारे में कभी सोचा तक
नहीं है,और ऐसे ही न मालूम यह उद्देश्य अकसर हमारी
राह के रोडे बनकर खडे हो जाते हैं।यह हमारी राह के
बाधक बनते हैं,तभी हमारा ध्यान इनकी ओर जाता
है।अगर लक्ष्यों को मूल समझलिया जाए,तो हम
सहज ही समस्याओं के सर्जनात्मक समाधान
पर पहुंचने में सफल सिद्ध हो सकते है ।
3- स्वयं को पहचानिए-
       अपनी शक्तियों को पूर्णतःजागृत
कीजिए।आपकी सुप्त पडी प्रतिभा आपसे
वह सबकुछ करा देगी, जिसे आप अभी तक
कल्पनाओं में सोचते रहे हैं।आपकी क्षमताओं के
जागृत होते ही आप स्वयं कहने लगेंगे कि मैं भी
कुछ कर सकता हूं ।।
4-     आप क्यों परेशान
हैं ?ऐसे कौन से कारण हैं,
जिन्होंने आपको परेशान कर
रखा है?यह बेचैनी सी क्यों है?
शायद यह किसी परेशानी के कारण
है।आखिर यह परेशानी क्या है?कौन है
इसका जिम्मेदार?कहॉ से प्रारम्भ होता है
इसका सूत्र ?क्या परेशानी के समय इन प्रश्नों
पर आपने कभी गौर किया है।कभी सोचा है।अगर
नहीं सोचा तो आइये  इन  प्रश्नों प्रश्नों  पर  गम्भीरता
के साथ मंथन करें।शायद आपकी परेशानी का वास्तविक
कारण कुछ और ही हो।कभी -कभी  ऐसा  भी  होता  है  कि
हमारी जो समस्या होती है  उसके  मूल में ही उसका समा-
धान होता है और हम विमूढता में पडकर इधर-उधर हाथ
पैर पटकते रहते हैं,जिसका नतीजा शून्य निकलता है यही
हमारी परेशानी का सबब है ।।
5-          मैं अपने मित्र के
साथ वैडमिंन्टन खेलता हूं,
वह प्रतिदिन ही आमतौर पर
इसलिए हार जाता है कि वह हमेशा
ही बहुत तेजी के साथ शॉट  मार  कर
शटल   कॉक  को  दबा  देने  का प्रयत्न
करता है और फिर होता  यह है  कि  उसकी
शीघ्रता और शक्ति से शटल जाल में फंसकर
रहजाती है ।वास्तव में एक अन्य उद्देश्य के
कारण वह बहक जाता है,कि वह अन्य
लोगों को वेहद दम-खम तेज तर्रार
खिलाडी दिखाई दे।जिससे वह
विफल हो जाता है।इसलिए
अगर लक्ष्य को मूल समझ
लिया जाय तो हम सहज
ही समस्याओं के
सर्जनात्मक
समाधानपर
पहुंचने में
सफल सिद्ध
हो सकते हैं।
6-         हमारे अंदर की
निराशा हमारी सोच का ही
दुष्परिणॉम है।अकसर जिंदगी
में ऐसा होता है कि आप किसी भी
कार्य,किसी बात,घटना,अथवा व्यक्ति
के संबंध में अपनी बनाई धारणॉ को विपरीत
पाते हैं।इसका मुख्य कारण आपकी असंगत सोच
ही है, जबकि आप सोचते  कुछ  हैं  और  होता कुछ
और है।अतः इन सब कारकों से स्वयं को दूर रखने
तथा मन में आशा की ज्योंति,जगाकर,निराशा के
अंधकार को हमेशा के लिए नष्ट करने के लिए,
ऊपर दिये गये सुझावों पर अमल कीजिए फिर
देखिए आपका मस्तिष्क निराशा को भूल ही
जायेगा ।
7-         वैसे उत्थान और
पतन में किसी का भी चयन
कर लो अपनी मर्जी की बात है।
और यह भी सच है कि अपने विचार
में तो प्रत्येक व्यक्ति सुख देने वाले कार्य
करना चाहते हैं,किन्तु जिस प्रकार अज्ञानता
के कारण बच्चे सॉप-बिच्छू,ढिपकली जैसे भयंकर
प्राणियों को भी खिलौना समझकर पकडने के लिए
हाथ बढा देते हैं,ठीक उसी प्रकार उपयुक्त जानकारी
के अभाव में वह ऐसा नहीं करता।कभी क्षणिक लाभ
कभी जल्दबाजी में ऐसा निर्णय ले लेता है,जो भविष्य
में उसके लिए दुखदायक होते हैं।सही का चुनाव करना
ही बुद्धिमता की सबसे बडी कसौटी है।जीवन जैसी महान
संपदा को किस प्रयोजन के  लिए  नियोजित  किया जाय.
इसका चुनाव जो कर सकें,उन्हीं को बुद्धिमान कहा जायेगा
और यह सब निर्भर  करता है  हमारे सोचने की क्षमता पर,
हमारे उत्कृष्ट विचारों पर।हम अपने सोचने की क्षमता में
सुधार कर स्वयं को निराशा उत्पन्न करने वाली स्थिति
से उबार सकते हैं।मन में गहरे रूप में बैठ गई शंका को
उखाड फेंक दीजिए और अपने सोचने के तरीके को
बदल डालिए ।फिर देखिए निराशा आपको दबर-
दूर तक नजरनहीं आयेगा।सभी कार्य त्वरित
गति से पूर्ण होते चले जायेंगे।तो आइए
आप भी हॉ-हॉ आपके लिए ही
है,आज से ही इस मंत्र को
अपने जीवन में उतार
लीजिए और अपनी
को एक नईं दिशा
दीजिए ।सबकुछ
अच्छा ही
अच्छा होगा ।।
8-           निराशा से बचने
के लिए तो सच्चाई को स्वीकर
करना होगा भ्रामक धारणाओं से बचना
होगा,क्योंकि भ्रॉतियॉ स्वयं में अनेक विपत्तियों
को को जन्म  देती हैं।  रस्सी को सॉप और झाडी
को भूत समझकर कई बार लोग इतने व्याकुल
हो जाते हैं कि भयभीत और कर्तव्यविमूढ
होकर प्राण तक गंवा बैठते हैं।मछलियों
और चिडियॉ चारा  देखते  ही उस  पर
लपकती हैं वे यह नहीं समझ  पाती
कि यह प्रपंच उन्हैं जाल में फंसाने
वाले  बहे लिए  ने  रचा है, यह
भ्रम है।वे कंटीली झाडियों
वाले भटकाव में बुरी
तरह भटकता है
और ठोकरं
से निरंतर
आहत करता
है।किसी ने सच
कहा है कि मनुष्य
अपने भाग्य का निर्माता
स्वयं है,उसकी तो एक मुठ्ठी
स्वर्ग में और दूसरी नर्क में संजोया
हुआ है ।।
9-            असफलता पर
पश्चाताप अवश्य कीजिए।
उसका कारण भी तलाशिए,
परतु निराशा को अपने पास मत
फटकने दीजिए।निराशा तो आपको
बहुत कुंठित कर सकती है।विचार श्रृंखला
में परिवर्तन निराशा दूर करने में आपकी
सहायता करेगी,क्योंकि आपके विचार ही
आपकी निराशा के मुख्य कारण हैं।निराशा
आपके विचारों की उपज है।अतः इसके मूल
में निहित विचारों को बदलिए।निराशा खुद
ही आपसे दूर भागेगी ।।
10-         निराशा तो आपके
मन के विचारों की उपज होती
है।अगर आप अपने विचारों की दिशा
ही परिवर्तित कर दें,तो निराशा दूर तक
नजर नहीं आयेगी ।किसी भी असफलता पर
निराश होना हर साधारण मनुष्य की स्वाभाविक
प्रतिक्रिया है,इसमें असाधारण कुछ भी नहीं है।हॉ
अगर गलत है तो वह है अपनी असफलता का रोना
लेकर बैठ जाना और निराशा को सीधे-सीधे आमंत्रण
देना।यह नहीं होना चाहिए ।।
11-         यदि आप अपने
लक्ष्य को साकार होना देखना
चाहते हैं,तो लक्ष्य पर हमेशा ध्यान
रखिए। उद्देश्य पूर्ति हेतु लगन के साथ
कर्म कीजिए।वैसे ही साधन अपनाइए,आपके
स्वप्न अवश्य पूरे होंगे ।आपकी सोच वास्तविकता
का बाना धारण कर लेगी ।आपका कर्म लगन के
साथ मिलकर सपनों को साकार कर देगा।
12-     सफलता प्राप्त
करने के लिए जवर्दस्त
सतत् प्रयत्न करो ।प्रयत्नशील
आत्मा कहती है कि मैं चाहूं तो समुद्र
पी जाऊंगी,मेरी इच्छा से पर्वत के टुकडे-
टुकडे हो जायेंगे इस प्रकार की शक्ति एवं
इच्छा रखो, कडा परिश्रम करो,तुम अपने
उद्देश्य को निश्चित पा सकते हो
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