चाहें तो आपका यौवन हमेशा बरकरार रह सकता है


 

          लंदन- एक छोटे से शुरुआती
अध्ययन से संकेत मिले हैं चिरआयु
यौवन संभव है। लेकिन इसके लिए ना
तो ये त्वचा की क्रीम से जुड़ा है, ना वैज्ञा-
निकों को ऐसा कोई फॉर्मूला मिला है और ना
ही ये हमेशा जवान रहने के बारे में है। बल्कि
इस शोध में जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी
गई है- जैसे तनाव घटाना, खान-पान में सुधार और
हल्की-फुल्की कसरत – जिनसे टेलोमीयर की लंबाई
बढ़ती है।

       टेलोमीयर यानी क्रोमोसोम
या गुणसूत्रों के सिरे जो हमारे बूढ़े
होने को नियंत्रित करते हैं। सादगी
भरी जीवनशैली ही चिर यौवन के लिए
काफी है। हालाकि इसके लिए संन्यासी
बनने की आवश्यकता नहीं है। दरअसल,
टेलोमीयर डीएनए का विस्तार है,जो हमारे
जेनेटिक कोड की रक्षा करते हैं। इनकी तुलना
अकसर जूते के फीतों के सिरे से होती है, क्योंकि
ये क्रोमोसोम को झड़ने और बिखरने से रोकते हैं
और जेनेटिक कोड को स्थिर रखते हैं। जब भी कोई
कोशिका विभाजित होती है तो टेलोमीयर छोटा हो जाता
है, उस बिंदु तक जब तक कि बूढ़ी हो रही कोशिका
और विभाजित न हो सके और निष्कि्त्रय हो जाए
या बूढ़ी होकर मर जाए। छोटे टेलोमीयर का संबंध
उम्र से जुड़ी कई बीमारियों से होता है जिनमें कैंसर,
दिल के रोग और डिमेंशिया शामिल हैं।

        कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय
के शोधकर्ताओं ने उन 10 पुरुषों पर
नजर रखी जो प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे
थे और उनसे कहा कि वो पौधों से मिली चीजों
पर आधारित खाना खाएं, कसरत करें और ध्यान
और योग की मदद से तनाव पर नियंत्रण रखें। इन
लोगों के टेलोमीयर की लंबाई शुरुआत में ली गई और
फिर पाच साल बाद ली गई। इसकी तुलना उन 25
लोगों से की गई, जिन्हें जीवनशैली बदलने को
नहीं कहा गया था। खास जीवनशैली का
पालन न करने वाले 25 लोगों के
टेलोमीयर तीन फीसद छोटे हो चुके
थे लेकिन जिन लोगों ने अच्छी जीवनशैली
का पालन किया उनके टेलोमीयर की लंबाई 10
प्रतिशत बढ़ गई।

              इस अध्ययन में जिन
पुरुषों ने जीवनशैली में बदलाव
किया, वो हफ्ते में छह दिन कम से
कम 30 मिनट पैदल चलते थे। शोधकर्ताओं
का कहना है कि ये जानने के लिए अभी और
शोध की जरूरत है कि ये नतीजे अहम हैं या नहीं।
इसके अलावा, टेलोमीयर की लंबाई में आए बदलाव
से सेहत पर सकारात्मक असर नहीं दिखा – कुछ
पुरुषों के टेलोमीयर लंबे हो सकते हैं लेकिन वो
ज्यादा वक्त तक जी पाएंगे या नहीं ये अलग
बात है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बायोके-
मिस्ट्री की प्रवक्ता डॉक्टर लैन कॉक्स
कहती हैं, यहा दो चीजें ध्यान में
रखनी होंगी, पहली तनाव की
वजह से टेलोमीयर के छोटे होने
का संबंध खराब सेहत से है।

                  दूसरी बात, इसके
विपरीत ऐसे चूहे जिनमें कैंसर
की संभावना हो उनमें टेलोमीयर की
लंबाई में बढ़ोतरी ज्यादा आक्रामक कैंसर
की ओर आगे ले जाती है। इस नए अध्ययन
में टेलोमीयर की लंबाई में कम बढ़ोतरी का
ज्यादा संबंध कैंसर के जोखिम की जगह
सेहत में सुधार से लगता है, हालाकि
ये तय होना अभी बाकी है। अब आप
आनुवाशिकी को भूल जाइए। युवावस्था
को लंबा करने के लिए जीवनशैली में ऐसे
बदलाव कीजिए जो सेहत के लिए अच्छे हो
सकते हैं। उन पर नज़र रखना आसान है।
इसमें भी किसी को शक नहीं होगा कि नियमित
व्यायाम से कई फायदे हैं।

            कैंसर का जोखिम कम
होने से डायबिटीज़ की आशका
कम होना, दिल की समस्याएं घटना।
तनाव की वजह से टेलोमीयर के छोटे होने
का संबंध खराब सेहत से है।

                  इसके विपरीत ऐसे चूहे
जिनमें कैंसर की संभावना हो उनमें
टेलोमीयर की लंबाई में बढ़ोतरी •यादा
आक्त्रामक कैंसर की ओर प्रवृल करती है।
इस नए अध्ययन में टेलोमीयर की लंबाई में
कम बढ़ोतरी का •यादा संबंध कैंसर के जोखिम
की जगह सेहत में सुधार से लगता है। ऑक्सफोर्ड
यूनिवर्सिटी के लेक्चरर डॉक्टर लैन कॉक्सने बताया
कि वो •यादातर शाकाहारी भोजन लेते थे, कम चिकनाई
वाला खाना खाते थे, योग करते थे और उन्हें •यादा सामाजिक
आसरा मिला।