मोटापा मस्तिष्क के लिए घातक है


                  मोटापा अपने
आपमें एक ऐसी स्वास्थ्य
समस्या है, जिससे विश्व का
हर तीसरा व्यक्ति परेशान है।
ब्रिटिश स्वास्थ्य विभाग द्वारा
हाल ही में किए गए एक अध्य-
यन के मुताबिक अगर एक बार
वजन नियंत्रण से बाहर हो गया तो
उसे दोबारा सही मानक पर लाना बहुत
मुश्किल है। ब्रिटेन में हर साल लगभग
12 लाख लोग डाइटिंग करते हैं।

             इसकी मदद से वे
काफी हद तक वजन कम
करने में कामयाब भी होते हैं,
लेकिन साल भर के भीतर उनका
वजन दोबारा बढ़ जाता है। इस संबंध
में शोध कर रही वैज्ञानिक डॉ. रेबेका
हार्डी के अनुसार, ‘कुछ लोग डाइटिंग,
व्यायाम और दवाओं की मदद से मोटापे
पर नियंत्रण जरूर कर लेते हैं, लेकिन
उनकी खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं
पाती।

            वजन बढ़ने की
समस्या केवल शारीरिक
स्वास्थ्य से संबंधित नहीं है,
बल्कि इसका असर हमारे मस्ति-
ष्क पर भी पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ
कैलिफोर्निया के अध्ययनकर्ताओं ने दावा
किया है कि बढ़ते वजन की वजह से अकसर
लोग डिमेंशिया जैसी बीमारी के शिकार हो जाते
हैं। डिमेंशिया में मनुष्य का दिमाग सिकुड़ने लगता
है, जिससे उसकी याद्दाश्त घटने लगती है।

            अमेरिका में शोधकर्ताओं
ने 1300 लोगों पर यह शोध किया,
जिसमें यह पाया गया कि स्वस्थ लोगों
की तुलना में ओवरवेट लोगों के मस्तिष्क
का हिप्पोकैंपस नामक हिस्सा काफी तेजी से
सिकुड़ता है, जो याद्दाश्त को सुरक्षित रखने
का काम करता है।

         अंत में, मोटापे से त्रस्त
लोगों के लिए एक अछी खबर
यह है कि आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों
ने पहली बार ब्राउन फैट तैयार किया
है। यह एकअद्भुत टिश्यू है, जो ऊर्जा से
गर्मी पैदा करता है। इस नवीनतम तकनीक
से मोटापा कम करने में मदद मिलेगी। सिडनी
के गारवान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च
की एक टीम ने पाया कि वयस्कों की टिश्यूज
से ब्राउन फैट का निर्माण किया जा सकता है।

            इससे यह उम्मीद जगी
है कि किसी भी व्यक्ति के लिए
उसके शरीर से बाहर ब्राउन फैट
तैयार करके बाद में उसका प्रत्यारो-
पण किया जा सकता है। डॉ. पॉल
ली के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने प्रयोग-
शाला में छह रोगियों के टिश्यूज से
सफलतापूर्वक ब्राउन फैट का विकास
किया, जो बाद में उनका वजन कम
करने में कारगर साबित हुआ।

               वैसे, अगर आप
अपना वजन घटाना चाहते
हैं तो अखरोट खाना शुरू कर
दें। कैनेडा के टोरंटो विश्वविद्यालय
के अनुसंधानकर्ताओं ने अध्ययन के
दौरान यह पाया कि अखरोट वजन
बढ़ाने के लिए जिम्मेदार बुरे कोलेस्ट्रॉल
एल.डी.एल.का स्तर घटाने में प्रभावी होता
है।