छोटा कद आज एक समस्या बन गई है


           प्रतियोगिता के इस
युग में शारीरिक विकास की
कमी एक महत्वपूर्ण समस्या
बन गयी है। छोटे कद का बच्चों
के सामाजिक एवं मानसिक विकास
पर दुष्प्रभाव पड़ता है। शोध में पाया
गया है कि छोटे बच्चे सामान्य लंबाई
के बच्चों की तुलना में जीवनस्तर,
शिक्षा एवं रोजगार में पीछे रह जाते
हैं। समय पर उपचार द्वारा इन बच्चों
की लंबाई को सामान्य स्तर पर लाया
जा सकता है। इसके अतिरिक्त छोटा कद
किसी गंभीर रोग का एक मात्र लक्षण हो
सकता है।

A-कैसे बढ़ाएं बच्चों की लंबाई

          बच्चों के शारीरिक
विकास में स्वस्थ आहार
एवं व्यायाम का महत्वपूर्ण
योगदान होता है। जन्म से
लेकर छह महीने की आयु तक
बच्चों को मां का दूध पिलाना चाहिए।
इसके पश्चात ठोस पदार्थ देना चाहिए।
एक वर्ष की आयु से बच्चों को सभी खाद्य
पदार्थ दिए जा सकते हैं, जो परिवार के सद-
स्य लेते हैं।

                      खाने में प्रोटीन एवं
विटामिन की मात्रा समुचित होनी
चाहिए। इसलिए बच्चों को नियमित
रूप से दाल, हरी सब्जियां एवं फलों
का सेवन करना चाहिये। कोल्ड ड्रिंक,
जंक फूड एवं तली-भुनी चीजों का शारीरिक
विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है, इनसे बचना
चाहिये। शारीरिक विकास में नियमित शारीरिक
गतिविधियों का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रतिदिन
बच्चों को 30 से 45 मिनट तक खेलना चाहिए।

B–कौन है छोटा

                  सभी बच्चों की लंबाई
वर्ष में दो बार नापी जानी चाहिये।
जन्म पर बच्चों की औसत लंबाई 75
सेंटीमीटर होती है व दो वर्ष में बढ़कर
87 सेंटीमीटर हो जाती है। उसके बाद
बच्चों की लंबाई वर्ष में औसतन छह
सेंटीमीटर बढ़ती है। किसी आयु में
बच्चे की औसत लंबाई को जानने
के लिए आयु को 6 से गुणा कर 77
सेंटीमीटर से जोड़ें। यदि किसी बच्चे की
लंबाई इससे कम हो या एक वर्ष में 6 सेंटी-
मीटर से कम बढ़ रही है तो यह चिंता का विषय है।

C-कब करे छोटे कद की चिंता

                छोटे कद से पीड़ित
25 प्रतिशत बच्चे उस समय
डॉक्टर के पास आते हैं, जब
कोई मदद संभव नहीं होती।
इसका कारण यह भ्रांति है कि
बच्चों की लंबाई 20 वर्ष तक
बढ़ती है। यथार्थ में लड़कियों
में 14 वर्ष एवं लड़कों में 16
वर्ष तक शारीरिक विकास लगभग
पूरा हो जाता है। उसके बाद लंबाई बढ़ने
की संभावना नही होती। लड़कियों में मासिक
धर्म आरंभ होने के बाद कम लंबाई बढ़ती है।
इस कारण उचित उपचार के लिए लड़कियों को
10 व लड़कों को 12 वर्ष के पहले डॉक्टर से
मिलना चाहिये।

D-क्या है छोटे कद का कारण

              छोटा कद एक आम
समस्या है एवं तीन प्रतिशत
बच्चे इससे ग्रसित होते हैं। छोटे
कद का सबसे महत्वपूर्ण कारण ?
फइॠनकषज् है। बच्चों की लंबाई
माता और पिता की लंबाई पर भी
निर्भर करती है। यह ध्यान रखना
महत्वपूर्ण है कि तीन में से एक
छोटे बच्चे को कोई गंभीर रोग होता
है। इनमें सीलिअक रोग (गेहूं से एलर्जी),
थाइराइड की गड़बड़ी, ग्रोथ हार्मोन की कमी
व लीवर एवं किडनी रोग प्रमुख हैं। प्राय: छोटा
कद इन रोगों का पहला लक्षण होता है।

E-क्या करें यदि बच्चा छोटा हो

         यदि उचित खानपान
के बाद भी बच्चों की लंबाई
न बढ़ रही हो तो डॉक्टर से
संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर
बच्चों के विकास की ग्रोथ चार्ट
द्वारा अन्य बच्चों एवं उनके अभि-
भावकों से तुलना करते हैं। यदि
बच्चों की लंबाई बहुत पीछे है तो
जांच आवश्यक है।

F-कैसे होता है छोटे बच्चों का उपचार

         आधुनिक शोध के
आधार पर सभी रोगों का
सफल उपचार संभव है। गेहूं
की एलर्जी एवं थाइराइड की
कमी के उपचार से बच्चों के
विकास में आशातीत बढ़ोतरी
होती है। इसके अलावा ग्रोथ हा-
र्मोन द्वारा बच्चों की लंबाई 20-25
सेंटीमीटर तक बढ़ जाती है। ग्रोथ
हॉर्मोन अब ग्रोथ हॉर्मोन की कमी के
अतिरिक्त अन्य परिस्थितियों में भी
सफलता के साथ प्रयोग हो रहा है।

                   दुर्भाग्य से कई
अभिभावक बच्चों की लंबाई
बढ़ाने के लिए ओवर द काउंटर
दवाईयों का प्रयोग करते हैं। इन दवाओं
का कोई प्रमाणित लाभ नहींहै एवं दुष्प्रभाव
अधिक होता है।