कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स-2


1-कल्पना चावला-

1-सारा देश भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला समेत
सात अंतरिक्ष यात्रियों के सकुशल धरती पर उतर आने की दुआएँ माँग
रहा था। हर जगह पहले से ही उनके स्वागत की तैयारियाँ की जा रही थीं।
अमरीकी अंतरिक्ष शटल कोलंबिया, 16 दिवसीय अंतरिक्ष अभियान को पूरा कर
धरती पर लौट रहा था। इस अभियान में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अपने प्राणों को संकट
में डालकर ऐसे अनेक शोध किए थे, जिन्हें पृथ्वी पर कर पाना संभव नहीं था। इस मिशन
में मानव शरीर पर अंतरिक्ष का प्रभाव, कीट पतंगों पर अंतरिक्ष की भारहीनता का प्रभाव व कैंसर
कोशिकाओं की समीक्षा आदि अनेक नवीन शोध किए गए।

2-नासा बड़ी बेताबी से अपने शटल व उसके यात्रियों की
सकुशल वापसी के लिए प्रतीक्षारत था। भारत में भी उमंग की
लहर फैली हुई थी क्योंकि इस अभियान में भारत की बेटी ‘कल्पना
चावला’ भी शामिल थीं जिन्हें सब ‘के.सी.’ कहकर पुकारते थे।

3-कल्पना के परिवार जन एक रात पहले ही फ्लोरिडा
पहुँच गए थे जहाँ कल्पना का अंतरिक्षयान कोलंबिया पहुँचने
वाला था। उसी भीड़ में कल्पना के पति जीन-पियरे हैरीसन भी
शामिल थे। कल्पना के पिता जी अपनी बेटी से मिलने को आतुर थे।

4-हरियाणा के करनाल शहर में तो उत्सव जैसा माहौल था।
चूँकि करनाल में ही कल्पना का बचपन बीता और करनाल के टैगोर
निकेतन से ही अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की। उस विद्यालय के सभी छात्र,
कल्पना चावला की सकुशल वापसी के उत्सव को मनाने के लिए एकत्र थे।

5-डॉ. कल्पना के पिता ने 28 जनवरी 2003 को कल्पना
से अंतरिक्ष में बात की। नाशा की वीडियो कांफ्रेंस द्वारा उन्हें यह
सुविधा प्राप्त हुई। निश्चय ही यह उनके जीवन के लिए स्वर्णिम पल थे,
जब उन्हें अंतरिक्ष में बैठी कल्पना से बात करने का अवसर मिला। किसने सोचा
था कि छोटे से शहर में पली-बढ़ी कल्पना की उड़ान इतनी ऊँची हो जाएगी कि वह
एक दिन पूरे विश्व में एक जाना-पहचाना नाम बन जाएगी।

6-कल्पना इससे पहले भी एक बार अंतरिक्ष में जा चुकी थीं।
गुरुत्वाकर्षण विषय में विशेषज्ञता के कारण ही उसका चयन किया
गया। जब वे 19 नवम्बर,1997 को स्पेश शटल कोलंबिया द्वारा अंतरिक्ष
की परिक्रमा के लिए निकलीं तो इसी दौरान उनके स्पेस शटल का एक हिस्सा
‘स्पार्टन’ अपने मुख्य भाग से अलग हो गया। डॉ. कल्पना ने अपनी सूझ-बूझ व
बुद्धिमत्ता के साथ अपने दो सहकर्मियों की सहायता से, 3000 पौंड के उस हिस्से को
यान से जोड़ने में सफलता प्राप्त की। उनकी इस सफलता पर नासा के मुख्य प्रशासक श्री
डेनियल गोल्डेन ने कहा था कि-अंतरिक्ष अत्यंत जटिल विष है। स्पेस शटल से अलग हुए हिस्से
को दोबोरा जोड़ने में डॉ.कल्पना चावला ने जिस सूझ-बूझ धैर्य व साहस का परिचय दिया है वह बहुत
सराहनीय है।’’

7-प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना, 16 जनवरी, 2003 को
अन्य वैज्ञानिकों के साथ अंतरिक्ष गईं। इस यात्रा में डॉ. कल्पना के अभियान
का थीम—‘‘स्पेस रिसर्च एंड यू’’ (अंतरिक्ष अनुसंधान व आप) थी। वह यान लगातार
दिन-रात एक प्रयोगशाला की तरह काम कर रहा था।

8-फ्लोरिडा स्थित अंतरिक्ष केंद्र पर खड़े परिजनों की उत्सुकता
बढ़ती जा रही थी। टी.वी. स्क्रीन पर कोलंबिया स्पेश शटल एक सफेद
लकीर जैसा दिखाई दे रहा था। अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले सात वैज्ञानिकों के
अतिरिक्त इस मिशन में, केनेडी अंतरिक्ष केंद्र के 70 अन्य वैज्ञानिक भी शामिल थे,
जो नियंत्रण कक्ष में शटल उतारने की प्रक्रिया में योगदान दे रहे थे।मौसम बिलकुल साफ
था किंतु अंतरिक्ष से वायुमंडल में प्रवेश करते ही सब कुछ तबाह हो गया। उस समय कोलंबिया
यान की गति 20100 कि.मी. प्रतिघंटा थी। उसे अंतरिक्ष से वायुमंडल में प्रवेश करते समय दो एस
टर्न लेने थे परंतु इसी दौरान एक ऐसी दुर्घटना घटी जिसने सबके दिल दहला दिए। यह हादसा पृथ्वी से
करीब 40 मील ऊपर हुआ था। विमान के बाएँ विंग पर लगी तापरोधी प्रणाली की टाइल्स गिरने के कारण
ऐसा हुआ।

9-फरवरी 2003 को भारतीय समयानुसार शाम 6 :45 पर कोलंबिया
अंतरिक्ष की कक्षा से पृथ्वी के लिए रवाना हुआ। 7:23 पर हाइड्रोलिक सिस्टम
के ताप की गणना करने वाले उपकरण से नासा का संपर्क टूट गया। इसी तरह एक
दो मिनट के भीतर अन्य उपकरणों से भी नासा का संपर्क टूटने लगा। शाम 7:30 बजे
62140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कोलंबिया का संपर्क बिलकुल टूट गया। कुछ लोगों को
ऐसा लगा मानो कोलंबिया के टुकड़े गिर रहे हों। कुछ ही मिनटों के बाद टेक्सास के ऊपर जोरदार
धमाका सुनाई दिया। काँच के दरवाजे व खिड़कियाँ चटक गए। केप केनेवरल में सुबह के 8 बजे थे।
धरती पर उतरने के करीब 16 मिनट पूर्व यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बाद में पता चला कि कोलंबिया
के छोटे-छोटे टुकड़े 190 कि.मी. के क्षेत्र में बिखर गए थे।सभी को ऐसा लग रहा था कि कहीं कोई अनहोनी
घट गई है। हालांकि नासा अधिकारी काफी समय तक शांत रहे। उन्होंने दुर्घटना की खबरें मिलने के बावजूद शटल
से संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन वहाँ से जवाब देने के लिए कोई नहीं बचा था।आखिर में, एक घंटे बाद अंतरिक्ष
केंद्र में लगा झंडा आधा झुका दिया गया। यान चालक दल के परिवारों को केनेवरल में बुलाया जाने लगा। कल्पना के परिवार
वाले तो अब तक स्तब्ध थे। उनकी बिटिया, 6 अंतरिक्ष वैज्ञानिकों सहित, अंतरिक्ष में ही विलीन हो चुकी थी। करनाल में स्कूली
बच्चों की खुशियों से गूँजता माहौल शोक में बदल गया।

10-अंतरिक्ष यात्रा का नाम लेते ही स्वर्गीय कल्पना चावला का चेहरा
सामने आ जाता है, जिन्हें भारत की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री होने का
गौरव प्राप्त हुआ। कोलंबिया अंतरिक्ष यान दुर्घटना ने उन्हें हमसे छीन लिया। उनका
सपना अधूरा रह गया तथा समस्त अंतरिक्ष जगत में चुप्पी-सी छा गई।

2-सुनीता विलियम्स –

1-उनके अधूरे सपने को साकार करने के लिए भारतीय मूल की अमरीकी
अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स सामने आईं। सुनीता के पिता श्री दीपक पांड्या,
भारत के गुजरात राज्य से संबंध रखते हैं। सुनीता अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर कदम
रखने वाली पहली भारतीय महिला हैं। सुनीता ने स्पेस मैराथन का रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ
अंतरिक्ष प्रयोगशाला में ऐसे कई परीक्षण भी किए, जो भावी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए लाभदायक सिद्ध
होंगे। सुनीता ने इस साहसिक अभियान में रुचि दिखाकर यह प्रमाणित कर दिया कि महिलाएँ भी पुरुषों से
किसी तरह कम नहीं, वे बड़े से बड़े लक्ष्य को साकार करने का साहस रखती हैं।

2-अहमदाबाद : भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम
एक बार फिर रविवार 15 जुलाय 2012 को सुबह 8.10 पर कजाकिस्तान के बैकानूर
कास्मोड्रोम से एक रूसी अंतरिक्ष यान से दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस)
के लिए रवाना हुईं,और अगले दो दिन में अपने पडाव में पहंच जायेंगे।बतौर महिला अंतरिक्ष यात्री, उनके
नाम सर्वाधिक समय अंतरिक्ष में बिताने का रिकार्ड दर्ज हैं। वह अंतरिक्ष में कुल 195 दिन बिता चुकी हैं। और
इस समय सुनीता चार महीने तक अंतरिक्ष में रहेंगी। सुनीता अपने साथ मेढक और मछली ले गईं हैं। इन जीवों
को अंतरिक्ष में रखा जाएगा ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि वहां जीव किस तरह जिंदा रह सकते हैं।
यह मिशन नवंबर में खत्म होगा।

3-नासा के अनुसार`सोयूज टीएमए-05 एम` अंतरिक्ष यान में सुनीता के
साथ रूसी संघीय अंतरिक्ष एजेंसी के फ्लाइट इंजीनियर यूरी मालेन्चें और जापान
के अंतरिक्ष अन्वेषण एजेंसी के अकिहिको होशिदे भी यात्रा पर साथ हैं। सुनीता एक्सपेडिसन
-32 के चालक दल में एक फ्लाइट इंजीनियर के तौर पर गई हैं और अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद
एक्सपेडिसन-33 की कमांडर होंगी। इस अत्यधिक व्यस्त अभियान के दौरान सुनीता और उनके सहयोगी
दो बार अंतरिक्ष में चहलकदमी करेंगे और कई वैज्ञानिक अनुसंधान करेंगे।इस मिशन पर जाने से पूर्व सुनीता
ने कहा कि-इस मिशन की सफलता के लिए में पूर्णतःआश्वान्वित हूं।

4-दुनिया के लोग सुनीता की पेशेगत उपलब्धियों के बारे में ज्यादा दिलचस्पी
रखते हैं, लेकिन उनका निजी जीवन भी खुशियों से भरा-पूरा है। सुनीता ने वर्ष
1995 में फ्लोरिडा इन्स्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातकोत्तर की डिग्री ली।

5-उल्लेखनीय है कि सुनीता के पिता डॉक्टर दीपक पांड्या वर्ष 1957 में
गुजरात विश्वविद्यालय से एमडी की डिग्री लेने के बाद अहमदाबाद से अमेरिका चले गए थे।

6-कल्पना चावला के रूप में जो अपूर्णीय क्षति हुई थी, उसे तो कोई नहीं
भर सकता किंतु सुनीता की वापसी से उन घावों पर मरहम अवश्य लग जाएगा।
कल्पना के परिजनों की आँखों में बेटी को खोने का गम तो है ही किंतु सुनीता बेटी
की सकुशल वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी कर रहे हैं।

7-हमें यह भी देखना होगा कि कल्पना चावला की यात्रा के समय पहले से ही
गडवडी होने की सम्भावना जताई जा रही थी,और अन्ततः अन्होनी को कोई न टाल
सका। और इस बीच इन सारे दोषों को दूर करने का प्रयास किया गया। इस यान में गडवडी
की कम सम्भावनाएं बताई जा रही हैं।

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