साधना कैसे करें तेजी से अथवा सहज भाव से


 

                      किसी चीज को
तीव्रता से करने की कोई जरूरत
नहीं है। जब आप कहते हैं कि मैं कोई
चीज बेहद तीव्रता से कर रहा हूं तो आपके
कहने का मतलब होता है कि आप उस चीज
के पीछे पागल की तरह लगे हैं। स्वयं में तीव्रता
लानी चाहिए, आपको यह देखना चाहिए कि अपने
अस्तित्व, अपने मस्तिष्क व अपने वजूद में तीव्रता
कैसे लायी जा सकती है। अगर आप इसको बेहद तीव्र
बना लेते हैं, तो आप जो भी करेंगे, उसके अंदर तीव्रता,
प्रचंडता व प्रबलता होगी। लेकिन अगर आप चीजों को तीव्रता
से करने के चक्कर में पड़े रहेंगे तो जान लीजिए आप बेवकूफी
कर रहे हैं। साथ ही, ऐसा करते-करते आप बुरी तरह थक भी
सकते हैं। इसलिए किसी चीज को बेहद तीव्रता से करने की
जगह आवश्यक यह है कि हम अपने आप को तीव्र और
जीवंत बनाएं। अगर हम ऐसा कर पाए तो हम जो भी
काम करेंगे, उसमें सहजता और तीव्रता दोनों एक साथ
होंगी। बिना सहजता के अगर तीव्रता आ भी गई तो वह
बहुत थकाऊ होगी।

 

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