आवाज का रखें ध्यान यही है आपके स्वास्थ्य की पहचान


 

           24 वर्षीया नेहा प्राइमरी
स्कूल में अध्यापक हैं। करीब 2
महीने पहले उनकी आवाज बैठ
गयी। शुरुआत में उन्होंने यह
सोचकर कि यह कोई खास बात
नहीं है किसी डॉक्टर की सलाह के
बगैर गरारे किये और एलर्जी की दवाएं
लीं, किंतु 2 महीने तक कोई भी आराम न
मिलने पर उन्होंने नाक, कान व गले के
विशेषज्ञ को दिखाया। दूरबीन द्वारा स्वर
यंत्र (लैरिंक्स) की जांच पर पता चला
कि उनकी दायीं वोकल कॉर्ड में एक
गांठ है।

            ई.एन.टी. विशेषज्ञ
ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह
दी। शुरुआत में तो वह ऑपरेशन
की बात सुनकर कुछ डरीं, किंतु डॉक्टर
द्वारा आश्वस्त करने के बाद उन्होंने ऑपरेशन
कराया। ऑपरेशन के बाद उनकी आवाज पहले
की तरह सहज-स्वाभाविक हो गयी।

A–कारगर परिणाम

                ऑपरेशन की इस
विधि को फोनो माइक्रो सर्जरी
या माइक्रोलैरिन्जयल सर्जरी कहते
हैं। इस सर्जरी में किसी बाहरी चीरे के
बगैर माइक्रोस्कोप के द्वारा स्वरयंत्र की
दिक्कतों को दूर किया जाता है। आमतौर
पर इस ऑपरेशन के बाद पहले सप्ताह में
ही आवाज ठीक हो जाती है।

1–थायरोप्लास्टी: ऑपरेशन
की   इस  पद्धति  के  अंतर्गत  गले
में एक छोटी-सा चीरा लगाकर स्वरयंत्र
के आकार व कार्य में आयी विकृति को ठीक
किया जाता है।

                      इस पद्धति से
प्यूबोफोनिया (वयस्कावस्था
में बच्चों जैसी आवाज), डिस्फोनिया
(ध्वनि में विकृतियां) और वोकल कॉर्ड
पैरालिसिस (लकवा) आदि बीमारियां ठीक
हो जाती हैं।

B–आवाज बदलने के कारण

1-स्वर यंत्र में सूजन (लैरिन्जाइटिस)।

2-गले का कैंसर व स्वरयंत्र में गांठ।

3-वोकल कॉर्ड नोड्यूल,
वोकल पॉलिप की समस्या।

4-स्वरयंत्र में कमजोरी और
लकवा (वोकल कॉर्ड पैरालिसिस)।

5-अन्त:स्रावी ग्रन्थियों की बीमारियां।

6-स्वरयंत्र की बनावट में परिवर्तन।

7-बोलने के विकार (स्पीच डिफेक्ट्स)
आदि बीमारियां आवाज में बदलाव के प्रमुख कारण हैं।