सात्विक प्रकृति से जीवन में स्थिरता और शुद्धता आती है


                                    “कोई भी भौतिक
चीज इन तीन आयामों – सत्व, रजस और तमस
के बिना नहीं होती। हर अणु में ये तीन आयाम होते
हैं – कंपन का, ऊर्जा का और एक खास स्थिरता का।
अगर ये तीनों तत्व ना हों, तो आप किसी चीज को थाम
कर नहीं रख सकते, वह बिखर जाएगी। अगर आपके अंदर
सिर्फ सत्व गुण होगा, तो आप एक पल के लिए भी बचे नहीं
रहेंगे – आप खत्म हो जाएंगे। अगर सिर्फ रजस गुण होगा, तो
वह किसी काम का नहीं होगा। अगर सिर्फ तमस होगा, तो आप
हर समय सोते ही रहेंगे। इसलिए हर चीज में ये तीनों गुण मौजूद
होते हैं। सवाल सिर्फ यह है कि आप इन तीनों को कितनी मात्रा में
मिलाते हैं।

                                          तामसी प्रकृति से
सात्विक प्रकृति की ओर जाने का मतलब है कि आप
स्थूल शरीर, मानसिक शरीर, भावनात्मक शरीर और ऊर्जा
शरीर को स्वच्छ कर रहे हैं। अगर आप उसे इतना स्वच्छ कर
दें कि उससे आर-पार दिखने लगे, तो आप अपने भीतर मौजूद
सृष्टि के स्रोत को देखने से नहीं चूक सकते। फिलहाल, वह इतना
अपारदर्शी है, इतना धुंधला है, कि आप उससे आर-पार देख नहीं
सकते।शरीर एक ऐसी दीवार बन गया है, जो हर चीज का रास्ता रोक
रहा है। इतनी अद्भुत चीज, सृष्टि का स्रोत यहां, शरीर के भीतर मौजूद
है लेकिन यह दीवार उसका रास्ता रोक देती है क्योंकि वह बहुत अपारदर्शी
है, धुंधली है। अब उसे साफ करने का समय आ गया है। वरना आप सिर्फ
दीवार को जान पाएंगे, यह नहीं जान पाएंगे कि उसके अंदर कौन रहता है।

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