सोच का सफलता के साथ है गहरा संबंध


 

                  किसी बात को सोचते हुए
अक्सर परेशानी इसलिए महसूस होती है,
क्योंकि लोग नकारात्मक बातों को लगातार
सोचते रहते हैं। सकारात्मक बातों को भी सोचा
जा सकता है, लेकिन वे इस ओर सोच ही नहीं पाते।
सोच का सफलता के साथ गहरा संबंध है। लेखक डेविड
जे. श्वा‌र्ट्ज कहते हैं कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए
सबसे पहली जरूरत होती है सोच।

                  सोच का सफलता से गहरा
संबंध है। आपकी जितनी बड़ी सोच होगी।
आपको उतनी बड़ी सफलता मिलेगी। व्यक्ति
की सोच में परमाणु बम जैसी ताकत होती है।
यदि सोच सकारात्मक होगी तो व्यक्ति में ऊर्जा
भर देगी। नकारात्मक सोच व्यक्ति को लाचार बना
देती है और वह तनाव का शिकार हो जाता है। नकारात्मक
सोच व्यक्ति को गलत कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।

                व्यक्ति कई बार गलत कार्यो
के चलते अपने जीवन को बर्बाद कर लेता है।
ऐसा सोच के कारण ही होता है। सकारात्मक सोच
असफलता के पहाड़ को ब्लास्ट कर सफलता की नई
राह दिखा सकती है। सही सोच के द्वारा हर उस चीज
को हासिल किया जा सकता है, जिसे व्यक्ति पाना चाहता
है। दार्शनिक अरस्तू कहते हैं कि यदि आप चाहते हैं कि सब
कुछ वैसा ही हो, जैसा आप चाहते हैं तो अपनी सोच को बदल
दीजिए। सब कुछ बदल जाएगा। हेनरी फोर्ड ने आठ सिलेंडर वाला
इंजन बनाने की सोची और उसे बनाने में जुट गए। सोच के कारण
ही वह शक्तिशाली इंजन बना सके। तब हेनरी फोर्ड निर्धन थे, उनके
पास कोई बड़ी डिग्री भी नहीं थी, केवल एक क्रांतिकारी सोच थी। उसी
सोच ने उन्हें सफलता के शीर्ष पर पहुंचा दिया। सकारात्मक सोच व्यक्ति
को आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाती है।

                सही दिशा में सोचने वाला व्यक्ति
आध्यात्मिक आनंद में डूबा रहता है। वह बीमारी,
तनाव और चिंता का शिकार कम होता है। असफलता
उसे हरा नहीं पाती, क्योंकि सकारात्मक सोच से वह अपनी
असफलता को सफलता में परिवर्तित कर लेता है। व्यक्ति की सोच
वहां तक पहुंच जाती है जहां तक सूरज की रोशनी भी नहीं पहुंच पाती।
सोच से व्यक्ति हार को भी जीत में बदल सकता है। मनुष्य की कल्पना
और सफलता देखने की क्षमता ही जीत हासिल करवाती है। जब आपकी
सोच और आत्मशक्ति एक दिशा में सोचते हैं तो अध्यात्म का मिश्रण इसे
परम शक्तिशाली बना देता है।

 

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