पहले स्वयं सुखी रहें दुनियांदारी बाद में


                   एक बार मां बन
गई तो समझ लीजिए आपकी
लाइफ आपकी नहीं रही। सारी
उम्र बच्चों और पति को समर्पित
करना पड़ता है। उनकी तरफ से
जिम्मेदारी पूरी होने के बाद ही अपने
लिए समय मिल पाता है, पर यह जिम्मे-
दारी पूरी ही कहां होती है? सच तो यह है
कि अपने लिए टाइम बिल्कुल नहीं है!’
कहती हैं होममेकर हेमा सिंह। बात केवल
हेमा की नहीं है। ज्यादातर महिलाएं ऐसा
सोचती हैं। वह कामकाजी हों या होममेकर
इस खास सोच में ज्यादा फर्क नहीं है।

          एक हालिया सर्वे से
भी यह बात साबित हो चुकी
है। क्या आप फिट हैं, खुद के
लिए समय निकाल पाती हैं? साल
में खास चेकअप कराना जरूरी मानती
हैं? महिलाओं से ऐसे सवाल किए जाएं तो
जवाब अक्सर ‘ना’ में ही मिलता है। एक
शिक्षिका डॉली इसे खास तरह का माइं-
डसेट मानती हैं, ‘दरअसल, खुद के
प्रति कैजुअल अप्रोच या यूं कहें
बेफिक्री एक आदत बन चुकी है।
यह एक माइंडसेट भी है, जिसे
महिलाएं खुशी-खुशी ढो रही हैं।’

A-निवेश सेहत के लिए

                   ‘अक्सर खर्च से
बचने के लिए महिलाएं अपना
रूटीन चेकअप नहीं करवाना चाहतीं।
वे यह भूल जाती हैं कि भविष्य में यदि
किसी बड़ी बीमारी का सामना करना
पड़ा तो उसके साथ बड़े खर्चे भी
जुड़ जाएंगे,’ कहती हैं लाइफ
स्टाइल एक्सपर्ट डॉ. रचना
सिंह। वह जोर देकर कहती
हैं कि महिलाओं को अपनी
सोच बदलती होगी। वह उन
महिलाओं को एक बढि़या सुझाव
देती हैं, जो जूइॅल्रि, कपड़े या घर के
जरूरी सामानों के लिए पैसे जोड़ती हैं।

             यदि वे इन्हीं पैसों
का इस्तेमाल अपनी हेल्थ
चेकअप के लिए करें तो सेहत
के लिए किया गया यह खर्चा एक
निवेश है जो उन्हें आने वाले समय
में तमाम बीमारियों से बचा सकता है।
सबसे बड़ी बात वह एक तरह से परिवार
का पैसा भी बचाती हैं और इससे परिवार के
सदस्यों को भी खुशी मिलती है।

B-आपकी थाली कितनी रिच है

            मीडिया प्रोफेशनल
रेणु के मुताबिक, ‘जो खुद
का ख्याल नहीं रख पाएगा,
वह दूसरों का ख्याल कैसे रख
पाएगा? पर महिलाएं यह जानते
हुए भी इस बात पर अमल नहीं
कर पातीं। इसका एक ही कारण है
वे खुद को परिवार का एकमात्र रखवाला
समझती हैं।’

                रेणु की बात उन
महिलाओं पर सही बैठती है,
जो घर के सदस्यों को खाना
खिलाने के बाद सबसे अंत में
भोजन करती हैं। डॉ. रचना के
मुताबिक, बचा-खुचा खाने वाली
महिलाएं अपने पेट को डस्टबिन की
तरह इस्तेमाल करती हैं।

                    यही वजह है कि
संतुलित आहार उनकी डिक्श-
नरी में तो है, लेकिन इससे वे
कोसों दूर हैं। जानी-मानी न्यूट्रि-
शनिस्ट ईशी खोसला कहती हैं,
‘ऐसी महिलाओं की थाली में अनाज
यानी चावल, रोटी की मात्रा अधिक
नजर आती है। उसकी तुलना में स-
ब्जियों की मात्रा आधी होती है। फल
खाना तो उनके लिए एक्स्ट्रा वर्क करने
जैसा है।’ वह उन्हें सलाह देती हैं, ‘आपकी
थाली रिच हो, पोषक तत्वों से भरपूर हो, इस
बात का ध्यान रखें। उसमें आधा से ‘यादा अनाज
यानी चावल, रोटी आदि नहीं होनी चाहिए। आधी
थाली में दाल, सब्जियां और फल भी रखें। खाने के
अतिरिक्त एक मुट्ठी मिक्स सूखे मेवे लें। इसमें काजू,
किशमिश, बादाम, अखरोट, पिस्ता आदि शामिल हों।
अगर आप नॉनवेज पसंद करती हैं तो मछली को
प्राथमिकता दें। इसमें ओमेगा-X फैटी एसिड,
सेलेनियम आदि होता है। मछली के बाद अंडा
और चिकेन को प्राथमिकता दें। मटन लेना चाहें
तो कभी-कभार ही लें।

C-एक्सरसाइज से कैसा डर

                 समय कम है और
काम ज्यादा। यदि ब’चों का
स्पेशल असाइनमेंट या एग्जाम
है और पति को कहीं बाहर जाना
है तो टाइट शिड्यूल हो जाता है आपका।
डॉ. रचना के अनुसार, ‘महिलाओं के साथ
ऐसी सिचुएशन तो रहेगी ही, पर उनके लिए
यह जानना जरूरी है कि एक्सरसाइज उनकी
कार्यक्षमता को बढ़ाने में अहम् योगदान देती
है।’ वह आगे कहती हैं, ‘यदि आप कुछ समय
निकालकर सुबह के समय टहलने की आदत
भी डाल लेती हैं तो काफी फर्क पड़ता है। हां,
यदि सुबह का समय मुश्किल लगता है तो दिन
के समय या शाम के वक्त कुछ टाइम निकाल सकती हैं।’

D-ये पल आपका है

         मनोवैज्ञानिक अनु गोयल
के मुताबिक, ‘उन चीजों से दूर रहें,
जो आप पर दबाव बनाते हैं या नका-
रात्मक सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
पॉजिटिव रहने से आप तरोताजा महसूस
करेंगी।

1-किताब, जो आपके
दिल को छूती हो, मन को
हल्का करती हो, जिंदगी के
प्रति प्रेरित करती हो, उसका चुनाव करें।

2-संगीत सुनें,
यदि कोई वाद्ययंत्र
बजाना आता है तो कुछ
पल उसकी धुन में खोने के
लिए जरूर निकालें।

3-कुकिंग का शौक
है तो यह भी बढि़या स्ट्रेस
बस्टर है। खाली वक्त में नई
रेसिपी बनाने का आनंद ही कुछ
और है, यह आप जरूर महसूस करेंगी।

4-ब्रीदिंग एक्सरसाइज
से काफी हल्का महसूस करेंगी।
एकाग्रता बनेगी, मन सुंदर विचारों
की तरफ जाएगा।

               घर के कामों और
अन्य जिम्मेदारियों से कितनी
भी थकान हो, थोड़े से फन और
एंटरटेनमेंट से कार्यक्षमता बढ़ेगी
और भर उठेंगी भरपूर ऊर्जा से।

E-चेकअप के लिए नो बहाना

            एक हालिया स्टडी के
मुताबिक, ज्यादातर महिलाओं
में मृत्यु का बड़ा कारण उनमें
देर से बीमारी का पता चलना
है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि
जरा-भी तकलीफ हो तो डॉक्टर
को जरूर दिखाएं। पेटदर्द और सिरदर्द
जैसी समस्याओं को आमतौर पर तूल नहीं
दिया जाता, जबकि ये मामूली सी तकलीफ
कभी बड़ी बीमारी का आगाज हो सकती है।
स्टडी के अनुसार, जिस घर की महिलाएं हेल्दी
होती हैं, उस घर के सभी सदस्य हेल्दी और फिट
होते हैं।