अपने दिल की आवाज सुनें तो आप सदैव स्वस्थ रह सकते हो एक मुलाकात


 

                  जब तक दिल धड़क
रहा है, तब तक ‘आपकी दुनिया’
आपके साथ है। कुदरत द्वारा निर्मित
शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग आपको
जिंदा रखने के लिए ताउम्र कोशिश करता
है, लेकिन हममें से तमाम लोग इसकी सेहत
की अनदेखी करते हैं, जिसका नतीजा हाई ब्ल-
डप्रेशर और विभिन्न हृदय रोगों के रूप में सामने
आता है। दिल की नैया को डुबोने की कोशिश
करने वाले इन रोगों को कैसे दी जाए शिक-
स्त? कैसेरहे दिल सेहतमंद..? व‌र्ल्ड हार्ट
डे (29 सितंबर) पर ऐसे ही विविध
पहलुओं के बारे में अंतरराष्ट्रीय
ख्याति प्राप्त हार्ट सर्जन व पद्मभूषण
से सम्मानित मेदांत दि मेडिसिटी, गुड़गांव
के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन के साथ विवेक
शुक्ला की बातचीत के प्रमुख अंश..

A–प्रश्न–हार्ट सर्जरी में नये ट्रेन्ड क्या हैं?

        सर्जरी में मिनिमली
इनवेसिव एप्रोच का ट्रेन्ड
तेजी से आगे बढ़ता जा रहा
है। इस एप्रोच में सर्जरी के लिए
छोटे से छोटा चीरा लगाया जाता है
और रोगी का स्वास्थ्य लाभ कहीं
ज्यादा तेजी से होता है। बाईपास
हार्ट सर्जरी या कोरोनरी आर्टरी
बाईपास ग्राफ्टिंग(सीएबीजी) के
दौरान अब रोगी को हार्ट लंग
मशीन पर रखने की जरूरत नहीं
है। कई नवीनतम उपकरणों के जरिये
सीएबीजी को अंजाम दिया जा रहा है।
इस कारण अब बाईपास हार्ट सर्जरी के
दौरान इंजरी होने या फिर अन्य जटिलताएं
कम हो रही हैं।

                दूसरा महत्वपूर्ण
विकास रोबोटिक सर्जरी है।
इसके जरिये अब पहले से कहीं
ज्यादा रोगी लाभान्वित हो सकते हैं।
इनमें हृदय के वाल्व संबंधी खराबी से
ग्रस्त व्यक्तियों और दिल में छेद होने के
विकारों (कॅन्जेनाइटल डिफेक्ट्स) से
पीड़ित रोगी भी शामिल हैं। बेहतर
सहायक उपकरणों (बेटर सपोर्ट
इक्विपमेंट) के प्रचलन में आने
के कारण अब हार्ट सर्जरी में
जोखिम कम रह गया है।

B–प्रश्न–हार्ट फेल्यर का
नवीनतम इलाज क्या है?
क्या हार्ट फेल्यर की रोकथाम
की जा सकती है?

           शुरुआती अवस्था
में पता चलने और हृदय
संबंधी रोगों का समय रहते
समुचित इलाज व प्रबंधन करने
से हार्ट फेल्यर (हृदय का सुचारु रूप
से कार्य न करना)की रोकथाम करने
में मदद मिलती है। लोगों में इस रोग के
प्रति जागरूकता पैदा करके और स्वास्थ्य
परीक्षण कार्यक्रमों के जरिये इस रोग का
शुरुआती दौर में ही पता लगाने में मदद
मिलती है। हार्ट फेल्यर के रोगियों के लिए
अब पूर्व की तुलना में अनेक नवीनतम
और बेहतर दवाएं उपलब्ध हैं।

                जोखिभरे कारकों-जैसे
हाई ब्लडप्रेशर, डाइबिटीज, और
हृदय धमनी रोग (कोरोनरी आर्टरी
डिजीज) का समुचित प्रबंधन करने से
हार्ट फेल्यर की रोकथाम संभव है। हार्ट
फेल्यर के नवीनतम इलाज में बेहतर और
नवीनतम दवाओं के अलावा इंटरवेंशन
(एंजियोप्लास्टी), ईईसीपी(एक विशेष
यंत्र) व कार्डिएक रीसिनक्रोनाइजेशन
थेरेपी (एक विशिष्ट आधुनिकतम
पेसमेकर) और स्टेम सेल
थेरेपी(अभी इसका परीक्षण
जारी है) का प्रयोग किया जाता
है। इसके अलावा मायोकार्डियल
एन्यूरिज्म (दिल का क्षतिग्रस्त
भाग जो गुब्बारे की तरह फूल जाता
है) की सर्जरी के जरिये रिपेयरिंग की
जाती है।

                    वेंट्रीक्युलर असिस्ट
डिवाइस का इस्तेमाल और हृदय
का प्रत्यारोपण(हार्ट ट्रांसप्लांट) आदि
विधियों से भी हार्ट फेल्यर के रोगियों
का इलाज किया जाता है। इलाज इस
बात पर निर्भर करता है कि पीड़ित
व्यक्ति रोग की किस अवस्था में है।

C-प्रश्न-हृदय संबंधी
रोगों के इलाज में क्या
स्टेम सेल थेरेपी कारगर है?

                स्टेम सेल थेरेपी
उन रोगियों के लिए उम्मीद
की किरण बन सकती है, जिनके
इलाज के लिए अभी तक कोई आधुनि-
क उपचार उपलब्ध नहींहै। हार्ट फेल्यर
में हृदय की मांसपेशियां काफी नष्ट
हो जाती हैं। स्टेम सेल के प्रयोग से
कुछ हद तक हृदय की मांसपेशियों
की रिपेयरिंग हो सकती है। इस प्रकार
स्टेम सेल थेरेपी हदय की कार्यप्रणाली को
सुधारने में मददगार हो सकती है।

                     अनेक लोगों के
हृदय की धमनियों में डिफ्यूज
ब्लॉकेज(धमनियों में कई जगह
अवरोध) होते हैं। ऐसे लोगों को नॉन
ऑपरेबल (इन लोगों का ऑपरेशन तो
क्या एंजियोप्लास्टी भी संभव नहीं है)की
श्रेणी में रखा जाता है। स्टेम सेल्स नये
कोलेटेरल्स (धमनियों की सूक्ष्म शाखाएं)
को विकसित करने में मदद करती है
और यह हृदय में रक्त का संचार
करने में सहायक है। स्टेम
सेल थेरेपी के संदर्भ में
अब तक का हमारा अनुभव
और इस क्रम में नतीजे काफी
उत्साहव‌र्द्धक रहे हैं। लेकिन
इस थेरेपी की कमी यह है कि
इसका इलाज अभी तक परीक्षणा-
त्मक (इन्वेस्टिगेशनल) स्थिति में है।

D-प्रश्न-हार्ट अटैक और
हृदय संबंधी अन्य रोगों की
रोकथाम के लिए क्या कदम उठाये
जाने चाहिए?

                  देश में हार्ट अटैक
के बढ़ते मामले एक समस्या
बन चुके हैं। शहरों में रहने वाली
लगभग 10 प्रतिशत वयस्क आबादी
हृदय धमनियों (कोरोनरी आर्टरीज) में
अवरोध (ब्लॉकेज) से ग्रस्त है। इस तरह के
अवरोध कालांतर में हार्ट अटैक के कारण बनते हैं।

             बेशक, हार्ट अटैक
को रोका जा सकता है। इस
संदर्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण
बात हृदय रोगों के जोखिम भरे
कारणों को शुरुआती दौर में पता
कर उनकी रोकथाम से संबंधित है।
रोकथाम के उपायों में नियमित रूप से
व्यायाम करना, प्रतिदिन 10,000 कदम
या इससे अधिक चलना, कैलोरी इनटेक को
नियंत्रित करना, खान-पान में जंक फूड और
तले हुए खाद्य पदाथों को कम से कम ग्रहण
करना और किसी भी रूप में तंबाकू के सेवन
से परहेज करना आदि शामिल हैं।

             याद रखें, स्वस्थ
जीवन-शैली हार्ट अटैक की
आशंका को काफी हद तक कम
कर देती है। हाई ब्लडप्रेशर, डाइबिटीज
और कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर का पता
लगाने के लिए नियमित रूप से चेक अॅप
कराएं। ये चेकअॅप उन लोगों को खासतौर
पर कराना चाहिए, जिनके परिवार के सदस्यों
को हृदय रोगों की समस्या रही हो। इसके अलावा
जो लोग पहले से ही हृदय रोगों से ग्रस्त हैं, वे हार्ट
अटैक के जोखिम को कम करने के लिए हृदय
रोग विशेषज्ञ से परामर्श कर एस्पिरीन, एसीई
इनहिबिटर्स, स्टैटिन्स या बीटा ब्लॉकर्स आदि
दवाएं ले सकते हैं।

E-प्रश्न-क्या ‘गोल्डन ऑवर’
के बाद हार्ट अटैक के रोगियों के
न बचने का खतरा कहीं ज्यादा बढ़ जाता है?

                 हार्ट अटैक पड़ने
पर गोल्डन ऑवर की अवधि
एक घंटे तक मानी जाती है। गोल्डन
ऑवर के अंदर समुचित इलाज मिलने पर
रोगी के हृदय की मांशपेशियों के नष्ट होने
की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से नियंत्रित
किया जा सकता है। वहीं गोल्डन
ऑवर के बाद दिल की मांसपेशियों
की रिकवरी होने की संभावनाएं बेहद
कम हो जाती हैं। इस स्थिति में हार्ट फेल्यर
होने और मौत होने का खतरा कहीं ज्यादा
बढ़ जाता है।

F-प्रश्न-हृदय धमनी रोग
(कोरोनरी आर्टरी डिजीज) से
ग्रस्त लोगों के इलाज के लिए कोई
नई तकनीक या नवीनतम दवाएं क्या हैं?

               जिन लोगों को एक
से अधिक बार हार्ट अटैक हो
चुका है, उनके लिए नए एंटीप्ले-
टलेट्स एजेंट्स(रक्त पतला करने
की दवाएं) विकसित किए जा चुके
हैं। ये प्लेटलेट्स एजेंट्स बार-बार
हार्ट अटैक होने की स्थिति को
कम करने में कहीं ज्यादा कारगर
हैं।

          एंजियोप्लास्टी से
संबंधित नए स्टेन्ट्स अब
उपलब्ध हैं,जो बार-बार हार्टअटैक
होने की आशंका को कम कर सकते
हैं। बॉयोडिग्रेडेबल स्टेन्ट्स भी विकसित
हो चुके हैं, जो कोरोनरी आर्टरी में ही
जज्ब (डिस्सॉल्व) हो जाते हैं। इसके
अलावा अब ‘हाइब्रिड प्रोसीजर्स’ भी
उपलब्ध है, जिसके जरिये जरूरत
पड़ने पर किसी रोगी में अलग-अलग
उपकरणों के द्वारा एंजियोप्लास्टी और मिनि-
मली इनवेसिव सर्जरी इन दोनों को ही अंजाम
दिया जा सकता है।