आपके हाथ में हैअपने बच्चे की सेहत


                         नन्हें-मुन्नों के आहार
के संबंध में लोगों में अनेक भ्रांतियां
व्याप्त हैं। पुरानी पीढ़ी जो सोचती है, नई
पीढ़ी की सोच उससे बिल्कुल अलग होती है।
इस कारण बच्चों के लालन-पालन व खानपान
को लेकर अक्सर घर में कहा-सुनी हो जाती है।
कभी-कभी तो बात यहां तक बढ़ जाती है कि सास
और बहू में मनमुटाव तक हो जाता है। जैसा कि
श्रीमती रीना और उनकी सासू मां श्रीमती
सरला देवी के बीच अक्सर होता रहता
है। उदाहरणस्वरूप सरला देवी कहती
हैं कि बहू छोटू की आंखों में रोज काजल
लगाया करो, इससे इसकी आंखों की रोशनी
तेज होगी, जबकि रीना का कहना होता है कि
मां मैंने डॉक्टर से पूछा था, उनका कहना था कि
यह बात सच नहीं है, काजल लगाने से रोशनी
का कोई संबंध नहीं है। इसी प्रकार की ढेर सारी
भ्रांतियां कुछ महिलाओं में बनी हुई हैं। आज हम ऐसी
ही कुछ भ्रांतियों की हकीकत बताने जा रहे हैं।

A–भ्रम

   नवजात को शहद
चटाने और पानी में
ग्लूकोज मिलाकर देना
अच्छा रहता है।

B-          हकीकत
ऐसा बिल्कुल नहीं है।
प्रसव के उपरांत मां का दूध ठीक
से उतरने में दो से तीन दिन लग
जाते हैं। शुरू के दो दिन तक निकलने
वाले गाढ़े हल्के पीले रंग के दूध में प्रतिरोधक
एंटीबॉडी व पौष्टिक तत्व अधिक होते हैं, अत:
बच्चो को यह दूध जरूर पिलाएं। बच्चो को पानी
में ग्लूकोज व शहद आदि देने से संक्रमण की
संभावना अधिक रहती है।

C-भ्रम

    एक-दो महीने के
बाद बच्चे को ऊपर के
दूध की आदत डाल देनी चाहिए।

D-हकीकत

        ऐसा कभी नहीं
करना चाहिए। शिशु के
शरीर की संरचना व जरूरत
के हिसाब से ही मां के शरीर में
दूध बनता है। छह माह की उम्र तक
शिशु को न तो ऊपरी आहार की आव-
श्यकता होती है और न ही उसे पचाने की
क्षमता। स्तनपान कराने के बजाय ऐसा करने
से बच्चा मां के दूध द्वारा मिलने वाले पौष्टिक
तत्वों से वंचित रह सकता है, जो उसके
शारीरिक विकास के लिए अत्यंत जरूरी
होते हैं। हां, सिर्फ विशेष परिस्थितियों में
आप ऊपर का दूध कटोरी चम्मच से दे
सकती हैं न कि बोतल से।

D-भ्रम

   बोतल से दूध पिलाने
से भी बच्चो का पेट भर
जाता है और उसे कोई नुक-
सान नहीं होता है।

E-हकीकत

                यह सोच बिल्कुल
गलत है। बोतल से दूध पिलाने
से बच्चो को संक्रमण, श्वांस रोग
व एलर्जी आदि का खतरा रहता है।
साथ ही ऐसे बच्चों की रोग-प्रतिरोधक
क्षमता भी बहुत कम हो जाती है और वे
जल्दी-जल्दी बीमार भी पड़ सकते हैं।

F-भ्रम

      लेटकर दूध पिलाने से
बच्चो को आराम मिलता है।

G-हकीकत

           ऐसा कतई नहीं है,
बल्कि लेटकर दूध पिलाने
से दूध बच्चो की श्वांस नली
को अवरुद्ध कर सकता है। यही
नहीं कई बार लेटकर दूध पिलाने पर
दूध कान में चला जाता है, इससे कान
में संक्रमण हो सकता है और बच्चे को कान
दर्द की समस्या भी हो सकती है।

H-भ्रम

            थोड़ा बड़े बच्चे को
शुद्ध दूध देने की बजाय आधा
दूध और आधा पानी देना चाहिए।
ऐसा न करने पर उसका लिवर खराब
हो सकता है।

I-हकीकत

,,,,,,,,वैज्ञानिक तथ्यों से
यह पता चला है कि दूध में
पानी मिलाकर देने से बच्चा कु-
पोषण का शिकार हो सकता है और
उसका शारीरिक विकास बाधित हो जाता
है। दूध में पानी बिल्कुल न मिलाएं। यदि बच्चा
प्रीमै ‘योर है तो भैंस के दूध में पानी मिलाकर दिया
जा सकता है।

j-भ्रम

                 बच्चे को खांसी-
जुकाम हो तो उसे केला और
संतरे का जूस नहीं देना चाहिए।
कारण, ये फल ठंडे होते हैं। साथ ही
उसे नहलाना नहीं चाहिए।

k-हकीकत
       

                इस बात में बिल्कुल
सच्चाई नहीं है कि ये फल ठंडे
होते हैं। अगर बच्चे को अन्य कोई
समस्या नहीं है तो उसे केला और संतरे
का जूस दे सकती हैं। बीमारी में नहलाने
से भी कोई परेशानी नहीं होगी, बल्कि सफाई
रखना लाभदायक सिद्ध होगा।

L-भ्रम

            बच्चो को अनार का जूस
देना चाहिए। इससे उसके शरीर
में खून की कमी नहीं होने पाती।

M-हकीकत

          यह बात सही नहीं है।
लाल रंग का होने के बावजूद
केला व सेब की तुलना में अनार
में खून बनाने वाले तत्व कम होते
हैं। लाल रंग इसमें पाए जाने वाले कुछ
खास तत्वों के कारण होता है। इसके
स्थान पर बच्चे को चना, गुड़, पालक,
चुकंदर आदि देना बेहतर विकल्प होगा।

N-भ्रम

       जो बच्चे अंडा, मछली
व मांस खाते हैं, उनका विकास
सही तरह से होता है।

O-हकीकत

,             यह एक गलत मान्यता है,
क्योंकि फलों, हरी सब्जियों, दाल, दूध,
दही व दूध से बनी अन्य चीजों जैसे पनीर,
दही, छाछ में काफी सारे पौष्टिक तत्व पाए
जाते हैं, जो शिशु के विकास के लिए जरूरी होते
हैं। इन सभी को सही मात्रा में ‘बैलेंस्ड डाइट’ के
अंतर्गत लेने से ब’चे को संपूर्ण पोषण मिलेगा।
(बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सी. एस. गांधी से बातचीत पर आधारित)