रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है नीम


                                  कई औषधीय
गुणों के लिए सदियों से प्रचलित नीम
वर्तमान युग की बड़ी जानलेवा बीमारी
कैंसर के निदान में महत्वपूर्ण स्थान रखता
है, इस तथ्य का खुलासा सेहत वैज्ञानिकों ने
किया है। शोध में नीम की पलियों में एक विशेष
कंपाउंड पाया, जो कैंसर सेल्स के साथ शरीर प्रति-
रोधक क्षमता की लड़ाई को सपोर्ट देने में खासा सक्षम है।

                   वैसे भी कई मायनों में
नीम का सेवन शरीर के लिए लाभ-
कारी है। एक जर्नल में प्रकाशित शोध
में वैज्ञानिकों ने उन्नत चरण के सर्वाइकल
कैंसर से पीड़ित 17 मरीजों की कैंसर सेल्स
लेकर उस पर किए प्रयोग के नतीजे का खुलासा
किया है। इस अध्ययन से उन्हें नीम की पली द्वारा
कैंसर के विकास को रोकने के तरीके का पता चल
गया। पहले कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में कहा गया था
कि नीम प्रजनन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है,
लेकिन हमारे अध्ययन में इसे सिरे से नकार दिया
गया। त्वचा रोगों के लिए जैविक दवा बेंगलूर जैव
प्रौद्योगिकी कंपनी बायोकॉन ने पुराने त्वचा रोग
के इलाज के लिए जैविक दवा पेश की है।

                  इस दवा का शोध,
विकास और विनिर्माण देश में
किया गया है। कंपनी ने कहा है
कि वह इस दवा को वैश्रि्वक स्तर पर
पहुंचाने के लिये वैश्रि्वक सहयोगी को
अंतिम रूप देने के लिये बातचीत कर
रही है। बेंगलूर स्थित कंपनी की चेयर-
पर्सन तथा प्रबंध निदेशक किरण मजुमदार
शॉ ने यहा संवाददाता सम्मेलन में कहा कि
अलजुमाब नाम की दवा लंबे समय से चली आ
रही त्वचा रोगों के इलाज के लिये है। यह अब देश
में वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध है।

                      इसकी कीमत बाजार में
उपलब्ध ऐसी ही दवाओं के मुकाबले
कम से कम 50 प्रतिशत कम है। उन्होंने
कहा कि हम इस दवा को दुनिया के अन्य
देशों में पहुंचाना चाहते हैं और इस दिशा में
प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में कई कंपनियों
के साथ बातचीत जारी है। किरण ने कहा, यह
बड़ी सफलता है और इसका व्यापक वैश्रि्वक
प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इसके
लिये वैश्रि्वक सहयोगी के साथ समझौता बस
कुछ समय की बात है। बायोकॉन के अनुमान
के अनुसार त्वचा रोग से संबद्ध दवाओं का बाजार
2016 तक 8 अरब डॉलर पहुंच जाने का अनुमान
है। कंपनी ने 2006 में अलजुमाब पर काम करना भी
शुरू किया था।